साई मुक्ति प्रदान करेंगे

साई इस सारी दुनिया के रखवाले हैं. साई बाबा का सदा श्रद्धापूर्वक स्मरण करना चाहिए. वह अपने भक्तों के कल्याण के

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साई बाबा और सोमदेव स्वामी

अब एक अन्य संशयालु व्यक्ति की कथा सुनिए, जो बाबा की परीक्षा लेने आया था. काका साहेब दीक्षित के भ्राताश्री भाई जी नागपुर में रहते थे. जब वह 1906 में हिमालय गए थे, तब उनका गंगोत्री घाटी के नीचे हरिद्वार के समीप उत्तर काशी में एक सोमदेव स्वामी से परिचय हो गया. दोनों ने एक-दूसरे के पते लिख लिए. पांच वर्ष पश्चात सोमदेव स्वामी नागपुर आए और भाई जी के यहां ठहरे.

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भिक्षावृत्ति की आवश्यकता

संभव है, कुछ लोगों के मन में संदेह उत्पन्न हो कि जब बाबा इतने श्रेष्ठ पुरुष थे तो फिर उन्होंने आजीवन भिक्षावृत्ति पर ही क्यों निर्वाह किया. यह प्रश्न दो दृष्टिकोण सामने रखकर हल किया जा सकता है. पहला दृष्टिकोण यह कि भिक्षावृत्ति पर निर्वाह करने का कौन अधिकारी है.

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सबका मालिक एक : साईं बाबा

शिरडी ही साई बाबा है और साई बाबा ही शिरडी, एक-दूसरे का प्रत्यक्ष पर्यायवाची होने के साथ-साथ यह आध्यात्मिक भी है. साई शब्द के उच्चारण से आशा और आदर का भाव उत्पन्न होता है. साई बाबा को किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है.

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व्रत कथा और पूजन विधि

साई बाबा देश के सबसे महान संत हैं और पूज्यनीय संतों में सर्वोपरि हैं. शिरडी के साई बाबा की चमत्कारी शक्तियों की बहुत सी कथाएं हैं. साथ ही साई बाबा के भक्तों की संख्या सबसे ज़्यादा है. साई बाबा के पूजन के लिए वीरवार यानी गुरुवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है. साई व्रत कोई भी कर सकता है चाहे बच्चा हो या बुज़ुर्ग.

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भक्ति मार्ग की सरलता

परम लक्ष्य की सिद्धि के लिए कौन सा मार्ग श्रेष्ठ है, ज्ञान या भक्ति? गोस्वामी तुलसी दास का स्पष्ट मत है कि ज्ञान मार्ग की तुलना में भक्ति मार्ग अधिक सरल है, ऋजु है. अत: सामान्य साधक के लिए यही मार्ग वरेण्य है.

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साई बाबा सच्चे संत थे

कई भक्तों द्वारा काफी आग्रह करने पर एक बार बाबा ने बताया था कि वह नौरंगाबाद से आए हैं. वह अपने मामा, जिनका नाम नासत्या था, के घर रहते थे. लोग उन्हें साई कहते थे. वेंकुश उनके गुरु थे. उनका धर्म कबीर था और परवरदिगार (परमात्मा) उनकी जाति थी.

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त्योहारों का समन्वय

साई बाबा का उद्देश्य हिंदुओं और मुसलमानों के बीच सद्‌भाव और समन्वय स्थापित करना जान पड़ता है. यही कारण रहा होगा कि वह रहते तो थे मस्जिद में, पर उसका नाम उन्होंने द्वारका माई रखा था.

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बाबा का ब्रह्मज्ञान

साई बाबा ने ब्रह्मज्ञान विषय पर बहुत कुछ कहा है. इसे हम आपको संक्षेप में बता रहे हैं. ब्रह्मज्ञान या आत्मज्ञान के लिए योग्यताएं होनी चाहिए. अपने जीवनकाल में सभी लोग ब्रह्मज्ञान का अनुभव नहीं करते.

