हम तो ख़ुद अपने हाथों बेइज़्ज़त हो गए

जी न्यूज़ नेटवर्क के दो संपादक पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिए गए. इस गिरफ्तारी को लेकर ज़ी न्यूज़ ने एक प्रेस कांफ्रेंस की. अगर वे प्रेस कांफ्रेंस न करते तो शायद ज़्यादा अच्छा रहता. इस प्रेस कांफ्रेंस के दो मुख्य बिंदु रहे. पहला यह कि जब अदालत में केस चल रहा है तो संपादकों को क्यों गिरफ्तार किया गया और दूसरा यह कि पुलिस ने धारा 385 क्यों लगाई, उसे 384 लगानी चाहिए थी. नवीन जिंदल देश के उन 500 लोगों में आते हैं, जिनके लिए सरकार, विपक्षी दल और पूरी संसद काम कर रही है.

Read more

पुस्‍तक अंशः मुन्‍नी मोबाइल- 6

गुजरात का मीडिया दो भागों में बंट गया था. एक दंगों के ग़ुनहगारों की पहचान कर रहा था, तो दूसरा दंगाइयों की हौसलाअफजाई करने में मशगूल था. मीडिया का यह हिस्सा आग में घी डालने का काम पूरी शिद्दत से कर रहा था. अफवाहें फैलाने में दंगाइयों से बड़ी भूमिका स्थानीय मीडिया की थी. गुजराती लोक समाचार और जनसंदेश में प्रतिस्पर्धा थी. यदि गुजराती लोक समाचार एक दिन यह छापता कि मुसलमानों ने छह हिंदू लड़कियों के वक्ष काट लिए, तो जन संदेश एक दर्ज़न हिंदू लड़कियों के साथ बलात्कार की ख़बर छाप देता था. हिंदू ब्रिगेड के मुखपत्र बन गए थे ये अख़बार. दंगा उनके व्यवसायिक हितों को बख़ूबी पूरा कर रहा था. इनकी प्रसार संख्या भी बढ़ रही थी. सरकार का भी इन्हें समर्थन प्राप्त था. इनकी ख़बरों की सत्यता पर सवालिया निशान लगाते हुए इन अख़बारों के ख़िला़फ दंतविहीन संस्था प्रेस काउंसिल में भी शिक़ायतें की गईं. लेकिन कुछ नहीं हुआ.

Read more