
जुलाई 2010 में सरकार ने एक आरटीआई के अंतर्गत पूछे गए सवाल के जवाब में कहा था कि देश में एफसीआई के विभिन्न गोदामों में 1997 से 2007 के बीच 1.83 लाख टन गेहूं, 6.33 लाख टन चावल और 2.2 लाख टन धान खराब हो गया था. जुलाई 2012 में एक अन्य आरटीआई के जवाब में एफसीआई ने कहा है कि 2008 से लेकर अब तक देश में एफसीआई के किसी भी गोदाम में अनाज खराब नहीं हुआ है.
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पिछले अंक में हमने आपको प्रथम अपील के बारे में बताया था, साथ ही उसका एक प्रारूप भी प्रकाशित किया था. इस अंक में हम आपको बता रहे हैं कि किन परिस्थितियों में द्वितीय अपील एवं शिकायत की जा सकती है. अगले अंक में हम शिकायत एवं द्वितीय अपील का प्रारूप भी प्रकाशित करेंगे.
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आरटीआई आवेदन डालने के बाद आमतौर पर यह देखा जाता है कि लोक सूचना अधिकारियों द्वारा स्पष्ट एवं पूर्ण सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती है. ऐसी स्थिति में अपील एवं शिकायत करने के अलावा और कोई चारा नहीं बचता.
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यह ग़लत है. इसके विपरीत हर अधिकारी को अब यह पता होगा कि वह जो कुछ भी लिखता है, वह जन समीक्षा का विषय हो सकता है. यह उस पर जनहित में उत्तम लिखने का दबाव बनाएगा. कुछ ईमानदार नौकरशाहों ने अलग से स्वीकारा है कि आरटीआई ने उनके राजनीतिक एवं अन्य प्रभावों को दरकिनार करने में बहुत सहायता की है.
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आम तौर पर एक सरकार जनता की सुविधाओं के लिए कोई योजना बनाती है या उसकी घोषणा करती है और बाद की कोई सरकार आकर उस योजना को ठंडे बस्ते में डाल देती है. इसके अलावा कई मौक़ों पर (खासकर किसी आपदा के व़क्त) सरकार की तऱफ से मदद देने की घोषणा की जाती है
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इस साल का आईपीएल सीजन फिर विवादों में घिर गया. इस बार खिलाड़ियों के स्पॉट फिक्सिंग में फंसने की बात सामने आई. कुछ खिलाड़ियों ने अनुबंध से ज़्यादा राशि मिलने की बात स्वीकार की. विवाद इतना बढ़ा कि बात संसद के गलियारों तक पहुंच गई.
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सरकारी स्कूल इस देश के करोड़ों बच्चों के लिए किसी लाइफ लाइन से कम नहीं हैं. वजह, निजी स्कूलों का ख़र्च उठा पाना देश की उस 70 फीसदी आबादी के लिए बहुत ही मुश्किल है, जो रोज़ाना 20 रुपये से कम की आमदनी पर अपना जीवन यापन करती है.
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नरेगा अब मनरेगा ज़रूर हो गई, लेकिन भ्रष्टाचार अभी भी ख़त्म नहीं हुआ. इस योजना के तहत देश के करोड़ों लोगों को रोज़गार दिया जा रहा है. गांव के ग़रीबों-मजदूरों के लिए यह योजना एक तरह से संजीवनी का काम कर रही है. सरकार हर साल लगभग 40 हज़ार करोड़ रुपये ख़र्च कर रही है, लेकिन देश के कमोबेश सभी हिस्सों से यह ख़बर आती रहती है कि कहीं फर्जी मस्टर रोल बना दिया गया तो कहीं मृत आदमी के नाम पर सरपंच-ठेकेदारों ने पैसा उठा लिया.
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आज देश में एक धारणा बन गई है कि किसी भी सरकारी कार्यालय में बिना रिश्वत दिए कोई काम नहीं कराया जा सकता है. बहुत हद तक यह विचार सही भी है, क्योंकि भ्रष्टाचार उस सीमा तक पहुंच गया है, जहां एक ईमानदार आदमी का ईमानदार बने रह पाना मुश्किल हो गया है. लेकिन इस भ्रष्ट व्यवस्था में भी आप यदि चाहें तो अपना काम बिना रिश्वत दिए करा सकते हैं.
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सूचना कौन देगा सभी सरकारी विभागों के एक या एक से अधिक अधिकारियों को लोक सूचना अधिकारी नियुक्त किया गया है. आपको अपना आवेदन उनके पास ही जमा कराना है. यह उनकी ज़िम्मेदारी है कि वे आपके द्वारा मांगी गई सूचना विभाग की विभिन्न शाखाओं से इकट्ठा करके आप तक पहुंचाएं.
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हमारे पास पाठकों के ऐसे कई पत्र आए, जिनमें बताया गया कि आरटीआई के इस्तेमाल के बाद किस तरह उन्हें परेशान किया गया या झूठे मुक़दमे में फंसाकर उनका मानसिक और आर्थिक शोषण किया गया. यह एक गंभीर मामला है और आरटीआई क़ानून के अस्तित्व में आने के तुरंत बाद से ही इस तरह की घटनाएं सामने आती रही हैं.
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जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
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