मध्य प्रदेश: नगर निगम और निकाय चुनावक्या व्यापम घोटाला कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित होगा?

मध्य प्रदेश में नगर निकाय चुनावों का बिगुल बज चुका है. राज्य में नगर निगम और नगरीय निकायों में 28

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भाजपा का कोई विकल्प नहीं

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी पारी खेल रहे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए लोकसभा चुनाव किसी रोेमांच

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पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव : लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल

पांच राज्यों चुनाव की तारीख़ें तय हो गई हैं. भाजपा और कांग्रेस समेत सभी पार्टियां इन राज्यों की सत्ता हथियाने

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दिल्‍ली का बाबूः मुखिया विहीन बैंकिंग सेक्टर

पिछले 9 महीने से पंजाब एंड सिंध बैंक के सीएमडी का पद रिक्त है, लेकिन अब तक इस मसले को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय और वित्त मंत्रालय के बीच जारी तनातनी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. अब तक ये दोनों मिलकर यह तय नहीं कर पाए हैं कि चली आ रही परंपरा के अनुसार इस पद पर एक सिख को बैठाया जाए या नहीं.

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गलत समय पर सही बहस

भले ही मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य सभा के औचित्य के सवाल पर दिया गया अपना बयान वापस ले लिया है, फिर भी इस पर बहस तो छिड़ ही गई है. जिस तरह भारतीय राजनीति का अपराधीकरण, भ्रष्टाचारीकरण व आर्थिकीकरण हो रहा है, उसे देखकर शिवराज सिंह चौहान के बयान को अप्रासंगिक नहीं ठहराया जा सकता.

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अन्‍नपूर्णा योजना का सचः काम कम, प्रचार ज्‍यादा

मध्य प्रदेश में ग़रीब वोट बैंक को अपने हक़ में हड़पने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तरह-तरह के लुभावने राहतकारी और खैरात बांटने वाले कार्यक्रम शुरू किए हैं, लेकिन इन कार्यक्रमों का प्रचार ज़्यादा होता हैं, काम कम होता है.

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क्‍या कर रहे हैं शिवराज सिंह चौहान

भ्रष्टाचार के ख़िला़फ आवाज़ उठाना और भ्रष्टाचार के नाम पर मातम मनाना हमारे सार्वजनिक जीवन का फैशन बन गया है. खासकर सत्ताधारी दल या नेताओं पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाना, तो विरोधी दलों के बयानबाज नेताओं के लिए एक मनोरंजक खेल बन गया है. ख़ैर, सच्चाई यह भी है कि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार के लिए भ्रष्टाचार उसकी विशिष्ट पहचान बन चुका है.

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सिर्फ किताबी योजनाएं और खोखले वायदे

स्‍वर्णिम मध्य प्रदेश का संकल्प पत्र तैयार करने की प्रसव वेदना से प्रदेश की भाजपा सरकार पिछले कई महीनों से जिस प्रकार से चीख- पुकार मचा रही थी, उसे लगता था कि सरकार परिवर्तन का भीमसेन जनने वाली है, लेकिन मध्य प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में हुए विचार मंथन के बाद जनता को पता चला कि सरकार का बौद्धिक गर्भपात हो गया.

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कांग्रेस और भाजपा का दलित प्रेम

वोट बैंक की राजनीति के कारण आज दलित वर्ग का महत्व इसलिए भी ज्यादा बढ़ गया हैं क्योंकि बहुजन समाज पार्टी ने हिंदी भाषी राज्यों के दलितों को अपनी ओर आकर्षित करने में सफलता पाई है. कई क्षेत्र में बसपा के झंडे तले दलितों के गोलबंद होने से कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलितों से नाराज हैं, लेकिन मजबूरी में दलित प्रेम का दिखावा कर रही हैं.

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महेश्‍वर नर्मदा जल परियोजनाः केंद्र और राज्‍य आमने-सामने

महेश्वर नर्मदा जल परियोजना को लेकर केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार में तनातनी चल रही है. प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने परियोजना से प्रभावित लोगों के पुनर्वास को लेकर इस पर आगे काम बंद करने के निर्देश दिए तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भड़क उठे. उन्होंने प्रधानमंत्री को मध्य प्रदेश के विकास के प्रति अनुदार और संवेदनहीन बताया. लेकिन, सच्चाई मुख्यमंत्री को भी मालूम है.

