दिग्गज खिलाड़ी जिन्होंने साल 2016 में खेल से लिया सन्यास

अब कुछ ही दिनों में साल 2016 अपने मुकाम पर पहुचने वाला है और हम सब एक नए साल की

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इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकारिता – 1

भारतीय सेना की एक यूनिट है टेक्निकल सर्विस डिवीजन (टीडीएस), जो दूसरे देशों में कोवर्ट ऑपरेशन करती है. यह भारत की ऐसी अकेली यूनिट है, जिसके पास खुफिया तरीके से ऑपरेशन करने की क्षमता है. इसे रक्षा मंत्री की सहमति से बनाया गया था, क्योंकि रॉ और आईबी जैसे संगठनों की क्षमता कम हो गई थी. यह इतनी महत्वपूर्ण यूनिट है कि यहां क्या काम होता है, इसका दफ्तर कहां है, कौन-कौन लोग इसमें काम करते हैं आदि सारी जानकारियां गुप्त हैं, टॉप सीक्रेट हैं, लेकिन 16 अगस्त, 2012 को शाम छह बजे एक सफेद रंग की क्वॉलिस गाड़ी टेक्निकल सर्विस डिवीजन के दफ्तर के पास आकर रुकती है, जिससे दो व्यक्ति उतरते हैं. एक व्यक्ति क्वॉलिस के पास खड़े होकर इंतज़ार करने लगता है और दूसरा व्यक्ति यूनिट के अंदर घुस जाता है.

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सेवानिवृत्‍त लेफ्टिनेंट कमांडर बेनीवाल : नियमों के जाल में उलझी पेंशन

तमाम सर्वे बताते हैं कि आज के युवा सेना में नौकरी करने की बजाय अन्य कोई पेशा अपनाना चाहते हैं. ऐसा नहीं है कि सेना की नौकरी के आकर्षण में कोई कमी आई हो या फिर वहां मिलने वाली सुविधाओं में कोई कटौती की गई हो, बावजूद इसके विभिन्न वजहों से सेना में नए अधिकारियों की कमी दिख रही है. उन्हीं वजहों में से एक है पेंशन का मामला. सेना में पेंशन विसंगतियों को लेकर संभवत: पहली बार कोई रिटायर्ड नौसेना अधिकारी सार्वजनिक रूप से सामने आया है. आखिर क्या है पूरी कहानी, पढ़िए चौथी दुनिया की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में….

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सेवानिवृत जवानों के पुनर्वास के लिए : भारतीय सेना का ऐतिहासिक क़दम

शहरों और गांवों में शांति से रहने वाले हम आप जैसे लोगों को शायद ही कभी यह ध्यान में आता है कि यह शांति और आज़ादी एक ही झटके में खत्म हो जाए, अगर देश के लाखों बहादुर जवान बॉर्डर पर तैनात न रहें. हम इंडियन आर्मी और सीमा पर तैनात लाखों जांबाज़ों को सलाम करते हैं, जो अपने परिवार से दूर, अपने गांव से दूर, अपने दोस्तों से दूर, हिमालय की ऊंचाइयों और रेगिस्तान की गर्मी में रहकर देश की सुरक्षा करते हैं.

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जे सत्यनारायण एवं प्रदीप कुमार सचिव बने

1977 बैच के आईएएस अधिकारी जे सत्य नारायण को सूचना एवं तकनीक विभाग का सचिव बनाया गया है. यह पद पिछले एक साल से खाली पड़ा था. इसी प्रकार 1977 बैच के आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार सिन्हा को शिपिंग मंत्रालय में सचिव बनाया गया है.

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दिल्ली का बाबू : प्रसार भारती की परेशानी

पंजाब के चुनाव के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के बाबुओं को किसी तरह की कार्रवाई की उम्मीद है. सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी का मंत्रालय में आना-जाना बढ़ गया है. प्रसार भारती के अंदर उच्चाधिकारियों के बीच झगड़ा भी बढ़ता जा रहा है. जो लोग यह समझ रहे थे कि बी एस लाली के मामले के बाद इस विभाग में सब कुछ ठीक हो जाएगा, वे ग़लत सोच रहे थे.

