अवैध खनन ने नष्ट कर दिया कठिना नदी का अस्तित्व, बहुत कठिन है कठिना को बचाना

साखू के जंगलों की वीरानी हो या हिंसक जीव-जन्तुओं की पनाहगाह, यूरोपियन वास्तुकला का उदाहरण हो या मुगल हुकूमत का

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नदियों की सफाई का चल रहा है राष्ट्रीय तमाशा : नदी से नाला बनती ब्रज की यमुना

यमुना नदी यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलती है और गंगा नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है. आज यह नदी गंगा

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लालाराम-श्रीराम के अपराध की सजा बेहमई ने भुगती

जब एक स्त्री डाकू बदला लेने पहुंचती है-2 यमुना नदी के दोनों तरफ़ कानपुर व जालौन ज़िलों में मेव ठाकुरों

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चमत्‍कार को नमस्कार

कहते हैं कि चमत्कार को नमस्कार. फिर अगर बात भारत की हो तो फिर चमत्कार होना आम बात है. ऐसा आपने अक्सर फिल्मों में ही देखा होगा कि किसी व्यक्ति को मरा समझ कर नदी में बहा दिया जाता है और कई साल बाद वह वापस घर लौट आता है. एक ऐसा ही मामला असल में उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में सामने आया है.

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मैली हो गई पतित पावनी सरयू नदी

अयोध्या-खिफैज़ाबाद शहरों को अपने आंचल में समेट, युगों-युगों से लोगों को पुण्य अर्जन कराती सरयू नदी की कोख भी अब मैली हो चली है. सरयू का पवित्र जल तो दूषित हुआ ही, भूजल में भी हानिकारक रसायनों की मात्रा बढ़ती जा रही है. दोनों शहरों के क़रीब दो दर्जन इंडिया मार्का हैंडपंपों में नाइट्रेट, आयरन आदि तत्वों की अधिकता पाई गई है.

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मरती नदियां, उजड़ता बुंदेलखंड

चंबल, नर्मदा, यमुना और टोंस आदि नदियों की सीमाओं में बसने वाला क्षेत्र बुंदेलखंड तेज़ी से रेगिस्तान बनने की दिशा में अग्रसर है. केन और बेतवा को जोड़कर इस क्षेत्र में पानी लाने की योजना मुश्किलों में फंस गई है. जो चंदेलकालीन हज़ारों तालाब बुंदेलखंड के भूगर्भ जल स्रोतों को मज़बूती प्रदान करते थे, वे पिछले दो दशकों के दौरान भू-मा़फिया की भेंट चढ़ गए हैं.

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अब तो मां का दूध भी जहर हो गया है

देश की नदियों की हालत बेहद खराब है. इनमें गंगा, यमुना, दामोदर, सोन, कावेरी, नर्मदा एवं साही आदि शामिल हैं. गंगा जैसी पवित्र नदी भी प्रदूषण की शिकार होकर दुनिया की सर्वाधिक प्रदूषित नदियों में शामिल हो गई है. इसका 23 फीसदी जल प्रदूषित हो चुका है.

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नदी के कटान से किसान हुए बेघर

पूर्वी उत्तर प्रदेश के बहराईच ज़िले के कई गांव ऐसे हैं जहां नदी के कटान से कई घर उजड़ जाते हैं. यह स्थिति वहां के गांवों के हर घर की है. इस स्थिति में गांव वाले अपना सामान समेट कर किसी अन्य स्थान पर चले जाते हैं. नदी के तेजी से होते कटान में जिन परिवारों का घर आ रहा होता है वे स्वयं अपने घर को उजा़डते जिसे कभी मेहनत करके उन्होंने बनाया था.

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निन्‍यानबे मेगावाट विद्युत उत्‍पादन का लक्ष्‍य

आदिकाल से बाबा केदारनाथ के चरणों से निकल कर हिमालयी पर्यावरण को सिंचित करने वाली मंदाकिनी नदी की धारा पर सिंगोली-भटवाड़ी जल विद्युत परियोजना को ग्र्रहण लगाकर नदी की धारा बदलने से जनाक्रोश भड़क उठा है.

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बुंदेलखंडः केन-बेतवा नदी को जोड़ने की योजना

बुंदेलखंड में जल्द ही नदियों को जो़डने की परियोजना शुरू होने वाली है. उत्तर प्रदेश का जनपद बुंदेलखंड खनिज संपदा से भरपूर होने के बाद भी अति पिछड़ेपन से जूझ रहा है. यहां की धरती से लगभग 40,000 कैरेट हीरा निकाला जा चुका है और लगभग 14,00,000 कैरेट हीरे का भंडार मौजूद है.

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नौका दुर्घटनाएं कब रुकेंगी

सात नदियों से घिरे खगड़िया ज़िले में लगातार नौका दुर्घटनाएं हो रही है, अभी तक न जाने कितनों की मांग उजड़ चुकी है तो किसी की गोद सूनी हो चुकी है. किसी के माथे से मां का साया छिन गया तो किसी ने अपने बाप को खो दिया है, लेकिन प्रशासनिक महकमे के लोगों की नींद तक नहीं खुल रही है.

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अब सरयू नदी भी खतरे में

नदियों में लगातार ब़ढते प्रदूषण के कारण आज तमाम नदियों का अस्तित्व खतरे में है. गंगा यमुना जैसी बड़ी नदियों के साथ ही छोटी नदियों की हालत तो और भी खराब है. इन छोटी नदियों की सा़फ स़फाई की तऱफ तो किसी का ध्यान भी नहीं है.

