जयपुर में रोक, कोलकाता में निर्बासन

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में विवादास्पद लेखक सलमान रुश्दी को वहां आने से रोकने और वीडियो कांफ्रेंसिंग को रुकवाने में सफलता हासिल करने के बाद कट्टरपंथियों के हौसले बुलंद हैं. राजस्थान की कांग्रेस सरकार के घुटने टेकने के बाद अब बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने भी चंद कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेक दिए.

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साहित्य के बहाने सियासी खेल

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल ख़त्म हो गया. जब मैं फेस्टिवल के पहले दिन वहां पहुंचा तो सलमान रश्दी के जयपुर आने-न आने को लेकर खासे विवाद और भ्रम की स्थिति थी, लेकिन दोपहर बाद तक यह साफ हो गया था कि अपने उपन्यास सैटेनिक वर्सेस को लेकर विवादास्पद हुए लेखक सलमान रश्दी जयपुर के दिग्गी पैलेस नहीं आ रहे हैं

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धर्म के नाम पर राजनीति के शिकार मुसलमान

मुस्लिम विद्वान को पहले नियुक्त किया और फिर उन्हें हटा दिया. इस घटना को अभी अधिक दिन नहीं हुए थे कि उसने सलमान रुश्दी और सैटेनिक वर्सेस का मुद्दा छेड़ दिया. उसने कहा कि सलमान रुश्दी को वीज़ा न देकर भारत आने से रोक दिया जाए. तस्लीमा नसरीन को भी धमकी दी जाती है. वह बांग्लादेश की हैं और एक महिला भी हैं. यहां तक कि वामदल भी तस्लीमा नसरीन और उनकी मानवाधिकार की लड़ाई में उनके साथ नहीं है

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