पठानकोट एयरबेस पर दिखे हथियारबंद संदिग्ध, फिदायीन हमलावर होने का शक

पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन के पास हथियारबंद बदमाश देखे गये हैं. इस घटना के बाद यहां पर हडकंप मच गया है.

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अमेरिका में प्रधानमंत्री की तलाशी से पाकिस्तान में नाराजगी 

अमेरिका में जॉन एफ केनेडी एयरपोर्ट पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाकान की तलाशी के बाद पाकिस्तान में हंगामा मच

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एफएमसीजी के बाद अब इस सेक्टर में धूम मचाएंगे बाबा रामदेव

नई दिल्ली: एफएमसीजी (फास्ट मूविंग कन्ज्यूमर गुड्स) सेक्टर में धूम मचाने के बाद देश के जाने माने योग गुरु बाबा

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सऊदी अरब गए 27 भारतीय तीर्थयात्री लापता, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

निरंजन  : तीर्थयात्रा पर सऊदी अरब के जेद्दा गए पश्‍चिम बंगाल के 27 तीर्थयात्रियों के लापता होने की खबर आ

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मर्केल की भारत यात्रा साझा विकास की नई शुरूआत

जर्मनी की चांसलन ऐंजेला मर्केल की तीन दिवसीय भारत यात्रा व्यापक सहयोग के आश्वासन के साथ समाप्त हुई. यदि साझा

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संशोधित भूमि अधिग्रहण बिलः ग्रामीण विकास या ग्रामीण विनाश

ओडिसा के जगतसिंहपुर से लेकर हरियाणा के फतेहाबाद में ग्रामीण भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं. दूसरी ओर झारखंड के कांके-नग़डी में आईआईएम के निर्माण के लिए हो रहे भूमि अधिग्रहण का लोग विरोध कर रहे हैं. इस पर सरकार का कहना है कि देश को विकास पथ पर बनाए रखने के लिए भूमि अधिग्रहण आवश्यक है.

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अफगानिस्‍तानः रणनीति पर पुनर्विचार की जरूरत है

अफग़ानिस्तान में तालिबान का असर कम होता नहीं दिखाई पड़ रहा है. यहां छिटपुट हमले तो होते ही रहते हैं, लेकिन इस बीच एक बड़ा हमला हुआ, जो अ़फग़ानिस्तान की वर्तमान स्थिति और इसके भविष्य के बारे में पुनर्विचार करने को मजबूर कर देता है. यह हमला पिछले कई हमलों से अलग दिखाई पड़ता है. पहले के हमले किसी दूतावास या किसी विशेष जगह पर बम विस्फोट के ज़रिये किए जाते रहे हैं.

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इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शनः अन्‍ना चर्चा समूह, सवाल देश की सुरक्षा का है, फिर भी चुप रहेंगे? अन्‍ना हजारे ने प्रधानमंत्री से मांगा जवाब…

आदरणीय डॉ. मनमोहन सिंह जी,

पिछले कुछ महीनों की घटनाओं ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर देश की जनता को का़फी चिंतित किया है. लेकिन अधिक चिंता का विषय यह है कि क्या इतनी चिंताजनक घटनाएं हो जाने के बावजूद कुछ सुधार होगा? अभी तक की भारत सरकार की कार्रवाई से ऐसा लगता नहीं कि कुछ सुधरेगा.

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इंडिया इन ट्रांजिशनः भारत और दक्षिण एशिया संतुलन से लेकर आपसी सहयोग तक

क्या अतीत की पिछली घटनाओं और उनके तर्क से यह संकेत नहीं मिलता कि अपने पड़ोसियों को लेकर हमारी नीति में परिवर्तन की शुरुआत होने जा रही है, जिसमें भारत को संतुलित करने के प्रयास से लेकर लंबे समय तक इसके साथ आपसी सहयोग भी शामिल है? क्या कारण है कि हमारे पड़ोसी देश, ख़ास तौर पर पाकिस्तान और किसी हद तक बांग्लादेश, श्रीलंका एवं नेपाल अपने ही हित में क्षेत्र की सबसे बड़ी और सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ मिलकर सहयोग नहीं करते?

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भारत सबसे आगे है, लेकिन…

अनचाहे ई-मेल या स्पैम भेजने में भारत दुनिया में पहले नंबर पर है. इंटरनेट सुरक्षा को लेकर कमज़ोर क़ानूनों के चलते यहां थोक में ई-मेल भेजे जाते हैं. ई-मेल का कुल 80 प्रतिशत हिस्सा स्पैम होता है. मॉस्को स्थित इंटरनेट सुरक्षा कंपनी कास्पेर्सकी लैब का कहना है कि दक्षिण एशिया से जितना स्पैम आता है, उतना पूरी दुनिया में और कहीं से नहीं.

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हिमालय को बचाने की अंतरराष्ट्रीय पहल

जलवायु परिवर्तन और प्रकृति के साथ बढ़ती छेड़छाड़ का जैव विविधता पर नकारात्मक असर पड़ा है. इंसान अपने फायदे के लिए एक तऱफ जहां जंगलों का सफाया कर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ उसने प्राकृतिक संपदा की लूटखसोट मचा रखी है, बग़ैर इस बात का ख्याल किए हुए कि इस पर अन्य जीवों का भी समान अधिकार है. बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप ने पर्वतीय क्षेत्र के पारिस्थितिक तंत्र को भी गड़बड़ कर दिया है, जिससे यहां पाए जाने वाले कई जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की प्रजातियां विलुप्त हो गई हैं या होने के कगार पर हैं.

