जनरल वी के सिंह और अन्‍ना हजारे की चुनौतियां

भारत में लोकतंत्र की इतनी दुर्दशा आज़ादी के बाद कभी नहीं हुई थी. संसदीय लोकतंत्र में राजनीतिक दलों का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है, लेकिन विडंबना यह है कि आज संसदीय लोकतंत्र को चलाने वाले सारे दलों का चरित्र लगभग एक जैसा हो गया है. चाहे कांग्रेस हो या भारतीय जनता पार्टी या अन्य राजनीतिक दल, जिनका प्रतिनिधित्व संसद में है या फिर वे सभी, जो किसी न किसी राज्य में सरकार में हैं, सभी का व्यवहार सरकारी दल जैसा हो गया है.

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देश को विजेता का इंतजार है

अगस्त का महीना भारतीय राजनीति के लिए महत्वपूर्ण रहा. सरकार, विपक्ष, अन्ना हजारे और बाबा रामदेव इस महीने के मुख्य पात्र थे. एक पांचवां पात्र भी था, जिसका ज़िक्र हम बाद में करेंगे. इन चार पात्रों ने अपनी भूमिका ब़खूबी निभाई. सरकार और विपक्ष ने अपनी पीठ ठोंकी, दूसरी ओर अन्ना और रामदेव ने अपने आंदोलन को सफल कहा. हक़ीक़त यह है कि ये चारों ही न हारे हैं, न जीते हैं, बल्कि एक अंधेरी भूलभुलैया में घुस गए हैं.

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प्रणब मुखर्जी सफल राष्ट्रपति साबित होंगे

हिंदुस्तान की राजनीति में इंदिरा जी की हत्या के बाद प्रणब मुखर्जी का एक विशेष स्थान रहा. जब इंदिरा जी की हत्या हुई तो प्रणब मुखर्जी और राजीव गांधी दोनों दिल्ली से बाहर थे. न केवल बाहर थे, बल्कि दोनों साथ थे. वापस लौटते हुए जब बातचीत हुई कि अगला प्रधानमंत्री कौन बनेगा, क्योंकि इंदिरा जी की हत्या हो गई है और उनकी लाश दिल्ली में रखी हुई है तो प्रणब मुखर्जी ने लोगों से कहा कि मैं ही सबसे वरिष्ठ हूं और मुझे ही प्रधानमंत्री बनना चाहिए.

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पत्रकार जिन्होंने लोकतंत्र की हत्या की

पत्रकारिता की संवैधानिक मान्यता नहीं है, लेकिन हमारे देश के लोग पत्रकारिता से जुड़े लोगों पर संसद, नौकरशाही और न्यायपालिका से जुड़े लोगों से ज़्यादा भरोसा करते हैं. हमारे देश के लोग आज भी अ़खबारों और टेलीविजन की खबरों पर धार्मिक ग्रंथों के शब्दों की तरह विश्वास करते हैं.

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दिमाग की खिड़कियां-दरवाजे खोलिए, वक्‍त बहुत कम है

शरीर के अंग जब कमज़ोर हो जाएं तो उन्हें बाहर से विटामिन की ज़रूरत होती है और कभी-कभी जब वे अंग बिल्कुल ही काम नहीं करते तो बहुत ही कड़े बाहरी तत्व की ज़रूरत होती है, जिसे हम लाइफ सेविंग ड्रग्स कहते हैं. अगर हार्ट सींक करने लगे तो कोरामीन देते हैं, बाईपास सर्जरी होती है.

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सेना के आंतरिक कार्यक्षेत्र में अनाधिकृत हस्‍तक्षेप

जिस तरह सेना के नेतृत्व में भ्रष्ट बैंकों, वित्तीय संस्थानों और उद्योगों की साझेदारी से ऊर्जा और अन्य कंपनियों के हितों के लिए अमेरिकी मीडिया व्यवसायिक घरानों का मुखपत्र बन गई थी, उसी तरह भारत में भी व्यवसायिक समूहों के स्वामित्व वाले टीवी चैनलों में नीरा राडिया टेप के केस के दौरान टीवी एंकर कॉर्पोरेट घरानों का रु़ख लोगों के सामने रख रहे थे.

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सेना, साज़िश और सियासत

पिछले तीन सालों में कांग्रेस के नेतृत्व में चल रही सरकार में घट रही घटनाएं और उसके दूरगामी परिणामों से देश की अवाम चिंतित ही नहीं, बेहद परेशान भी है. पिछले दिनों जिस तरह से देश में सैन्य बग़ावत की खबरों की अटकलें लगीं, वे आज़ाद भारत के इतिहास में एक अनहोनी की तरह है.

