बच्चों में हृदय रोग का ख़तरा

हमारा बचपन ख़तरे में है. हाल ही में हुए एक अंतरराष्ट्रीय शोध के मुताबिक 2010 तक भारत में दुनिया के 60 फीसदी दिल के मरीज हो जाएंगे. ऐसे में आने वाली पीढ़ी को हृदय रोग से बचाना महत्वपूर्ण भी है और एक चुनौती

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भारतीय बीज जीन बैंक पर खतरा : निजी कृषि कंपनियों के हाथों बेचने की साजिश

यूनेस्को ने भारत के कई स्थानों की जैव विविधता को विश्व के लिए महत्वपूर्ण कृषि विरासत एवं खाद्य सुरक्षा के लिए उपयोगी मानते हुए उन्हें संरक्षित करने की बात कही है. 12वीं शताब्दी में ही रूस के प्रसिद्ध वनस्पति विज्ञानी निकोलाई वाविलो ने भारत को कई फसलों का उत्पत्ति केंद्र (ओरिजिन ऑफ क्रोप) बताया था. फिर भी जैव विविधताओं से भरे इस देश में जब एक किसान को विदेशी कंपनियों से बीज खरीदने पड़ें तो इसे क्या कहेंगे?

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भारतीय जल नीति के खतरे

यूनेस्को ने यूनाइटेड नेशन्स वर्ल्ड वाटर डेवलपमेंट रिपोर्टः मैनेजिंग वाटर अंडर अनसर्टेंटी एंड रिस्क पेश की है. इस रिपोर्ट में 2009 के विश्व बैंक के दस्तावेज़ का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि भारत में विश्व बैंक के आर्थिक सहयोग से राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण ने 2009 में एक परियोजना चलाई थी, जिसका उद्देश्य 2020 तक बिना ट्रीटमेंट के नाली तथा उद्योगों के गंदे पानी को गंगा में छोड़े जाने से रोकना था, ताकि गंगा के पानी को सा़फ किया जा सके. गंगा के प्रदूषण के लिए खुली जल निकासी व्यवस्था सबसे अधिक ज़िम्मेदार है.

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बंजर भूमि का बढ़ता खतरा

उपजाऊ शक्ति के लगातार क्षरण से भूमि के बंजर होने की समस्या ने आज विश्व के सामने एक बड़ी चुनौती पैदा कर दी है. सूखा, बाढ़, लवणीयता, कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल और अत्यधिक दोहन के कारण भू-जल स्तर में गिरावट आने से सोना उगलने वाली उपजाऊ धरती मरुस्थल का रूप धारण करती जा रही है.

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यूरोप का लोकतंत्र खतरे में

लोकतंत्र की जन्मभूमि ग्रीस में पिछले दिनों इसके साथ मज़ाक़ हुआ. लोकतांत्रिक तरीक़े से चुने गए प्रधानमंत्री जॉर्ज पापेंद्रु को इस्ती़फा देने के लिए मजबूर किया गया. पापेंद्रु ग्रीस की समाजवादी पार्टी पासोक के नेता हैं तथा उनके पिता और दादा ग्रीस के प्रधानमंत्री रह चुके हैं.

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उत्तराखंडः दूध और ब्रेड को तरसे लोग

भारी वर्षा के चलते राज्य में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, लेकिन लोग बारिश को नज़रअंदाज़ करके, जान को जोख़िम में डालकर यात्राएं कर रहे हैं. राज्य सरकार का आपदा प्रबंधन पूरी तरह फिसड्डी साबित हो रहा है, जिसके चलते उत्तरकाशी और रुद्र प्रयाग में आवश्यक सेवाएं चरमरा गई हैं.

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पाकिस्तान के अस्तित्व पर खतरा

लिस्बन में पिछले नवंबर में हुई नाटो देशों के मुखियाओं की बैठक में यह फैसला लिया गया कि बाहरी देशों की सेनाएं अ़फग़ानिस्तान से 2014 के अंत तक हटा ली जाएंगी और देश की सुरक्षा का ज़िम्मा वहीं के सुरक्षातंत्र के हाथों में सौंप दिया जाएगा. हम बाद में इसका विश्लेषण करेंगे.

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अतिक्रमण से क्‍लब का अस्तित्‍व खतरे में

समस्तीपुर ज़िला मुख्यालय में आज़ादी के पहले से चले आ रहे समस्तीपुर क्लब की क़ीमती ज़मीन पर किए गए क़ब्ज़े से इसकी हालत का़फी बदतर हो गई है. अंग्रेजी शासनकाल से ही शहर में यूरोपियन क्लब चलता था, बाद में जिसका नाम समस्तीपुर क्लब कर दिया गया.

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प्रयोग की जगह कमियों को दूर करने की पहल ज़रूरी

नए प्रयोग के ख़तरों के प्रति चिंता स्वाभाविक है. शिक्षा के मामले में ऐसे ख़तरे और भी संवेदनशील हो जाते हैं, लेकिन इन ख़तरों से अनभिज्ञ केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्री कपिल सिब्बल शिक्षा के क्षेत्र में विगत एक वर्ष से अपने प्रयोगों को जारी रखे हुए हैं.