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भविष्यवाणी निरस्त

नाना साहब डेंगले नामक एक बड़े ज्योतिषी ने एक दिन बापू साहब बूटी से कहा, आज का दिन आपके लिए अशुभ और अनिष्टकारी है. आज आपके जीवन को खतरा है. यह भविष्यवाणी सुनकर बापू साहब बूटी बहुत बेचैन हो गए.

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सभी में एक ही प्राण

एक बार साई बाबा मस्जिद में बैठे थे. उनके सामने एक भक्त बैठा था. उसी समय मस्जिद की दीवार पर एक छिपकली ने चिक-चिक की आवाज़ की. उस भक्त ने साई बाबा से जिज्ञासावश पूछा कि छिपकली की यह आवाज़ शकुन की है या अपशकुन की?

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आटा, धूनी और बवंडर

साई बाबा की दया और चमत्कारों के जो अनुभव एक साथ अनेक व्यक्तियों को हुए, उनकी परिगणना सामूहिक अनुभव में की जा सकती है. शिरडी में प्राय: सभी लोग साई बाबा के भक्त थे. बाबा अपने भक्तों का बड़ा ध्यान रखते थे और उनकी रक्षा करने के लिए सदा तत्पर रहते थे.

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आस्था है तो सब कुछ है

काका साहेब दीक्षित के भ्राताश्री भाई जी नागपुर में रहते थे. जब वह 1906 में हिमालय गए थे, तब उनका गंगोत्री घाटी के नीचे हरिद्वार के समीप उत्तर काशी में सोमदेव स्वामी से परिचय हो गया. दोनों ने एक दूसरे के पते लिख लिए. पांच वर्ष पश्चात सोमदेव स्वामी नागपुर आए और भाई जी के यहां ठहरे.

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बाबा और सच्‍चरित्र अध्‍याय

बाबा ने सच्चरित्र लिखने की अनुमति देते हुए कहा कि सच्चरित्र लेखन के लिए मेरी पूर्ण अनुमति है. तुम अपना मन स्थिर करके मेरे वचनों में श्रद्धा रखो और निर्भय होकर कर्तव्य पालन करते रहो. यदि मेरी लीलाएं लिखी गईं तो अविद्या का नाश होगा और ध्यान एवं भक्तिपूर्वक श्रवण करने से भक्ति और प्रेम की तीव्र लहर प्रवाहित होगी. जो इन लीलाओं की अधिक गहराई तक खोज करेगा, उसे ज्ञानरूपी अमूल्य रत्न की प्राप्ति हो जाएगी.

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परमात्मा कौन

बचपन से लेकर आज तक हमने परमात्मा को कई बार पुकारा, जगह-जगह तलाशा, कई-कई रूपों में देखने का प्रयत्न किया, लेकिन उसके सही स्वरूप को समझ नहीं पाए और हर बार कन्फ्यूज. कई बार उसकी हस्ती को ही नकार दिया या फिर थक- हारकर अपने-अपने दायरों में परमात्मा को कैद कर लिया.

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साई का ध्‍यान कैसे करें

अगर हम अपने जीवन को देखें तो उसके इन टेढ़े-मेढ़े रास्तों से गुजरते, रोज़गार की मारामारी से बावस्ता होते कई बार ऐसा लगता है कि हम भी इसी भागमभाग का एक हिस्सा हैं. हर रोज की रुटीन ज़िंदगी, रोज की मुश्किलें और आजकल तो ज़्यादातर मुश्किलें, परेशानियां और कभी न सोची परिस्थितियां ही सामने आती हैं.

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साई से नाता कैसे जोड़ें

जीवन में हम बहुत से रिश्ते-नातों से घिरे रहते हैं. कई रिश्ते जन्म से बनते हैं और कई हम ख़ुद बनाते हैं. हमें लगता है कि ये रिश्ते हमने बनाए हैं, हमने चुने हैं, लेकिन अगर आप थोड़ा ऊपर उठकर देखें तो हर रिश्ता चाहे जन्म से हो या बाद में बना हो, उस चैतन्य शक्ति से होता है जो ज्ञाश्वत है.