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दादा, आप कहां गुम हो गए

दिग्विजय बाबू की जयंती पर पूरे प्रदेश के लोगों ने उन्हें नम आंखों से याद किया. जमुई स्थित उनके पैतृक गांव नया गांव स्थित समाधि स्थल पर लगी दादा की तस्वीर पर सैकड़ों लोगों ने पुष्प चढ़ाकर अपने प्रिय नेता को दिल से याद किया.

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शहर इंसानों के लायक नहीं रहे

दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेल होने हैं. दिल्ली को विश्वस्तरीय शहर के रूप में तैयार किया जा रहा था. बारिश ने सरकार और योजना बनाने वाले उच्च अधिकारियों की पोल खोल दी. देश की राजधानी में बारिश के पानी की निकासी का इंतज़ाम नहीं है. रिहायशी इलाक़ों से लेकर सड़कों तक पानी भर गया. ट्रैफिक जाम के चलते लोग घंटों रास्ते में फंसे रहे.

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डूबे तो किस्‍सा खत्‍म, बचे तो गम ही गमः बाढ़ में डूब गए प्रशासन के वादे

कोसी नदी के घटते-बढ़ते जलस्तर ने तटबंध के अंदर निर्वासित ग्रामीणों को अभी से तबाह करना शुरू कर दिया है, लेकिन प्रशासन एवं जल संसाधन विभाग का रवैया इस क़दर ढीला है कि जैसे उन्होंने ठान ली है कि जब तक नदी के विकराल रूप धरने और लोगों के डूब मरने की नौबत नहीं आती है, तब तक वे बचाव, राहत एवं सुरक्षा कार्य शुरू नहीं करेंगें.

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संकट में फल्‍गू का अस्तित्‍व

माता सीता के शाप से शापित होने के बावजूद पौराणिक काल से पितरों को मोक्ष दिलाती आ रही गया की पवित्र फल्गू नदी का वजूद आज ख़तरे में है. देश-विदेश से लाखों लोग प्रति वर्ष इसे नमन करने आते हैं.

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प्रजातंत्र जीतेगा या कमलनाथ

उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोड़ने वाले उत्तर-दक्षिण गलियारे का भविष्य केंद्रीय मंत्री कमलनाथ की जिद के कारण खतरे में पड़ता दिखाई दे रहा है. व्यक्तिगत लाभ के लिए व्यास नदी की धारा को मोड़ने वाले कमलनाथ अब विशेषज्ञों द्वारा स्वीकृत उत्तर-दक्षिण गलियारे को अपने संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा की ओर मोड़ना चाहते हैं.

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यूं ही बहता रहेगा अथिरापल्ली का पानी!

केरल में पश्चिमी घाट स्थित वझाचल के जंगलों में बहने वाली चलाकुडी नदी को छोड़ते हुए मैं जैसे-जैसे आगे बढ़ रही हूं. मेरे दिल में एक अजीब तरह की चिंता घर करती जा रही है. मैं जो लिख रही हूं, इसे पढ़ने वालों में कम लोग ही यहां तक आए होंगे. लेकिन, जो लोग मेरे अनुभवों के साझीदार हैं, वे इसकी अहमियत समझ सकते हैं.

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मोंगरा बांध का पानी किसके लिए?

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव ज़िले का अंबागढ़ चौकी ब्लॉक. पारा 46 डिग्री को छू रहा था. चिलचिलाती धूप में छह लोगों की टोली पांगरी नामक छोटे से सुदूर आदिवासी गांव से मोंगरा बांध से जुड़े सवाल लेकर सात दिन के पैदल स़फर पर रवाना हुई. प्रचार के लिए किसी ढोल-नगाड़े के बग़ैर और बेहद अनौपचारिक अंदाज़ में. यह सफ़र मोंगरा गांव पहुंच कर ख़त्म हुआ.

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गंगा तेरा पानी अम़ृत

गंगाजल को सात समंदर पार बेचने की अपनी अति महत्वाकांक्षी योजना को साकार करने के लिए उत्तराखंड सरकार ने गंगा स्वायत्तशासी प्राधिकरण का ऐलान करके प्रति वर्ष कम से कम पांच सौ करोड़ रुपये जुटाने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है. सरकार का मानना है कि इस काम से होने वाली आय को गंगा की सा़फ-स़फाई के लिए ख़र्च किया जाएगा.

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नर्मदा का वजूद खतरे में

नर्मदा नदी के उद्गम स्थल अमरकंटक से लेकर खंभात की खाड़ी तक 18 कोल विद्युत संयंत्र लगाने की तैयारी की जा रही है. विकास के नाम पर नर्मदा के विनाश की यह योजना भारत में नदियों के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह लगाने के लिए का़फी है. क्योंकि इससे निकलने वाली वाली राख से नर्मदा को काफी क्षति पहुंचेगी.

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पुरवा नहरः 21 साल में 30 कोस

जल संसाधन विभाग में भ्रष्टाचार के साथ-साथ लेट लतीफी के कारण तमाम जनहित की सरकारी परियोजनाओं का काम इतनी धीमी गति से होता है कि राज्य को उनका समय पर लाभ नहीं मिल पाता है. परियोजनाओं के निर्माण में देरी से निर्माण लागत भी कई गुना बढ़ जाती है.

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रेत माफिया के कारण घडि़यालों पर संकट

खनिज और रेत माफिया मध्य प्रदेश के एक और अभ्यारण्य को समाप्त करने जा रहा है. जैव विविधता की परिकल्पना मध्य प्रदेश में अलग-अलग माफियाओं के चलते इन दिनों संकट में है. विंध्य क्षेत्र की सबसे बड़ी नदियों में शामिल की गई सोन नदी के तट पर बना घड़ियाल अभ्यारण्य राज्य शासन की उपेक्षा और अनदेखी का शिकार बन चुका है.

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