हिंदी नहीं बल्कि भोजपुरी गाने पर ठुमका लगाते नज़र आएँगे सलमान-शाहरुख

नई दिल्ली : बॉलीवुड के दबंग यानी सलमान खान बादशाह यानी शाहरुख खान के साथ आनंद एल राय की फ़िल्म

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झूमने पर मजबूर कर देगा ‘फिलौरी’ का ‘नॉटी बिल्लो’, आपने सुना क्या

नई दिल्ली, (विनीत सिंह) : बॉलीवुड एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा की अपकमिंग फिल्म ‘फिल्लौरी’ पहले से ही दर्शकों के दिल में

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मोहम्‍मद रफी : हां, तुम मुझे यूं भुला न पाओगे

बहुमुखी संगीत प्रतिभा के धनी मोहम्मद ऱफी का जन्म 24 दिसंबर, 1924 को पंजाब के अमृतसर ज़िले के गांव मजीठा में हुआ. संगीत प्रेमियों के लिए यह गांव किसी तीर्थ से कम नहीं है. मोहम्मद ऱफी के चाहने वाले दुनिया भर में हैं. भले ही मोहम्मद ऱफी साहब हमारे बीच में नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज़ रहती दुनिया तक क़ायम रहेगी. साची प्रकाशन द्वारा प्रकाशित विनोद विप्लव की किताब मोहम्मद ऱफी की सुर यात्रा मेरी आवाज़ सुनो मोहम्मद ऱफी साहब के जीवन और उनके गीतों पर केंद्रित है.

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फिल्‍मों में लोक संगीत

भारत गांवों का देश है. गांवों में ही हमारी लोक कला और लोक संस्कृति की पैठ है. लेकिन गांवों के शहरों में तब्दील होने के साथ-साथ हमारी लोककलाएं भी लुप्त होती जा रही हैं. इन्हीं में से एक है लोक संगीत. संगीत हमारी ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है. संगीत के बिना ज़िंदगी का तसव्वुर करना भी बेमानी लगता है. संगीत को इस शिखर तक पहुंचाने का श्रेय बोलती फिल्मों को जाता है.

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मन को छूते मेरे गीत

गीत मन के भावों की सबसे सुंदर अभिव्यक्ति हैं. साहित्य ज्योतिपर्व प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक मेरे गीत में सतीश सक्सेना ने भी अपनी भावनाओं को शब्दों में पिरोकर गीतों की रचना की है. वह कहते हैं कि वास्तव में मेरे गीत मेरे हृदय के उद्‌गार हैं. इनमें मेरी मां है, मेरी बहन है, मेरी पत्नी है, मेरे बच्चे हैं. मैं उन्हें जो देना चाहता हूं, उनसे जो पानी चाहता, वही सब इनमें है.

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जहां डाल-डाल पर सोने की चिडि़या करती है बसेरा

जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी… यानी जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है. जन्म स्थान या अपने देश को मातृभूमि कहा जाता है. भारत और नेपाल में भूमि को मां के रूप में माना जाता है. यूरोपीय देशों में मातृभूमि को पितृ भूमि कहते हैं. दुनिया के कई देशों में मातृ भूमि को गृह भूमि भी कहा जाता है. इंसान ही नहीं, पशु-पक्षियों और पशुओं को भी अपनी जगह से प्यार होता है, फिर इंसान की तो बात ही क्या है.

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समकालीन गीतिकाव्य पर बेहतरीन शोध ग्रंथ

अनंग प्रकाशन द्वारा प्रकाशित समकालीन गीतिकाव्य : संवेदना और शिल्प में लेखक डॉ. रामस्नेही लाल शर्मा यायावर ने हिंदी काव्य में 70 के दशक के बाद हुए संवेदनात्मक और शैल्पिक परिवर्तनों की आहट को पहचानने की कोशिश की है. नवगीतकारों को हमेशा यह शिकायत रही है कि उन्हें उतने समर्थ आलोचक नहीं मिले, जितने कविता को मिले हैं. दरअसल, समकालीन आद्यावधि गीत पर काम करने का खतरा तो बहुत कम लोग उठाना चाहते हैं.

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जन्‍मदिन 13 मई मनहर उधास

उधास परिवार के चश्मे-चिराग़ मनहर, पंकज और निर्मल संगीत की दुनिया में सुपरिचित नाम हैं. इनमें सबसे बड़े भाई मनहर उधास का जन्म 13 मई को हुआ था. वैसे तो मनहर उधास गुजराती संगीत का एक बड़ा नाम हैं और अब तक उनकी गुजराती ग़ज़लों के 27 एलबम निकल चुके हैं.

