रॉबर्ट वाड्रा को आरोपों का सामना करना चाहिए

रॉबर्ट वाड्रा ने जो किया, वह अनोखा नहीं है. जो भी बिजनेस में होते हैं, उनमें ज़्यादातर लोग ऐसे ही तरीक़े अपनाते हैं और अपनी संपत्ति बढ़ाते हैं. फर्क़ स़िर्फ इतना है कि उनका जुड़ाव सत्ता से नहीं होता, जबकि रॉबर्ट वाड्रा का रिश्ता सीधे सत्ता से है और सत्ता से भी इतना नज़दीक का कि वह वर्तमान सरकार को नियंत्रित करने वाली सर्वशक्तिमान महिला श्रीमती सोनिया गांधी के दामाद हैं और भारत के भावी प्रधानमंत्री, यदि बने तो, राहुल गांधी के बहनोई हैं.

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26 लाख करोड़ का कोयला घोटाला: यह घोटाला नहीं, महाघोटाला है

सरकार चलाने का यह एक नया मूलमंत्र है. पहले घोटाला करो और भ्रष्टाचार होने दो. अगर मामला सामने आ जाए तो सबसे पहले उसे नकार दो, दलीलें दो, मीडिया में बयान दे दो कि घोटाला हुआ ही नहीं है. और, जब घोटाले का पर्दाफाश होने लग जाए, मामला हाथ से बाहर निकल जाए, जांच शुरू हो जाए, कोर्ट में मुकदमा चलने लगे तो कह दो कि मामले की जांच हो रही है.

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नए सेनाध्‍यक्ष की नियुक्ति पर विवादः प्रधानमंत्री की अग्नि परीक्षा

चौथी दुनिया को कुछ ऐसे दस्तावेज़ हाथ लगे हैं, जिनसे हैरान करने वाली सच्चाई का पता चलता है. कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका की सुनवाई हुई, जिसमें लेफ्टिनेंट जनरल बिक्रम सिंह को अगले सेनाध्यक्ष के रूप में नियुक्ति पर सवाल खड़े किए गए.

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उत्तर प्रदेशः घोटालों के गुरुघंटाल

सामाजिक एवं राजनीतिक मंच पर एक-दूसरे की टांग खींचने और खून के प्यासे लगने वाले नेताओं का असली चेहरा जनता कभी-कभी देख पाती है. सबके अपने-अपने स्वार्थ हैं, जो उन्हें एक-दूसरे के क़रीब लाते हैं. नेताओं की मिलीभगत के चलते उत्तर प्रदेश की पहचान आज घोटालों के प्रदेश के रूप में होती है. पिछले 20-25 वर्षों में तो घोटालों की बाढ़ सी आ गई.

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दिमाग की खिड़कियां-दरवाजे खोलिए, वक्‍त बहुत कम है

शरीर के अंग जब कमज़ोर हो जाएं तो उन्हें बाहर से विटामिन की ज़रूरत होती है और कभी-कभी जब वे अंग बिल्कुल ही काम नहीं करते तो बहुत ही कड़े बाहरी तत्व की ज़रूरत होती है, जिसे हम लाइफ सेविंग ड्रग्स कहते हैं. अगर हार्ट सींक करने लगे तो कोरामीन देते हैं, बाईपास सर्जरी होती है.

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जल संसाधन मंत्रालयः एनपीसीसी में यह क्‍या हो रहा है

जल, थल और नभ, भ्रष्टाचार के कैंसर ने किसी को नहीं छोड़ा. जहां उंगली रख दीजिए, वहीं भ्रष्टाचार का जिन्न निकल आता है. बड़े घोटालों की बात अलग है. ऐसे सरकारी संगठन भी हैं, जिनके बारे में अमूमन आम आदमी नहीं जानता और इसी का फायदा उठाकर वहां के बड़े अधिकारी वह सब कुछ कर रहे हैं, जिसे संस्थागत भ्रष्टाचार की श्रेणी में आसानी से रखा जा सकता है.

