भूमि अधिग्रहण के लिए सरकार भले ही एक मज़बूत क़ानून बनाने की बात कर रही हो, लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है. यही वजह है कि देश की सभी राजनीतिक पार्टियां किसानों और मज़दूरों के हितों की अनदेखी करते हुए निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने में जुटी हैं. बात चाहे कांग्रेस शासित महाराष्ट्र की हो या फिर भाजपा शासित मध्य प्रदेश की, हालात कमोबेश एक जैसी ही हैं.
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अगर आप अपने गांव और शहर से सैकड़ों मील दूर हैं, तो इसकी संभावना न के बराबर है कि अख़बारों और न्यूज चैनलों पर आप अपने गृह जनपद की छोटी-बड़ी ख़बरें देख पाएं. भारत में इंटरनेट क्रांति आने के बाद यह सपना साकार होने लगा. लिहाज़ा सात समंदर पार रहने वाले लोग भी इंटरनेट पर वेबसाइटों और ब्लॉगों पर हर वह चीज़ पढ़ पाते हैं, जिसकी कल्पना कुछ साल पहले नहीं की जा सकती थी.
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अभी तक आपने महंगाई और भ्रष्टाचार पर ह़डताल होते देखी होगी, लेकिन ये कुछ अलग तरह की हड़ताल है. श्रीलंका में वन्य अभयारण्यों में तैनात पशु चिकित्सक हाथियों के पक्ष में हड़ताल पर चले गए हैं. श्रीलंका के पशु चिकित्सकों का कहना है कि सरकार जंगली हाथियों और लोगों के बीच संघर्ष को रोकने में नाकामयाब रही है. इसके विरोध में सभी 11 पशु चिकित्सक हड़ताल पर चले गए.
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स्वतंत्रता के बाद के भारत में शायद ही कोई ऐसा साल गुजरा हो, जो पूरी तरह से दंगामुक्त रहा हो. कुछ साल तो सांप्रदायिक दंगों की भयावहता और व्यापकता के लिए हमेशा याद किए जाएंगे. इनमें शामिल हैं 1992-93 (बाबरी विध्वंस के बाद हुए दंगे), 2002 (गुजरात) और 2008 (कंधमाल में ईसाई विरोधी हिंसा).
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हर दिन एक न एक नया घोटाला आम जनता के सामने उजागर हो रहा है. अ़फसोस की बात यह है कि यह सब ऐसे प्रधानमंत्री के शासनकाल में हो रहा है, जो स्वयं ईमानदार एवं सज्जन पुरुष हैं. जिस तरह हर दिन एक के बाद एक घोटाले सामने आ रहे हैं, सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टाचार की असलियत सामने आ रही है, मन में एक सवाल उठता है कि अगर आज गांधी ज़िंदा होते तो क्या करते. शायद सत्याग्रह या फिर भूख हड़ताल के बजाय शर्म से आत्महत्या करने के अलावा उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता.
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जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
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