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भारतीय सेना को बदनाम करने की साजिश का पर्दाफाश

बीते चार अप्रैल को इंडियन एक्सप्रेस के फ्रंट पेज पर पूरे पन्ने की रिपोर्ट छपी, जिसमें देश को बताया गया कि 16 जनवरी को भारतीय सेना ने विद्रोह करने की तैयारी कर ली थी. इस रिपोर्ट से लगा कि भारतीय सेना देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को समाप्त कर फौजी तानाशाही लाना चाहती है. इस रिपोर्ट ने सारे देश में न केवल हलचल पैदा की, बल्कि सेना को लेकर शंका का वातावरण भी पैदा कर दिया. सभी चैनलों पर यह खबर चलने लगी, लेकिन तीन घंटे बीतते-बीतते सा़फ हो गया कि यह रिपोर्ट झूठी है, बकवास है, किसी खास नापाक इरादे से छापी गई है और इसे छपवाने के पीछे एक बड़ा गैंग है, जो हिंदुस्तान में लोकतंत्र को पसंद नहीं करता.

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एक्‍स्‍ट्रा शॉट्सः वॉर्नर के खुलासे

फीफा के पूर्व उपाध्यक्ष जेक वार्नर ने वादा किया कि वह फीफा अध्यक्ष सर सेप ब्लाटर के बारे में सनसनी़ख़ेज खुलासे करेंगे. त्रिनिदाद और टोबैगो के निर्माण मंत्री वार्नर को फुटबॉल की वैश्विक संस्था फीफा के अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले रिश्वत स्कैंडल और फीफा के एक अन्य उपाध्यक्ष मोहम्मद बिन हम्माम की बर्खास्तगी के बाद फीफा कार्यकारी समिति और अमेरिका फुटबॉल परिसंघ के प्रमुख का पद छोड़ना पड़ा था.

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दिल्‍ली का बाबूः गोपनीयता के रखवाले

गोपनीयता का रखवाला कौन हो सकता है? संयुक्त सचिव स्तर का एक अधिकारी किसी दस्तावेज़ को गोपनीय घोषित कर सकता है. एक अंडर सेक्रेटरी एक दस्तावेज़ को स़िर्फ कंफीडेंशियल ही घोषित कर सकता है. यह खुलासा कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा एक आरटीआई के तहत दिए गए जवाब में हुआ है. दिलचस्प रूप से डीओपीटी की यह राय गृह मंत्रालय के साथ सांझा नहीं की गई है.

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ब्रिटेन, रुपर्ट मार्डोक और डेविड कैमरुन

ब्रिटिश प्रधानमंत्री हेराल्ड मैकमिलन से जब पूछा गया कि आपको अपने कार्यकाल में सर्वाधिक भय किस बात का होता था तो उन्होंने उत्तर दिया कि घटनाओं से उन्हें सबसे अधिक भय लगता था. प्रधानमंत्री के रूप में उनके नौवें उत्तराधिकारी डेविड कैमरून भी इस बात से सहमत होंगे. अभी ब्रिटेन को जिस घटना ने सबसे अधिक परेशान किया है, उसकी शुरुआत रूपर्ट मार्डोक प्रकरण से नहीं हुई, बल्कि उसकी शुरुआत हुई मिली डाउलर की हत्या के मुक़दमे की जांच और उसके बाद उसके परिवार वालों को हुई परेशानी से.

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संभालिए, अभी कुछ बिगडा़ नहीं है

बहुत सारी चीजें अमेरिका में बनती हैं, अमेरिका में खुलती हैं, तब हमें पता चलता है कि हम किस तरह के जाल में कभी फंस चुके थे, इन दिनों फंस रहे हैं या आगे फंसने वाले हैं. हमारे देश की धुरंधर हस्तियां, जो लोगों की राय बनाती हैं, जिनमें जस्टिस राजेंद्र सच्चर, दिलीप पडगांवकर, उम्र के आखिरी पड़ाव पर खड़े प्रसिद्ध संपादक, लेखक एवं सोशल एक्टिविस्ट कुलदीप नैय्यर साहब और गौतम नवलखा शामिल हैं, जिन्होंने रूरल जर्नलिज्म और वैचारिक पत्रकारिता में नाम कमाया तथा इनके साथ बहुत सारे लोग एक साजिश में फंसे नजर आ रहे हैं, जिसका खुलासा अमेरिका में हुआ.