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हाथठेला मजदूरों का सपना टूटा

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान राजनीति के जादूगर हैं. वह राज्य की भोलीभाली जनता को सुनहरे सपने दिखाने में माहिर हैं और कभी-कभी तो कई दिनों तक सपनों के संसार की सैर भी कराते हैं. बाद में अपने वायदे भूलकर जनता को बेरहमी से धरती पर पटक देते हैं. हाल ही शिवराज सिंह ने राज्य के हज़ारों हाथठेला मज़दूरों की वाहवाही लूटने के लिए वायदा किया था कि सभी हाथठेला चालकों को मालिकाना हक़ दे दिया जाएगा.

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किसान पुत्र का राज और किसान आंदोलन

मध्य प्रदेश सरकार की कृषि और किसान हितैषी नीतियों की पोल राज्य में हर साल होने वाले किसान आंदोलनों से खुल जाती है. राज्य सरकार ने किसान आंदोलनों का लाठी-गोली से दमन तो किया, लेकिन किसानों की समस्याओं को सुलझाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई.

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जल संकट से जनता बेहाल

मध्य प्रदेश में भीषण जानलेवा गर्मी पड़ रही है. दोपहर में तो लगता है जैसे हवा आग बरसा रही हो. राज्य में इन दिनों कहीं भी दिन का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से कम नहीं है. निमाड़, मालवा और बुंदेलखंड में तो कहीं-कहीं तापमान 45 डिग्री से ऊपर तक पहुंच जाता है. ऐसे गर्म मौसम में पूरे राज्य में जल संकट जनता के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गया है.

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लक्ष्‍य पूरा कराने के लिए मौत का टीका

मध्य प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग भ्रष्टाचार और लापरवाही के लिए खासा बदनाम है. इस विभाग को लोग हत्यारा विभाग तक कहने लगे हैं. हाल में दमोह ज़िला मुख्यालय में टीकाकरण योजना के तहत खसरे का टीका लगाने के बाद चार बच्चों की मौत हो गई और दस बच्चे गंभीर रूप से बीमार हो गए.

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अभी भी चुनौती है डंपर कांड

मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों द्वारा विधानसभा के पटल पर रखी गई, संपत्ति संबंधी जानकारी में राज्य के वित्तीय विशेषज्ञों को असमंजस में डाल दिया है. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में शिवराज सिंह चौहान और उनकी पत्नी समेत सात व्यक्तियों के ख़िला़फ जनहित याचिका ख़ारिज़ कर दी है.

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कोटवारों को इंसाफ कब मिलेगा

कोटवार एक ऐसा शब्द जो दूर दराज में रहने वाले ग्रामीणों और प्रशासन के बीच सेतु का काम करता है. सालों से ग्रामीण प्रशासनिक सेवा में लगे ये लोग कोटवार कहे जाते हैं.

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जंगल के राजा पर संकट

विश्व प्रसिद्ध कान्हा नेशनल पार्क में शेरों की संख्या घटकर केवल 89 बची है. वर्ष 1993 में टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद से बढ़ने वाली यह संख्या अब तक के सबसे कम संख्यांक तक पहुंच रही है. कान्हा प्रबंधन भी शेरों की गणना से मीडिया को दूर रखना चाहता है. इससे यह संकेत मिलता है कि, मध्य प्रदेश जैसा विशाल राज्य अपने टाइगर रिजर्व को संरक्षित रख पाने में कहीं-न-कहीं असफल रहा है.

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नौकरशाहों की लोकतंत्र में आस्था नहीं

देश के आला अफसरों की लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई आस्था नहीं है. नौकरशाह मनमाने ढंग से प्रशासन चलाना चाहते हैं और चला भी रहे हैं. संवैधानिक बाध्यता के कारण विधानसभा एवं मंत्री परिषद आदि संस्थाओं की कार्यवाही में वे औपचारिकता ही पूरी करते हैं.

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बासमती चावल उत्‍पादक किसान ठगी के शिकार

भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश के किसानों को भरोसा दिलाया है कि उसकी सरकार खेती को लाभप्रद व्यवसाय बनाने के लिए उपाय करेगी. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान किसानों की हमदर्दी पाने के लिए स्वयं को किसान पुत्र तो कहते हैं, लेकिन उन्हें राज्य के किसानों के हितों की ज़रा भी परवाह नहीं है.

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सार-संक्षेप

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्वाचन क्षेत्र बुदनी के वनग्राम खटपुरा के 200 वनवासी परिवारों को एक भाजपा नेता के इशारे पर वन विभाग के अफसर प्रताड़ित कर रहे हैं. 25 वर्षों से वनभूमि पर रहने वाले वनवासियों का आरोप हैं कि उन्हें खेती के लिए पट्टे देना तो दूर, वन अधिकारी उनकी फसल चौपट कर उनके खिला़फ झूठे मुकदमे दर्ज करा रहे हैं.