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प्रधानमंत्री जी, चुप रहने का व़क्त नहीं है

सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत हुए जस्टिस काटजू को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. पहले से ही यह शिकायत थी कि प्रेस काउंसिल एकदम कमज़ोर संस्था है और इसके पास अधिकार इतने कम हैं कि इसका प्रेस पर कोई नियंत्रण नहीं है.

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हाशिए पर वरिष्ठ नागरिक

भारत में उम्रदराज लोगों की संख्या बढ़ रही है. यहां लोगों की औसत आयु में लगातार वृद्धि देखी जा रही है. पुरुषों की औसत आयु 1951-60 के बीच 42 वर्ष थी, जो 1986-90 में बढ़कर 58 साल हो गई और अनुमान है कि 2011-16 में यह 67 साल हो जाएगी. इस वृद्धि से यह तय है कि 60 साल से अधिक उम्र के लोगों की संख्या में भी वृद्धि होगी. एक अनुमान के अनुसार, भारत में 60 साल से अधिक उम्र वाले लोगों की संख्या 2013 तक 100 मिलियन हो जाएगी.

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दिल्ली का बाबू: आरबीआई का अगला गवर्नर कौन

महंगाई दर में वृद्धि जारी है और मुद्रास्फीति पर भी काबू नहीं पाया जा सका है, इस कारण वित्तीय क्षेत्र में अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं. इसके साथ ही सत्ता के गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि भारतीय रिजर्व बैंक का अगला गवर्नर कौन होगा, क्योंकि वर्तमान गवर्नर डी सुब्बाराव सितंबर में सेवानिवृत्त हो रहे हैं.

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अ‍लविदा

कुछ खेल ऐसे होते हैं जो खिलाड़ियों को नाम, दाम और शौहरत दिलाते हैं और कुछ खिलाड़ी ऐसे भी होते हैं जिनके नाम से उस खेल की पहचान जुड़ जाती है. फुटबॉल का नाम लेते ही आम फुटबॉल प्रेमियों के ज़ेहन में पहला नाम पेले का आता है और पेले के बाद माराडोना, लेकिन नई पी़ढी के लिए अगर कोई नाम इस तरह का है तो वह निश्चित तौर पर रोनाल्डो का है.

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खिलाडि़यों को गुमराह करने की कोशिश

पिछले कुछ सालों में अगर भारत की छवि अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर सकारात्मक रूप से उभरी है तो उसमें क्रिकेट का भी काफी योगदान रहा है. लंबे समय बाद देखा गया, जबकि भारतीय विदेशों में नहीं, बल्कि अपने ही देश में क्रिकेट के जरिए पैसा और अंतरराष्ट्रीय ख्याति हासिल कर रहे हैं.

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दिल्‍ली का बाबू : अंत भला तो सब भला

भारतीय तेल निगम (आईओसी) के चेयरमैन पद से पिछले महीने सेवानिवृत्त हुए सार्थक बेहुरिया ने एक दूसरे संयुक्त उपक्रम पेट्रोनेट एलएनजी के सलाहकार के रूप में अपनी नई पारी शुरू की है. इससे पहले बेहुरिया को सेवा विस्तार देने से इंकार कर दिया गया था, लेकिन अब उन्हें जिस पद पर बिठाया गया है, वह पहले था ही नहीं. स्वाभाविक रूप से लोग इस पूरे घटनाक्रम के पीछे छुपी कहानी को अभी भी समझने की कोशिश कर रहे हैं.

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दिल्‍ली का बाबू : बाबुओं से चव्हाण खफा

बाबुओं के कॉरपोरेट समूहों से जुड़ने की ललक और उनके पलायन को देखते हुए चव्हाण यही मान रहे हैं कि हद की भी हद होती है. चव्हाण भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारियों के प्राइवेट सेक्टर में काम करने से खासे नाराज हैं.

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