दमोह-निर्मल जैन : स्वयं सेवक की दुख भरी कहानी : मोहन भागवत के लिए

नौसाल की उम्र से एक व्यक्तिसंघ की शाखा में जाता रहा. उम्र के सातवें दशक में भी वह आदमी खुद

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इस कलंक से मुक्ति के लिए स़िर्फ क़ानून का़फी नहीं

हाथ से मैला उठाने, उसे सिर पर ढोने या मैनुअल स्केवेंजिंग का घिनौना और अमानवीय कार्य आज भी हमारे देश

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आईएसआईएस मध्य-पूर्व की संस्कृति पर ख़तरा

मैं भी किसी दूसरे कनाडाई नाकरिक की तरह ही जिंदगी जीता था. हॉकी मैच देखता था. गर्मियों में घूमने जाता

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प्रधानमंत्री के नाम अन्ना की चिट्ठी

सेवा में,

श्रीमान् डॉ. मनमोहन सिंह जी,

प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली.

विषय : गैंगरेप-मानवता को कलंकित करने वाली शर्मनाक घटना घटी और देश की जनता का आक्रोश सड़कों पर उतर आया. ऐसे हालात में आम जनता का क्या दोष है?

महोदय,

गैंगरेप की घटना से देशवासियों की गर्दन शर्म से झुक गई.

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सरकार जवाब दे यह देश किसका है

हाल में देश में हुए बदलावों ने एक आधारभूत सवाल पूछने के लिए मजबूर कर दिया है. सवाल है कि आखिर यह देश किसका है? सरकार द्वारा देश के लिए बनाई गई आर्थिक नीतियां और राजनीतिक वातावरण समाज के किस वर्ग के लोगों के फायदे के लिए होनी चाहिए? लाजिमी जवाब होगा कि सरकार को हर वर्ग का ख्याल रखना चाहिए. आज भी देश के साठ प्रतिशत लोग खेती पर निर्भर हैं. मुख्य रूप से सरकारी और निजी क्षेत्र में काम कर रहा संगठित मज़दूर वर्ग भी महत्वपूर्ण है.

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पूरे चांद की रात…

भारतीय साहित्य के प्रमुख स्तंभ यानी उर्दू के मशहूर अ़फसानानिग़ार कृष्ण चंदर का जन्म 23 नवंबर, 1914 को पाकिस्तान के गुजरांवाला ज़िले के वज़ीराबाद में हुआ. उनका बचपन जम्मू कश्मीर के पुंछ इलाक़े में बीता. उन्होंने तक़रीबन 20 उपन्यास लिखे और उनकी कहानियों के 30 संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनके प्रमुख उपन्यासों में एक गधे की आत्मकथा, एक वायलिन समुंदर के किनारे, एक गधा नेफ़ा में, तूफ़ान की कलियां, कॉर्निवाल, एक गधे की वापसी, ग़द्दार, सपनों का क़ैदी, स़फेद फूल, प्यास, यादों के चिनार, मिट्टी के सनम, रेत का महल, काग़ज़ की नाव, चांदी का घाव दिल, दौलत और दुनिया, प्यासी धरती प्यासे लोग, पराजय, जामुन का पेड़ और कहानियों में पूरे चांद की रात और पेशावर एक्सप्रेस शामिल है. 1932 में उनकी पहली उर्दू कहानी साधु प्रकाशित हुई. इसके बाद उन्होंने पीछे म़ुडकर नहीं देखा.

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अधिकारों से वंचित हैं मुस्लिम महिलाएं

दुनिया की तक़रीबन आधी आबादी महिलाओं की है. इस लिहाज़ से महिलाओं को तमाम क्षेत्रों में बराबरी का हक़ मिलना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है. कमोबेश दुनिया भर में महिलाओं को आज भी दोयम दर्जे पर रखा जाता है. अमूमन सभी समुदायों में महिलाओं को पुरुषों से कमतर मानने की प्रवृत्ति है, ख़ासकर मुस्लिम समाज में तो महिलाओं की हालत बेहद बदतर है.

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आत्‍महत्‍या की कीमत हम सब चुकाते हैं

वर्ष 2006 में मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री नवीन जिंदल ने संसद में एक मुद्दा उठाया कि भारतीय छात्रों द्वारा आत्महत्या की घटनाओं की वजह क्या है और सरकार किस तरह आत्महत्या के आंकड़े बढ़ने से रोक सकती है. इसके बाद संसद की तऱफ से कुछ विशेष क़ानून बनाए गए. सबसे पहले तो परीक्षाओं से जुड़ी हेल्पलाइन शुरू की गई, जो परीक्षा से पहले विद्यार्थियों को फोन पर साइकोलॉजिकल एडवाइस देती है.