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मध्य प्रदेश नाकारा और निरंकुश अ़फसरशाही के शिकंजे में

राजधानी में होली पर्व की पूर्व बेला में प्रसारित एक गुमनाम पर्चा प्रशासनिक क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ था. यह पर्चा कुछ स्थानीय अ़खबारों में पूरे नमक मिर्च के साथ छापा भी गया है. इस पर्चे ने प्रशासन का मनोबल और भी कमज़ोर दिया है.

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आओ बनाएं अपना मध्‍यप्रदेश बढ़ती बेरोजगारी घटते रोजगार

गरीबी और पिछड़ेपन की समस्याओं से त्रस्त मध्य प्रदेश को खुशहाल और संपन्न राज्य बनाने का सुनहरा सपना दिखाने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेक इरादों की सराहना की जानी चाहिए, लेकिन नेक इरादों के बावजूद उनमें और उनकी सरकार में संकल्प शक्ति नहीं दिखती है, इसीलिए राज्य के विकास और जनकल्याण की तमाम योजनाएं भारी भरकम खर्च के बावजूद प्रभावशून्य और परिणामशून्य ही नज़र आती हैं.

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सार-संक्षेप

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान राज्य के भोले-भाले मेहनतकश किसानों की सहानुभूति बटोर कर अपनी राजनीति चमकाना तो जानते हैं, लेकिन वे किसानों के हित में काम कैसे करते हैं, इसकी नज़ीर यह है कि किसानों की क़र्ज़ मा़फी की घोषणा हुए एक वर्ष हो गया, लेकिन आज भी नौ लाख किसान अपनी क़र्ज़ मा़फी का इंतजार कर रहे हैं

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स्‍वर्णिम मध्‍य प्रदेश सिर्फ एक सपना है

स्‍वर्णिम मध्य प्रदेश की योजनाओं के तहत मध्य प्रदेश सरकार पर 58000 करोड़ रूपए का क़र्ज़ हो चुका है और उस पर 6500 करोड़ का ब्याज भी च़ढ चुका है. प्रदेश में बच्चों के प्रति अपराधों का ग्राफ चढ़ता ही जा रहा है. राज्य में 40 से अधिक सांप्रदायिक घटनाएं हुई हैं, सरकार की देनदारियों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है. महिलाओं और कमज़ोर तबके पर बढ़ते अपराध और अत्याचार, प्रशासनिक स्तर पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के भ्रष्टाचारों का खुलेआम नज़र आना. यह सब मिलकर प्रदेश के मनोरम स्वप्न को एक डरावनी हक़ीक़त का रूप देते हैं.

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विकास कार्य स़िर्फ काग़ज़ों में सिमटा

यूं तो मध्य प्रदेश में विलुप्त होते आदिवासियों के विकास के लिए हर वर्ष सैंकड़ों योजनाएं लागू की जाती हैं, पर हक़ीक़त ये है कि सभी योजनाएं स़िर्फ काग़ज़ों में सिमट कर रह जाती हैं और इन योजनाओं के लिए स्वीकृत राशि से सरकारी बाबू अपना वारा-न्यारा करते हैं.

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मध्य प्रदेश: बिजली की बर्बादी में चौथा स्थान

राज्य में पिछले एक दशक से गंभीर बिजली संकट चल रहा है. बिजली के झटकों से भारतीय जनता पार्टी ने 2003 में कांग्रेस की सरकार तो गिरा दी, लेकिन पूरे पांच साल तक राज्य में बिजली का संकट बना रहा. फिर 2008 के चुनाव में भाजपा ने बिजली संकट के लिए केंद्र की कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार को बदनाम करके एक बार फिर सरकार पर क़ब्ज़ा जमा लिया. कुल मिलाकर भाजपा के लिए राज्य का बिजली संकट एक भड़काऊ और कमाऊ मुद्दा है. उसे बिजली संकट हल करने की कोई चिंता नहीं है.

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भाजपा में अंसतोष की संभावनाएं

हैं.
लोकसभा चुनाव के बाद मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का वर्तमान नेतृत्व क्या संकट में होगा? इस तथ्य की खोज के लिए भारतीय जनता पार्टी के दो परस्पर विरोधी गुट आपस में भिड़ गए हैं. मध्यप्रदेश की राजनीति में आने वाले पांच वर्षों के लिए शिवराज सिंह चौहान का एकाधिकार निर्विवादित रूप से माना जा रहा है, जिसे चुनौती देने के लिए भाजपा का एक गुट लोकसभा चुनाव को दल की राजनीति का आधार बनाने की फिराक में है. भारतीय जनता पार्टी की मध्यप्रदेश की सरकार आरामदेह बहुमत के साथ राज्य में पांच साल तक सत्ता संचालन के लिए सक्षम है.

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