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भारत यानी डॉ. जैकेल और मिस्टर हाइड

पाकिस्तान भारत की तरह किस मायने में समान है? इसमें कोई शक नहीं कि वह क्रिकेट में बेहतर है. इंग्लैंड से हुए मुक़ाबले में उसे जीत मिली, जबकि ऑस्ट्रेलिया में भारत का सूपड़ा सा़फ हो गया. जहां तक सुप्रीम कोर्ट का सवाल है तो निश्चित तौर पर वह भी भारत के सुप्रीम कोर्ट की तरह अच्छा है.

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हवाला कांड पर एक बेहतरीन दस्ताव़ेज

देश के चर्चित जैन हवाला कांड को सामने लाने वाले पत्रकार विनीत नारायण की किताब भ्रष्टाचार, आतंकवाद और हवाला कारोबार मौजूदा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोलती है. भिलाई के इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक सुरेंद्र कुमार जैन की डायरी में राजनेताओं और अ़फसरों के अवैध रूप से करोड़ों रुपयों के लेनदेन का ब्योरा दर्ज था.

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एक्‍स्‍ट्रा शॉट्सः वॉर्नर के खुलासे

फीफा के पूर्व उपाध्यक्ष जेक वार्नर ने वादा किया कि वह फीफा अध्यक्ष सर सेप ब्लाटर के बारे में सनसनी़ख़ेज खुलासे करेंगे. त्रिनिदाद और टोबैगो के निर्माण मंत्री वार्नर को फुटबॉल की वैश्विक संस्था फीफा के अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले रिश्वत स्कैंडल और फीफा के एक अन्य उपाध्यक्ष मोहम्मद बिन हम्माम की बर्खास्तगी के बाद फीफा कार्यकारी समिति और अमेरिका फुटबॉल परिसंघ के प्रमुख का पद छोड़ना पड़ा था.

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अन्ना हजारे, भ्रष्टाचार और नैतिकता

आज देश भर में भ्रष्टाचार के ख़िला़फ जिस तरह का माहौल बना है, उसमें मैंने भी तय किया कि साहित्य पर न लिखकर इस बार अपने स्तंभ में भ्रष्टाचार पर लिखूं. अन्ना हजारे के समर्थन में जिस तरह पूरे देश में लोग उठ खड़े हुए हैं, वह सरकार के लिए चिंता की बात है. आज़ादी के 64 वर्षों बाद भी आज देश की जनता को अपनी आज़ादी को लेकर एक संदेह, एक आशंका सी पैदा हो गई है.

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सीएजी रिपोर्ट पर राजनीतिः प्रजातंत्र के लिए खतरा है

सीएजी (कंपट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) यानी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट आई तो राजनीतिक हलक़ों में हंगामा मच गया. दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित विपक्ष के निशाने पर आ गईं. रिपोर्ट ने देश की जनता के सामने सबूत पेश किया कि कैसे कॉमनवेल्थ गेम्स नेताओं और अधिकारियों के लिए लूट महोत्सव बन गया.

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हॉकी सिर्फ नाम का राष्ट्रीय खेल

कहते हैं जब कोई भी संस्थान या व्यक्ति अपने पतनके दौर से गुज़रता है तो एक दिन उसका उत्थान भी होता है, यानी उतार-च़ढाव की स्थिति सब पर लागू होती है. अगर नहीं लागू होती है तो वह है हमारी भारतीय हॉकी टीम. जी हां, दुनिया में हर बदहाल संस्था और टीम के दिन बहुर सकते हैं, लेकिन भारतीय हॉकी टीम के बारे में यही कह सकते हैं कि यह फिर से कामयाबी का सवेरा शायद ही कभी देख सके.