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महाभारत के पात्र आसपास बिखरे हैं

भारतीय समाज में प्राचीन काल से लेकर आज तक सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि में कोई विशेष बदलाव नहीं आया है. उस व़क्त भी ताक़तवर व्यक्ति अपने फायदे के लिए कमज़ोर व्यक्ति का इस्तेमाल करता था, और आज भी ऐसा ही हो रहा है.

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सरल शब्दों में जीवन की अभिव्यक्ति

हाल में आरोही प्रकाशन ने रेणु हुसैन की कविताओं के दो संग्रह प्रकाशित किए हैं. पहला कविता संग्रह है पानी-प्यार और दूसरे कविता संग्रह का नाम है जैसे. अंग्रेज़ी की वरिष्ठ अध्यापिका रेणु हुसैन स्कूल के व़क्त से ही कविताएं लिख रही हैं.

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माननीयों की मनमानी: एक और ज़मीन घोटाला

महाराष्ट्र में घोटालों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा. माननीयों के कारनामों की फेहरिस्त कितनी लंबी है, इसका अंदाज लगा पाना मुश्किल है. ऐसा लगता है कि घोटालों के मामले में राज्य सरकार किसी भी सूरत में केंद्र सरकार से पीछे नहीं रहना चाहती है.

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अनूप श्रीवास्तव एएस बने

1981 बैच के आईएएस अधिकारी अनूप कुमार श्रीवास्तव को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव बनाया गया है. वह संगीता गैरोला की जगह लेंगे. अनूप श्रीवास्तव इससे पहले राजस्व विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत थे.

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अनूप कुमार और विंद्रा स्वरूप एएस बनेंगे

1981 बैच के आईएएस अधिकारी अनूप कुमार को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव बनाया जाएगा. वह संगीता गैरोला की जगह लेंगे, जिन्हें संस्कृति मंत्रालय में सचिव बनाया गया है. इसी बैच के आईएएस अधिकारी विंद्रा स्वरूप को विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग में अतिरिक्त सचिव बनाया गया है.

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महिलाओं के अधिकार और क़ानून

हर व्यक्ति जन्म से ही कुछ अधिकार लेकर आता है, चाहे वह जीने का अधिकार हो या विकास के लिए अवसर प्राप्त करने का. मगर इस पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के साथ लैंगिक आधार पर किए जा रहे भेदभाव की वजह से महिलाएं इन अधिकारों से वंचित रह जाती हैं.

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मुस्लिम सियासत और पीस पार्टी

एक महीने से अधिक समय तक चले उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा विधानसभा चुनावों की प्रक्रिया 6 मार्च को मतगणना और परिणामों की घोषणा के साथ समाप्त हो गई. इसके साथ ही समाप्त हो गया वह लंबा इंतज़ार जिसको लेकर हर कोई भविष्यवाणी करने में लगा हुआ था.

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कंपनी बिल-2011 : राजनीतिक दलों का दोहरा रवैया

14 दिसंबर, 2011 को लोकसभा में एक घटना घटी. डॉ. वीरप्पा मोइली ने दोपहर के बाद कंपनी बिल-2011 लोकसभा में पेश किया. इस बिल में राजनीतिक दलों को कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले धन का प्रावधान है. इस बिल के पेश होने के एक घंटे के अंदर कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी बोलने के लिए खड़े हुए. उन्होंने कहा कि काला धन प्रमुख तौर पर हमारे चुनाव में मिलने वाले चंदे से जुड़ा हुआ है और इस चुनावी चंदे के स्वरूप में परिवर्तन करके काले धन की समस्या पर बहुत हद तक क़ाबू पाया जा सकता है.

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स्त्रियों की मज़दूरी का मूल्यांकन

फिर कल-काऱखानों के चल निकलने के कारण स्त्री कामगारों की संख्या बढ़ी, लेकिन बाज़ार में इनकी मज़दूरी का भाव पुरुषों की अपेक्षा निम्न स्तर का ही रहा. मालिकों की दलील यह थी कि यदि हमें मज़दूरों की ज़रूरत ही हो तो हम पुरुषों को ही क्यों न रखें और फिर सस्ती दर में औरतें काम करने के लिए राज़ी भी तो हैं. उनके इस उत्तर में सुदृढ़ तर्क का अभाव भले हो, इसने स्त्रियों को मज़दूरी की आवश्यकता के कारण सस्ती दर पर काम करने के लिए बाध्य कर दिया.

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शिष्टाचार भूलते कांग्रेसी

उत्तर प्रदेश में अपनी दाल न गलती देख कांग्रेस ने राजनीतिक फायदा उठाने के लिए चुनाव आयोग को ठेंगा दिखाने और विपक्ष का अपमान करने की नई मुहिम छेड़ दी है. कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी सहित कोई न कोई नेता नित्य-प्रतिदिन चुनाव आयोग, विपक्षी नेताओं और उनकी पार्टियों के बारे में नुक्ताचीनी और अमर्यादित टिप्पणी करते रहते हैं.

