नेताओं की ग़लतफहमियों ने देश के राजनीतिक पतन का एक नया अध्याय लिख दिया. भारतीय जनता पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल एवं बहुजन समाज पार्टी ने ऐसा घिनौना खेल खेला, जिससे जनता का सिर शर्म से झुक गया. राजनीति का यह शर्मनाक खेल किसी ग़लती की वजह से नहीं, बल्कि नेताओं की ग़लतफहमी की वजह से खेला गया.
इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का तीसरा सत्र ख़त्म हो चुका है, लेकिन लीग से जुड़े विवादों का सिलसिला ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा. कोच्चि टीम की फ्रेंचाइजी को लेकर शुरू हुए ताज़ा विवाद ने पहले केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर की बलि ली तो भ्रष्टाचार और सट्टेबाज़ी के आरोपों के मद्देनज़र 25 अप्रैल को फाइनल मुक़ाबले के ठीक बाद बीसीसीआई ने आईपीएल के कमिश्नर एवं चेयरमैन ललित मोदी को निलंबित करते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया.
हिंदुस्तान के अब तक के सबसे बड़े घोटाले का खेल अभी ख़त्म नहीं हुआ है. अभी तो अंडरवर्ल्ड के किस्से का खुलासा होना बाक़ी है. ललित मोदी बीसीसीआई के पापों का घड़ा फोड़ने की धमकी दे रहे हैं क्योंकि आज हर कोई उनके ख़िला़फ है. आपने मारियो पूजो की किताब पर बनी फिल्म गॉडफादर देखी हो तो यह समझ लीजिए आज हालात उससे ज़्यादा अलग नहीं हैं.
शशि थरूर के करियर पर नज़र डालें तो इसमें विरोधाभासों की कोई कमी नहीं है. चार साल पहले थरूर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव पद के लिए मनमोहन सिंह के चुने हुए उम्मीदवार थे. कूटनीति के क्षेत्र में दुनिया भर में सबसे प्रतिष्ठित माने जाने वाले इस पद के लिए उनकी उम्मीदवारी को लेकर विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री को मना किया था, क्योंकि थरूर के जीतने की संभावना नहीं के बराबर थी, फिर भी मनमोहन अपने फैसले पर क़ायम रहे.
हो सकता है कि ललित मोदी को क्रिकेट से बहुत प्यार हो. लेकिन सच यह है कि मोदी को क्रिकेट से कहीं ज़्यादा प्यार विवादों से है. विवादों को जन्म देना और विवादों में बने रहना, मानो उनका बचपन से शौक़ रहा हो. विश्वास नहीं होता तो इतिहास के पन्ने पलटिए और उनके छात्र जीवन पर नज़र डालिए.
पुराने दौर में बादशाह के फरमान को खुदा का फैसला माना जाता था. शासन के फैसले स़िर्फ एक शख्स के हाथ में होते थे. वही राज्य का पहला और आ़खिरी न्यायाधीश होता था. समय के साथ-साथ शासन चलाने का तरीक़ा बदला. फैसला कौन करे, इस निर्णय प्रक्रिया में लोग जुड़ने लगे. दुनिया के कई देशों में फैसले का अधिकार अब आम जनता के हाथों में आ गया है, जिसे हम प्रजातंत्र कहते हैं.