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फिल्मों में होली के गीतों का धमाल

फिल्मी पर्दे पर होली और होली के गीतों ने हमेशा लोकप्रियता पाई है. एक समय था जब होली के गीतों को फिल्मों में ज़रूर रखा जाता था. वर्ष 1937 में प्रथम महिला संगीतकार सरस्वती देवी ने फिल्म जीवन प्रभात के लिए होली आई रे कान्हा….गीत संगीतबद्ध किया था. उसी दौर में अनिल विश्वास ने अंगुलीमाल फिल्म में एक होली गीत, आई आई बसंती बेला, मगन मन झूम रहा…अलबेली नार, करके श्र्गार, आंचल संवार, आई पीके द्वार…कहीं बाजे मृदंग कहीं बाजे रे जंग…डाला था.

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कैटरीना ने आइटम सॉन्ग के लिए पसीना बहाया

इन दिनों इंटरनेट पर सबसे ज़्यादा ढूंढी जाने वाली सेलिब्रिटी में भले ही सन्नी लियोन का नाम सबसे ऊपर आता हो और उन्होंने भले ही कैटरीना कैफ, ऐश्वर्या राय और करीना कपूर को भी पछाड़ दिया हो

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मल्लिका को बधाइयां

मल्लिका शेरावत एक तऱफ बिन बुलाए बाराती के आइटम सांग शालू के ठुमके में मुन्नी और शीला का मिक्स तड़का लगाकर लोगों को लुभा रही हैं तो दूसरी तऱफ डबल धमाल में डांस नंबर जलेबी बाई के ज़रिए नया जलवा दिखा रही हैं. इससे पहले वह कॉन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में पहली बार रेड कार्पेट पर क़दमताल करके सुपर सेलिब्रिटी की तरह सुर्ख़ियां बटोर चुकी हैं.

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रणवीर के ठुमके

आंखों में काजल और मुंह में पान भरे ऋषि कपूर की अमर अकबर एंथोनी वाली टपोरी छवि को उनके अभिनेता बेटे रणवीर कपूर ने फिर से पर्दे पर उतारा है. फिल्म चिल्लर पार्टी में रणवीर कपूर ने एक ऐसा ही आइटम सांग किया है. रणवीर को जब इस गीत को करने के लिए संपर्क किया गया तो उस समय उनके मन में इसे लेकर थोड़ा संदेह था, लेकिन बाद में इस आइटम सांग को उन्होंने स्वीकार कर लिया.

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पुरानी फिल्‍मों का रंगीन दौर

भारतीय सिनेमा आज इतनी तरक़्क़ी कर रहा है कि इसका डंका पूरी दुनिया में बज रहा है. यह सच है कि फिल्में समाज के हालात को मद्देनज़र रखकर ही बनाई जाती हैं. फिल्म निर्माता भी सरकार की तरह जनता की पसंद-नापसंद को ध्यान में रखकर ही फिल्में बनाते हैं.

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कहां खो गए संवाद

जो कुछ नहीं कर सकता, वह लॉ कर लेता है…, इस सवाल से सबकी फटती क्यों है?, लाइफ बड़ी कुत्ती चीज़ है…और इस दुनिया में कुत्तों का स़िर्फ एक ही जवाब है…कमीने.

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गाने आज कल

चंदन सा बदन चंचल चितवन, धीरे से तेरा यह मुस्काना…1968 में आई हिंदी फिल्म सरस्वती चंद्र का यह गाना आज भी कहीं सुनाई पड़ता है तो दिल में प्यार हिलोरें लेने लगता है. इसी तरह 1962 में आई फिल्म बीस साल बाद का गाना-कहीं दीप जले, कहीं दिल सुनकर विरह की आग में जल रहे प्रेमियों के जख्म अभी भी हरे हो उठते हैं.

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स्मृति शेष: गुलशन बावरा : मेरे देश की धरती सोना…

वर्ष 1973 में आई फिल्म जंजीर का वह दृश्य याद कीजिए, जिसमें एक जोशीला नौजवान पुलिस इंस्पेक्टर (अमिताभ बच्चन) सड़क हादसे में स्कूली बच्चों की मौत की गवाह एवं चाकू-छुरी में धार रखकर अपना जीवनयापन करने वाली लड़की (जया भादुड़ी) को अपने घर में शरण देता है.

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गीत चोरी का आरोप कितना सच

प्रख्यात गायक भूपेन हजारिका द्वारा गाई गई रचना- गंगा तुम बहती हो क्यों, उनकी मौलिक कृति नहीं है. उन्होंने संगीत रचना एवं गीत की भावनाएं अमेरिकी कलाकार की एक मशहूर रचना से कॉपी की थी. यह रहस्योघाट्‌न अमेरिका में रह रहे एक भारतीय मुकेश थामस ने पिछले दिनों दोनों संगीत प्रस्तुतियों के गहन अध्ययन के बाद किया है.

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