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टूट कर बिखर जाएगा पाकिस्‍तान

कुछ दिन पहले की बात है. ओकारा शहर के एक पुलिस थाने के सामने लोगों का हुजूम जमा हुआ. हुजूम में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं. थोड़ी देर बाद यह हुजूम थाने के अंदर पहुंचा और दो पुलिस वालों के ऊपर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी. थाने में मौजूद अन्य पुलिस वालों ने उन्हें मरने से तो बचा लिया, लेकिन पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए.

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झारखंड पर मंडराता रेडिएशन का खतरा

झारखंड में रेडिएशन का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन राज्य और केंद्र सरकार लापरवाह बनी हुई है. यह खतरा जादूगोड़ा स्थित यूरेनियम कारपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा उत्सर्जित कचरे से नहीं, बल्कि रामगढ़ ज़िले में स्थित रजरप्पा कोल वाशरी से वर्ष 2007 में गायब हुए ऐश एनलाइजर से बना हुआ है.

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मुसलमान ही नहीं, प्रजातंत्र भी खतरे में है

भारत के मुसलमान देश के सबसे पीड़ित और शोषित वर्गों का हिस्सा बन चुके हैं. राजनीति में मुसलमान हाशिए पर हैं. प्रशासन, सेना और पुलिस में मुसलमानों की संख्या शर्मनाक रूप से कम है, न्यायालयों में मुसलमानों की उपस्थिति बहुत कम है और बाकी कसर उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की आर्थिक नीति ने पूरी कर दी है, जिसकी मार मुसलमानों पर सबसे ज़्यादा पड़ रही है.

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नर्मदा का वजूद खतरे में

नर्मदा नदी के उद्गम स्थल अमरकंटक से लेकर खंभात की खाड़ी तक 18 कोल विद्युत संयंत्र लगाने की तैयारी की जा रही है. विकास के नाम पर नर्मदा के विनाश की यह योजना भारत में नदियों के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह लगाने के लिए का़फी है. क्योंकि इससे निकलने वाली वाली राख से नर्मदा को काफी क्षति पहुंचेगी.

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आख़िर तीसरा पक्ष क्या है?

अब तक हमने आपको सूचना क़ानून से जुड़े ज़्यादातर पहलुओं से परिचित करा दिया है. विभिन्न विषयक आरटीआई आवेदनों के बारे में बताया और उन्हें प्रकाशित भी किया. लेकिन, अभी तक सूचना क़ानून के एक महत्वपूर्ण भाग की चर्चा नहीं हो सकी थी.

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प्रिंटर से सेहत को खतरा!

कंप्यूटर आज लोगों की ज़रूरत बन गया है. इसके बिना ऐसा लगता है, जैसे कुछ खो गया है. आज ऊमन हर घर में कंप्यूटर है और साथ में प्रिंटर भी. आप भी सोच में पड़ गए होंगे कि इसमें आख़िर नई बात कौन सी है? नई बात है जनाब! प्रिंटर हमारी सेहत के लिए घातक है. लेजर प्रिंटर तो सबसे ज़्यादा ख़तरनाक है.

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ग्‍लोबल वार्मिंग बनाम मानवाधिकार

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए उठाए गए क़दमों की सुस्त चाल से, इससे प्रभावित हो रहे समुदायों में स्वाभाविक रूप से निराशा बढ़ी. परंपरागत राजनैतिक-वैज्ञानिक पद्धतियों पर आधारित उक्त उपाय ज़्यादा प्रभावी साबित नहीं हो रहे थे, पीड़ित लोगों की समस्याओं की अनदेखी हो रही थी और सबसे बड़ी बात यह थी कि मानवीय गतिविधियों के चलते वैश्विक तापमान में हो रही वृद्धि के लिए ज़िम्मेदारी तय करने की कोई व्यवस्था न होने से प्रभावित समुदायों को लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था.

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बुंदेलखंड के पत्‍थर खदान मजदूरों का दर्द

गगनचुंबी इमारतों एवं सड़कों की ख़ूबसूरती बढ़ाने के लिए पत्थर का सीना चाक करनेऔर नदी से बालू निकालने वाले मज़दूरों को दो जून की रोटी के बदले सिल्कोशिस नामक रोग मिल रहा है. विंध्याचल पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य स्थित बुंदेलखंड में उत्तर प्रदेश भाग के ललितपुर, झांसी, महोबा, हमीरपुर, बांदा एवं चित्रकूट आदि ज़िले पूरे भारत में पत्थरों के लिए प्रसिद्ध हैं.

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सार-संक्षेप

केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा में गुणात्मक सुधार और उसे रोचक बनाने के प्रयास में अरबों रुपए ख़र्च करने के बाद भी राज्य में सैटेलाईट के माध्यम से प्राथमिक शिक्षा (एडूसेट) की योजना पूरी तरह नाकाम हो गई है. इस योजना को सर्वप्रथम पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सीधी ज़िले में, तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने प्रारंभ किया था.

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