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साई के बिना जीवन

मैंने जीवन में परमात्मा का अनुभव बहुत जल्द ही कर लिया, लेकिन साई बाबा का अनुभव 1998 में हुआ. इतनी कम उम्र में ही भारत की सबसे सफल स्पोर्टस प्रमोशन की कंपनी की सफलता का स्वाद चख मैं एक दम रसातल में था. अपनों से धोखा खाया. सब कुछ लुट चुका था.

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साई बाबा का ब्रह्मज्ञान

श्री साई की लीला पुस्तिका श्री साई सच्चरित्र में एक ही भक्त ऐसा है, जो बाबा से भौतिक इच्छाओं की पूर्ति करने के लिए नहीं कहता. वह बाबा से इस मिथ्या जगत के किसी लोभ को नहीं मांगता, बल्कि वह बाबा से ब्रह्मज्ञान मांगता है. वास्तव में लीला पुरुषोत्तम श्री साई का आशय भी यही था कि इस लीला से सबको मोह त्याग करने की प्रेरणा मिले.

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सबका मालिक एक

हेमाड पंत जी साई सच्चरित्र में लिखते हैं, बाबा अक्सर कहा करते थे कि सबका मालिक एक. आख़िर इस संदेश का मतलब क्या था? आइए बाबा के इसी संदेश पर कुछ बातें करें. बाबा के विषय में हम जितना मनन करते जाते हैं, उनके संदेशों को समझना उतना ही आसान होता जाता है. बाबा के बारे में लिखना और पढ़ना हम साई भक्तों को इतना प्रिय है कि उनकी एक लेखिका भक्त ने तो अपनी एक किताब में बाबा को ढेर सारे पत्र लिखे हैं. मेरा मानना है कि साई को पतियां लिखूं जो वह होय बिदेस. मन में, तन में, नैन में ताको कहा संदेस. लेकिन साई के विषय में बातें करना जैसे आत्म साक्षात्कार करना है. बाबा ने बहुत सहजता से कहा है, सबका मालिक एक. ऐसा कह पाना शायद बाबा के लिए ही संभव था, क्योंकि समस्त आसक्तियों और अनुरागों से मुक्त एक संत ही ऐसा कह सकता है. प्रचलित धर्म चाहे हिंदू, इस्लाम, सिख, ईसाई, जैन एवं बौद्ध हो या कोई अन्य, प्रश्न यह है कि जो ये धर्म सिखा रहे हैं, क्या वह ग़लत है? अगर ग़लत न होता तो बाबा को इस धरती पर अवतार लेने की आवश्यकता ही न होती.

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मानसिक चिकित्सा है श्रद्धा और सबूरी

साई के दिव्य संदेशों में श्रद्धा और सबूरी अपना विशेष स्थान रखते हैं. आज तक बहुत से ज्ञानी जनों ने श्रद्धा-सबूरी को कई विभिन्न दृष्टियों से प्रस्तुत किया. अपनी-अपनी मन:स्थिति के अनुसार सभी का कहना सही भी है, लेकिन मन में एक विचार और उठता है और समझ आता है कि वास्तव में बाबा का श्रद्धा-सबूरी का दिव्य संदेश एक मानसिक चिकित्सा या कहें कि मनोचिकित्सा का एक स्वरूप है.

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मुले शास्त्री और साई बाबा

नासिक में एक ब्राह्मण थे, नाम था मुले शास्त्री. उन्होंने आधा दर्जन शास्त्रों का अध्ययन किया था. ज्योतिष एवं सामुद्रिक शास्त्र में वह पारंगत थे. एक बार वह नागपुर के प्रसिद्ध करोड़पति बापू साहेब बूटी से भेंट करने के बाद अन्य सज्जनों के साथ बाबा के दर्शन करने मस्जिद में गए.

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