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राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक प्रयास की जरुरत

ऐसा कहा जाता है कि भारत के पास राष्ट्रीय सुरक्षा का सिद्धांत नहीं है और यहां रणनीतिक दुविधाग्रस्तता की स्थिति बनी रहती है. सुरक्षा विशेषज्ञ जॉर्ज तनहाम ने भी ऐसा अनुभव किया है कि भारत के पास रणनीतिक सोच की संस्कृति का अभाव है. के सुब्रमण्यम के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड द्वारा इस तरफ संकेत करने के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में गंभीरता से सोचा जाने लगा है.

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राष्ट्रीय सुरक्षा प्रबंधन के मायने

राष्ट्रीय सुरक्षा एक ऐसा शब्द है, जिसका इस्तेमाल आजकल आम तौर पर किया जाता है. प्राय: यह शत्रु देश के आक्रमण से सुरक्षा से संबंधित होता है अथवा उन हथियारबंद आतंकवादियों से सुरक्षा से, जो राष्ट्र के प्रभुत्व को चुनौती देते हैं या राष्ट्रीय एकता-अखंडता को नुक़सान पहुंचाते हैं, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिप्राय केवल इसी से नहीं है, बल्कि इसे और अधिक वृहद अर्थों में समझने की आवश्यकता है.

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विधानसभा चुनाव और मुसलमानों का सियासी रूझान

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हैं, मुसलमान वहां रिवायती तौर पर अभी तक सीपीएम के नेतृत्व वाले वाम

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विधायकों की बल्‍ले-बल्‍ले

फंड खत्म करने को लेकर विधायकों के दिलों में जो मलाल था, वह अब बहुत जल्द दूर होने वाला है. नए साल के तोह़फे के तौर पर सरकार विधायकों के वेतन को लगभग दोगुना करने पर गंभीरता से विचार कर रही है. इसके साथ ही विधायकों को मिलने वाले रेल कूपन एवं हवाई यात्रा के लिए मिलने वाली राशि में भी इज़ा़फा किया जा रहा है.

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साल भर में ही टूट गई सड़क

एक तऱफ सरकार चाहती है कि राज्य का हर गांव पक्की सड़कों के माध्यम से ज़िला मुख्यालय से जुड़ जाए, लेकिन दूसरी तरफ उनके ही कुछ अधिकारी लूट खसोट में लिप्त दिख रहे हैं. मामला रोहतास ज़िले में ग्रामीण कार्य विभाग कार्य प्रमंडल, सासाराम द्वारा मुख्य मंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत बनाए गए सेमरा मध्य विद्यालय से पिपरी होते हुए कठडिहरी पथ में हुए अनियमितता की है.

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राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण और पर्यावरण संरक्षण

पर्यावरण सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी विवादों को सही समय पर निपटाने के लिए आख़िरकार हमारे देश में भी अलग से पर्यावरण अदालत की स्थापना हो गई है. पिछले दिनों पर्यावरण और वन राज्यमंत्री जयराम रमेश ने राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के गठन की जब औपचारिक घोषणा की तो भारत विश्व के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जहां पर्यावरण संबंधी मामलों के निपटारे के लिए राष्ट्रीय स्तर पर न्यायाधिकरण होते हैं.

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मीडिया की भूमिका को समझे सरकार

सियालकोट में हुई नरसंहार की घटना अपने नागरिकों को सुरक्षा उपलब्ध कराने में पाकिस्तान सरकार की असफलता का सबसे बड़ा उदाहरण है. भीड़ द्वारा पीट-पीट कर मार डालने के वीभत्स दृश्य हमारे टेलीविज़न स्क्रीन से भले दूर हो गए हैं, लेकिन दु:स्वप्न का सिलसिला अभी रुका नहीं है.

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रक्षक की सुरक्षा का सवाल

शेर और बाघों को प्रकृति का वरदान माना जाता है, जिन्हें प्रकृति ने जंगल की रक्षा का दायित्व सौंपा है. अफसोस कि आज जंगल का वही रक्षक स्वयं सुरक्षित नहीं है. उसे सबसे अधिक क्षति मानव ने पहुंचाई. उत्तराखंड में बाघों का 11 हज़ार वर्ष पुराना इतिहास खासा समृद्धशाली है.

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दिल्‍ली का बाबूः नया चेयरमैन नहीं मिला

राष्ट्रीय राजमार्गों पर आसानी से दिख जाने वाला गड्‌ढा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की अंदरूनी हालत की असली तस्वीर पेश करता है. सरकार ने एनएचएआई के नए अध्यक्ष की तलाश में एक साल तक कोशिश की, लेकिन उपयुक्त उम्मीदवार न मिलता देख वह इसके मौजूदा अध्यक्ष ब्रजेश्वर सिंह को तीन महीने का सेवा विस्तार देने का फैसला लेने के लिए मजबूर हो गई.

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उत्तर प्रदेशः बेहाल है जननी सुरक्षा योजना

उत्तर प्रदेश में जननी सुरक्षा योजना का हाल-बेहाल है. प्रसव केंद्र के बाहर सड़क पर महिलाएं बच्चा जनने को मजबूर हैं. यह हाल तब है जबकि यहां की मुख्यमंत्री महिला है. प्रदेश के 3424 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर केवल 32 महिला डॉक्टर तैनात हैं, जबकि पांच हज़ार से अधिक पुरुष डॉक्टर हैं.

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