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उत्तर प्रदेश : क्या मुस्लिम विधायकों की संख्या बढे़गी

मुस्लिम वोटों को लेकर सियासी दलों के बीच जंग चलती है और लोक-लुभावन घोषणाएं की जाती हैं, लेकिन इसका फायदा मुसलमानों को होता है, इस पर सवालिया निशान लगाए जा सकते हैं. मगर मुसलमानों को इसका एक यह फायदा तो ज़रूर हुआ है कि अब सियासी दलों की लिस्ट में पहले की तुलना में मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या धीरे-धीरे ब़ढ रही है.

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कंपनियों का अवतरण

ये मध्यम वर्ग के लोग जो शुरू-शुरू में छुटभैय्या, कारिंदों या मंत्रियों के रूप में सामने आए थे, धीरे-धीरे स्वयं व्यापार करने लगे. एक तऱफ पूंजीपतियों की पूंजी थी, दूसरी तऱफ मज़दूर की मेहनत थी. दोनों का उपयोग करते हुए या दोनों का ही शोषण करके इस वर्ग ने अपना अधिपत्य सारे व्यापार और उद्योग पर जमा लिया.

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फेसबुक की करतूत

विश्व में तलाक के एक तिहाई मामलों के लिए सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक ज़िम्मेदार है. यह दावा एक विधिक परामर्शदाता कंपनी ने किया है. बताया गया कि तलाक के मामलों में फेसबुक का प्रयोग बतौर सबूत किया जा रहा है. कंपनी ने कहा कि पिछले दो वर्षों के दौरान फेसबुक शब्द वाली तलाक याचिकाओं में 50 फीसदी का इज़ा़फा हुआ है.

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जहां चाह, वहां राह

एक अच्छी कोशिश हमेशा प्रशंसनीय होती है, लेकिन जब ऐसी कोई कोशिश नए और संसाधनों का अभाव झेलने वाले लोग करते हैं तो वे दो-चार अच्छे शब्दों और शाबाशी के हक़दार ख़ुद-बख़ुद हो जाते हैं. त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका समसामयिक सृजन इसकी मिसाल है.

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पूंजी की निर्धारित सीमा

पूंजी संपत्ति पूंजीवाद का मूल स्तंभ है. इसे मिटाना ही होगा. इस श्रेणी में प्रधानत: दो ही संपत्तियों का समावेश होता है- (1) ज़मीन जायदाद, (2) पूंजी. भारत सरकार ने जबसे समाजवादी अर्थव्यवस्था को अपना ध्येय घोषित किया है, प्रथम कक्षा के लिए कई संशोधन हुए हैं, नए क़ानून बने हैं.

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सुरेश पांडा अतिरिक्त सचिव बने

1981 बैच के आईएएस अधिकारी सुरेश चंद्र पांडा को गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव एवं एफए बनाया गया है. वह विश्वपति त्रिवेदी की जगह लेंगे, जिन्हें खनिज मंत्रालय में सचिव बनाया गया है.

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सोशल नेटवर्किंग साइट्स और फिल्मी सितारे

एक छोटे एक्शन सीन की शूटिंग के दौरान पसलियों में चोट लग गई…अंदर कुछ नुक़सान हुआ है. सांस लेने में परेशानी हो रही है. रात के तीन बज रहे हैं…कौन बनेगा करोड़पति का एपिसोड शूट करके घर लौट रहा हूं…सुबह जल्दी उठकर फिल्म की शूटिंग पर जाना है…

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युवा शक्ति को पहचानने की ज़रुरत

किसी भी देश का सामाजिक और आर्थिक विकास उसकी युवा शक्ति पर निर्भर करता है. भारत जैसे देश, जहां युवाओं की संख्या अच्छी-खासी है, वहां यह बात और अधिक प्रासंगिक हो जाती है. भारत के आर्थिक नियोजक इस पर ध्यान भी देते हैं.

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सामुदायिक रेडियो : बदलाव का सशक्त माध्यम

22 वर्षीय मंजुला पिछले वर्ष एक दिन अगस्त माह में रेडियो स्टेशन जा पहुंची और सुबह 5 बजे सुनामी के लिए सावधान रहने की घोषणा प्रसारित करने लगी. सवेरे रेडियो के श्रोता सकते में आ गए, क्योंकि वे इतने सवेरे तो आठ बजे से पहले शुरू होने वाले कलंजियम वानोली सामुदायिक रेडियो स्टेशन के प्रसारण सुनने के ही आदी थे.

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