साई बाबा : जैसा भाव वैसा गुरु

अपने सांसारिक ज्ञान के आधार पर आध्यात्मिक कार्य की विवेचना करना मनुष्य की एक बहुत बड़ी कमी है. आध्यात्मिक ज्ञान

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श्री साईं-सच्चरित्र में कर्म-सिद्धांत

स्व. श्री गांविंद रघुनाथ दाभोलकर (हेमाडपंत) द्वारा रचित ‘श्री साईं सच्चरित्र’ के सैंतालीसवें अध्याय में श्री साईंनाथ महाराज द्वारा अपने

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साईं वंदना : अपने स्वभाव की सहजता को बनाए रखें

ज्योतिषियों की सहायता अनावश्यक क्या जटिलता से भरे इस संसार में साईं-भक्त को ज्योतिषियों की सहायता लेनी चाहिए? अधिक से

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सामान्य समस्याएं : निष्काम सेवा ही गुरु का प्रमुख ध्येय है

सामान्य जीवन और गुरुमार्ग सामान्य जीवन जीना ही एक समस्या है, फिर समय के अभाव में भी श्री गुरु-मार्ग के

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साईं वंदना : प्राणिमात्र का कल्याण ही एकमात्र उद्देश्य

मत्कार : सद्गुरु की सूक्ष्म कार्य-प्रणाली क्या सद्गुरु चमत्कार करते हैं? जैसा हम समझते हैं कि किसी कार्य को कोई

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साईं की आराधना श्रद्धा सबुरी के साथ करनी चाहिए

क्या सदगरु से सांसारिक मांगे करना अनुचित हैं? बाबा भक्तों की मांगों को पूरी करते रहे और आज भी पूरी

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सद्गुरु भक्तों के अर्न्तमन को जानते हैं

गुरु-मुख होने की आवश्कता संसार में जो अनेक तरह के बंधन हैं, मनुष्य उनमें क्यों फंसता है? संसार के अनेक बंधनों

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सद्गुरु प्रकाशमान सूर्य की भांति हैं

करोड़ो प्रकार के विभिन्न प्राणी-जिनमें मानव सबसे उन्नत है, जीवन के अलग-अलग गलियारों में चलते रहते हैं- राजपथ पर पहुंचने के

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