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दिल्ली का बाबू: ममता लहर

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद को अपने पूर्ववर्ती बुद्धदेव भट्टाचार्य की कार्यशैली से अलग रखना चाहती हैं. इस निर्णय पर केंद्र सरकार में मंत्री के तौर पर काम करने के उनके अनुभव का असर है या कुछ और, कह नहीं सकते, लेकिन ऐसा लग रहा है कि दीदी रायटर्स बिल्डिंग में भी पीएमओ जैसा मॉडल विकसित करना चाहती हैं.

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चौथी दुनिया को ऑन मोबाइल कम्पनी का नोटिस: हमारे कदम अडिग और इरादे नेक हैं

चौथी दुनिया (11 अप्रैल-17 अप्रैल) के अंक में प्रकाशित कवर स्टोरी (शीर्षक-दूरसंचार विभाग में नए घोटाले का पर्दाफाश राजा का एक और कारनामा) में बीएसएनएल की वैल्यू एडेड सर्विसेज (वीएएस) शाखा में एक घोटाले का खुलासा किया गया था. इस खुलासे के बाद बीएसएनएल वीएएस सर्विसेज देने वाली एक कंपनी ऑन मोबाइल की ओर से एक लॉ फर्म ने चौथी दुनिया के संपादक संतोष भारतीय और संवाददाता शशि शेखर के नाम से एक लीगल नोटिस भेजा है,

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आजाद भारत के महान घोटाले

किसी भी लोकतंत्र का स्वास्थ्य इस बात पर निर्भर करता है कि उसके तीनों अंगों-विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संबंध कैसे हैं और इन तीनों में जवाबदेही बची है या नहीं. आज भारत की दुर्दशा भी इन्ही दो कारकों पर आंकी जा सकती है. पिछले साल भारत में भ्रष्टाचार और घोटालों का बोलबाला रहा.

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आईपीएल- 4 : इंडियन पैसा लीग

पिछले साल आईपीएल को चौथी दुनिया ने इंडियन फिक्सिंग लीग बताया था. यह बात सही साबित हुई. टूर्नामेंट शुरू होने से एक महीने पहले ही आपको बता दिया था कि मुंबई फाइनल खेलने वाला है. यह बात भी सच साबित हुई. चौथी दुनिया ने खुलासा किया था कि आईपीएल विदेशी कंपनियों के पैसों चलाया जा रहा है.

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बोफोर्स का पूरा सच

भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे मशहूर रहे कांड का नाम बोफोर्स कांड है. इस कांड ने राजीव गांधी सरकार को दोबारा सत्ता में नहीं आने दिया. वी पी सिंह की सरकार इस केस को जल्दी नहीं सुलझा पाई और लोगों को लगा कि उन्होंने चुनाव में बोफोर्स का नाम केवल जीतने के लिए लिया था.

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विकीलीक्स ने पाकिस्तान की पोल खोली

भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान उसके खिला़फ जंग के लिए किसी भी व़क्त तैयार है. वह भारत विरोधी आतंकी संगठनों को बढ़ावा देता है, देश में अशांति फैलाने के लिए हर तरह की मदद उपलब्ध कराता है. यह बात तो हर भारतीय जानता है तो फिर इसमें नया क्या है. संवेदनशील दस्तावेजों को प्रकाशित करने वाली वेबसाइट विकीलीक्स द्वारा लीक किए गए दस्तावेजों में यदि कुछ नया है तो वह यह कि यह बात अमेरिका भी अच्छी तरह जानता है. हालांकि अमेरिका अब तक इसे सार्वजनिक तौर पर स्वीकार करने से बचता रहा है, लेकिन अमेरिकी विदेश विभाग के जो दस्तावेज विकीलीक्स ने लीक किए हैं, उससे यह बात स्पष्ट हो जाती है. साथ ही यह बात भी खुलकर सामने आती है कि आतंकवाद पाकिस्तान की विदेश नीति का एक अहम अंग है, जिसके ज़रिये वह अमेरिका और भारत को ब्लैकमेल करने की कोशिश करता है.

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गांवों में नहीं टिकते धरती के भगवान

डॉक्टरों को भगवान का दूसरा रूप माना जाता है, क्योंकि वे लोगों की जान बचाते हैं. लेकिन अफसोस कि धरती के इन भगवानों को गांव के इंसान रास नहीं आ रहे हैं. इसलिए वे गांव के बजाय शहर में रहना ज़्यादा उचित समझते हैं.

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