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दिल्ली का बाबू: आइएएस बनने का ख्वाब

भारत में नव उदारवाद के दौर के बाद से मध्य वर्ग में लोक सेवा का आकर्षण बहुत ज्यादा नहीं बचा. फिर भी अन्य लोगों में इसे लेकर अभी भी दिलचस्पी बची हुई है. हाल के वर्षों में ऐसी कई खबरें आईं, जहां आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के कई उम्मीदवारों ने लोक सेवा की परीक्षा में अपने दम पर सफलता पाई है.

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दंगा मुक्त भारत की ओर

विभाजन के बाद भारत में पहला सांप्रदायिक दंगा 1961 में जबलपुर में हुआ, तबसे दंगों का सिलसिला अनवरत जारी है. 1980 के दशक में सांप्रदायिक हिंसा में ज़बरदस्त बढ़ोत्तरी हुई. विभिन्न समुदायों के बीच शांति एवं सौहार्द स्थापित करने की राह में सांप्रदायिक दंगे बहुत बड़ा रोड़ा बन गए हैं.

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फायरबिसगंज गोली कांडः नेता सिर्फ जख्‍म कुरेदते हैं, मरहम नहीं देते

फारबिसगंज के भजनपुर में अजीब बेचैनी बिखरी पड़ी है. पुलिसिया ख़ौ़फ के साये में यहां सांस लेते लोगों की ज़ुबान बंद है, पर पटना और दिल्ली से आए नेता उनके मुंह में उंगली डाल उनसे बुलवाने की रोजाना कोशिश करते हैं. अपने अजीज़ों को खोने वाले लोगों की आंखें न्याय की आस में रोज खुलती है और रोज बंद होती है, पर इंतज़ार ख़त्म नहीं हो रहा है.

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सोने का नहीं, जागते रहने का व़क्त है

भारत की राजनीति में संभवत: सुप्रीम कोर्ट के दख़ल से कई आश्चर्यजनक चीज़ें हो रही हैं. पहले ए राजा का जेल जाना, बाद में सुरेश कलमाडी का और फिर कनिमोझी की जेलयात्रा संकेत देती है कि कई और लोग भी इस राह के संभावित राही हैं. पर यह क्यों सुप्रीम कोर्ट के दख़ल के बाद हो रहा है?

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हॉकी को आईपीएल कैसे बनाएंगे

इस बात से तो सभी वाक़ि़फ हैं कि भारत में हॉकी की हैसियत क्या है, लेकिन अभी सुनने में आ रहा है कि हॉकी की दशा सुधारने के लिए कई नई योजनाओं को अमलीजामा पहनाया जाएगा. इनमें सबसे आकर्षित करने वाली योजना यह है कि अब हॉकी भी आईपीएल की तर्ज पर पेशेवर लीग के रूप में खेली जाएगी.

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दिल्ली का बाबूः चतुराई भरी चाल

वित्त मंत्रालय में विशेष सचिव जी सी चतुर्वेदी का नाम सरकार ने नए पेट्रोलियम सचिव के रूप में प्रस्तावित क्या किया, इस पर कई लोगों की भौंहे तन गईं. पीएमओ में कुछ रुकावट के बाद अंतत: चतुर्वेदी की फाइल पर हस्ताक्षर तो हो गए, लेकिन इस बीच दिल्ली में सरगर्मियां तेज रहीं.

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चौथी दुनिया को ऑन मोबाइल कम्पनी का नोटिस: हमारे कदम अडिग और इरादे नेक हैं

चौथी दुनिया (11 अप्रैल-17 अप्रैल) के अंक में प्रकाशित कवर स्टोरी (शीर्षक-दूरसंचार विभाग में नए घोटाले का पर्दाफाश राजा का एक और कारनामा) में बीएसएनएल की वैल्यू एडेड सर्विसेज (वीएएस) शाखा में एक घोटाले का खुलासा किया गया था. इस खुलासे के बाद बीएसएनएल वीएएस सर्विसेज देने वाली एक कंपनी ऑन मोबाइल की ओर से एक लॉ फर्म ने चौथी दुनिया के संपादक संतोष भारतीय और संवाददाता शशि शेखर के नाम से एक लीगल नोटिस भेजा है,

