सबका साथ-सबका विकास के फॉर्मूले पर फिट नहीं बैठती : नई शिक्षा नीति

सबका साथ सबका विकास, भाजपा का चुनावी नारा था, जिसे सरकार बनने के बाद सरकार का मूल मन्त्र बताया गया.

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लखनऊ में बना लोकनायक की स्मृतियों को संजोने वाला नायाब संग्रहालय : जेपी कहीं मुक्त तो कहीं बंधक!

लोकनायक जयप्रकाश नारायण की स्मृतियों को जिंदा रखने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने नायाब कदम उठाया है. पिछले दिनों

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गौरवशाली अतीत पर आंसू बहा रहा है ख़ुदाबख्श पुस्तकालय

बिहार की पहचान देश और विदेश में जिन चीज़ों से होती है, उनमें एक बड़ा और महत्वपूर्ण नाम खुदाबख्श ओरिएंटल

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साई बाबा और संस्कृत ज्ञान

बात उन दिनों की है, जब शिरडी में द्वारकामाई मस्जिद में भीड़ बहुत अधिक नहीं लगती थी. उन दिनों किसी को विश्वास नहीं होता था कि साई बाबा संस्कृत के प्रकांड पंडित हैं. उनके परम प्रिय भक्त नाना साहब चांदोरकर संस्कृत बहुत अच्छी तरह जानते थे.

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भारत की संस्कृत-उर्दू सभ्यता

यह प्रवासियों का देश है. 92 फीसदी लोग जो आज यहां रह रहे हैं, उनके पुरखे विदेश से आए थे. हम सबके पुरखे विदेश से आए थे. हमारे देश में लोग पिछले दस हजार साल से आते रहे हैं. क्यों आते जा रहे हैं? यहां के लोग नहीं जाते थे बाहर. आधुनिक मशीनीकरण के आने के पहले कृषि प्रधान समाज होता था तो खेती के लिए जो चाहिए था, जैसे समतल उपजाऊ ज़मीन और पानी, वह यहां इफरात में था.

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