साई का प्रसाद

एक बार गोवा के एक मामलतदार राले ने लगभग 300 आमों का एक पार्सल शामा के नाम शिरडी भेजा. पार्सल खोलने पर प्रायः सभी आम अच्छे निकले. भक्तों में उनके वितरण का कार्य शामा को सौंपा गया. उनमें से बाबा ने चार आम दामू अण्णा के लिए अलग निकाल कर रख लिए. दामू अण्णा की तीन स्त्रियां थीं, परंतु अपने दिए हुए वक्तव्य में उन्होंने बताया था कि उनकी केवल दो स्त्रियां हैं.

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जीवन मूल्‍य कितने जरूरी

आज अगर जीवन के मूल्यों के बारे में बात करें तो लगता है कि जैसे मज़ाक उड़ाया जा रहा है. आम धारणा है कि कलयुग में इन मूल्यों पर चल पाना संभव नहीं. अक्सर जब मूल्यों की बात आती है तो हम कहते हैं कि सच्चाई, वफादारी, ईमानदारी, माता-पिता का आदर आदि ही जीवन के मूल्य हैं. सबसे पहले तो यह जानना ज़रूरी है कि मूल्य है क्या? जीवन मूल्यों पर चलकर ही किसी भी घर, कंपनी, समाज एवं देश के चरित्र का निर्माण होता है.

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साई बाबा की शिक्षा…

शिरडी में बाज़ार प्रति रविवार को लगता है. निकट के ग्रामों से लोग आकर वहां रास्तों पर दुकानें लगाते और सौदा बेचते हैं. मध्यान्ह के समय मस्जिद लोगों से ठसाठस भर जाती थी, परंतु रविवार के दिन लोगों की इतनी अधिक भीड़ होती कि प्रायः दम ही घुटने लगता.

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बाबा का जीवन और चरित्र

अगर हम साई बाबा के जीवन और चरित्र का अवलोकन करेंगे तो पाएंगे कि उन्होंने उस भवसागर पर विजय प्राप्त कर ली थी, जिसे पार करना हम सबके लिए अत्यंत दुष्कर है. शांति उनका आभूषण था और वह ज्ञान की साक्षात प्रतिमा थे. वैष्णव भक्त सदैव वहां आश्रय पाते थे. दानवीरों में वह राजा कर्ण के समान दानी थे. वह समस्त सारों के सरारूप थे.

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साई भक्‍त परिवार के लिए त्‍यौहारों के इस मौसम में फाउंडेशन का तोहफा

साई भक्त परिवार की शुरुआत एक सोच और एक भावना से हुई थी, आज लगातार ब़ढते-ब़ढते अपनी पुख्ता पहचान बना रहा है. अब यही परिवार हमारे सुख-दुख का साथी है. त्योहारों के इस मौसम में फाउंडेशन आप सबके लिए ढेरों तोह़फों की बौछार लेकर आया है.

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हमारी रचना कौन है?

हम सब जानते हैं कि हम परमात्मा की रचना हैं. यह संसार, यह प्रकृति सब उसी की रचना है, लेकिन उसने तो हमसे वादा किया कि अपनी ही तरह वह हमें भी रचयिता बनाता है. तो फिर प्रश्न उठता है कि हमारी रचना कौन है, क्या है? क्या हमारी संतान हमारी रचना है, मगर ऐसा भी नहीं है, क्योंकि संतान उत्पत्ति तो एक शारीरिक प्रक्रिया का परिणाम मात्र है.

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कभी खुशी कभी गमः क्‍या यही जीवन है?

आज तक यही सोचा हम सबने कि जीवन का हर पल ख़ुशी का कैसे हो सकता है? कभी ख़ुशी तो कभी गम तो है ही. और अगर गम, दु:ख, दर्द, तनाव, भय, चिंता नहीं होंगे तो ख़ुशी, उल्लास, आनंद एवं संतुष्टता को कैसे संभाल पाओगे. इन सबका अनुभव करने के लिए पहले दर्द से गुज़रना पड़ेगा.

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जीवन के सुखों को कैसे प्राप्‍त करें

आज के दौर में सुखी किसे कहेंगे? वह, जो जीवन के सारे सुख भोग रहा है? जीवन के सुख में क्या शामिल है? अच्छी नौकरी, सुखी परिवार, अपना घर, अच्छी गाड़ी, बैंक में पैसा, समाज में प्रतिष्ठा. यह सब कुछ होने के बाद भी क्या हम सुखी हो पाते हैं? नहीं, क्योंकि मन अशांत है और सबसे बड़ी बात आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में यह सब एक सपना बनकर रह गया है.

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