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नैतिक, रचनात्मक और राजनीतिक ज़िम्मेदारी

प्रजातंत्र में कोई भी सरकार तब तक प्रजातांत्रिक नहीं मानी जा सकती, जब तक वह अपने देश के नागरिकों के प्रति उत्तरदायी न हो, क्योंकि वह उन्हीं के लिए और उन्हीं के नाम पर राज्य करती है. एक संसदीय व्यवस्था में वह संसद के प्रति उत्तरदायी होती है. चलिए, बात शुरू से करते हैं.

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जेपीसी की साख दांव पर है

आखिरकार सरकार ने 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के लिए 30 सदस्यीय कमेटी की घोषणा कर ही दी. यह कमेटी वर्ष 1998 से लेकर वर्ष 2009 तक के सभी संबंधित दूरसंचार सौदों की जांच करेगी, साथ ही स्पेक्ट्रम आवंटन एवं दूरसंचार लाइसेंस के मूल्यों पर केंद्रीय मंत्रिमंडल के फ़ैसलों और उनके परिणामों की भी.

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हर दौर में गोटी लाल

हवा का रु़ख भांपकर पीठ मोड़ने में माहिर खिलाड़ी विपरीत हालात को भी अपने पक्ष में तब्दील कर लेते हैं. बिहार के प्रशासनिक हलकों में हर खास-ओ-आम की ज़ुबान पर यह जुमला तैर रहा है. स्वाभाविक है, लालू-राबड़ी का तथाकथित जंगलराज हो या नीतीश कुमार का बहु प्रचारित सुशासन, दोनों ही स्थिति में कतिपय जुगाड़ू नौकरशाह अपनी गोटी लाल करने में पूरी तरह सफल रहे हैं.

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बड़े संपादकों के छोटे सवाल

किसी भी प्रजातंत्र में मीडिया का काम एक प्रहरी का होता है. वह सरकार का नहीं, जनता का पहरेदार होता है. मीडिया की ज़िम्मेदारी है कि सरकार जो करती है और जो नहीं करती है, वह उसे जनता के सामने लाए. जब कभी सत्तारूढ़ दल, विपक्षी पार्टियां, अधिकारी और पुलिस अपनी ज़िम्मेदारी का निर्वाह नहीं करते हैं, तब मीडिया उन्हें उनके कर्तव्यों का एहसास कराता है.

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मीठा-मीठा गप, कड़वा-कड़वा थू

गुजरात दंगों की जांच के लिए नियुक्त विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी रपट दिसंबर 2010 में उच्चतम न्यायालय को सौंपी. इसके कुछ ही समय बाद देश के एक जाने-माने अख़बार ने अपने पहले पृष्ठ पर एक ख़बर छापी, जिसका शीर्षक था एसआईटी ने मोदी को क्लीन चिट दी.

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भारत को भारतीयों ने ज्यादा लूटा

यह 19वीं शताब्दी की बात है. ब्रिटिश जमकर भारत को लूट रहे थे और सारा पैसा इंग्लैंड ले जा रहे थे. यानी भारत से धन की निकासी अपने चरम पर थी. तब कांग्रेस के पुरोधाओं के लिए ब्रिटिश शासन की आलोचना का यही मुख्य आधार रहा.

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अंधश्रद्धा को बढ़ावा देती सरकार

कहते हैं कि आस्था में पर्वतों को डिगाने की क्षमता होती है, परंतु अभी हाल में एक पर्वत आस्था का भार नहीं झेल सका. बीती 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला तीर्थस्थान में हज़ारों श्रद्धालु मकर ज्योति की एक झलक पाने के लिए इकट्ठा थे.

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