Spending 32 Rupees is above BPL – Planning Commission
Tags: BJP, BPL Card, Dr. Manmohan Singh, GDP, Indian Economy, Montek Singh Ahluwalia, Planning Commission of India, Supreme Court, UPA, Yojna Ayog, high court Posted in Internet Tv Archives, जरुर देखें by Author: India's First Internet TV | No Comments » | Read More... |
Anna’s Fast: Venue Does Matter
Tags: Afzal Guru, Anna Hazare, BJP, Congress, J.P. Ground, Jan Lokpal Bill, Jantar - Mantar, NDA, Ramleela Ground, Supreme Court, UPA Posted in Internet Tv Archives, जरुर देखें by Author: India's First Internet TV | 4 Comments » | Read More... |
सार्वजनिक विकास के नाम पर किसानों की ज़मीन हथियाने के सरकारी मंसूबों पर पानी फिरता नज़र आ रहा है. इलाहबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से ग्रेटर नोएडा के किसानों की ज़मीन के बारे में जो फैसले आए हैं, वे इंसाफ़ के इतिहास में मील का पत्थर साबित होने की ताक़त रखते हैं.
Tags: Corruption, Greater Noida, Land, Supreme Court, acquisition, builder, decided, development, farmers, government, high court, legal, opposition, political, अधिग्रहण, किसान, ग्रेटर नोएडा, न्याय, फैसला, बिल्डर, भ्रष्टाचार, राजनीतिक, विकास, विरोध, सरकार, सुप्रीम कोर्ट, हाइकोर्ट, ज़मीन Posted in आर्थिक, कवर स्टोरी-2, कानून और व्यवस्था, राजनीति, राज्य, विधि-न्याय, समाज by Author: शेष नारायण सिंह | No Comments » | Read More... |
Interval (29-07-2011)
Tags: Ayesha Takia, Bollywood, Budha Hoga Tera Baap, Charmy Kaur, Dor, Film, I am kalam, Interval, Kashmash, Khap, Nagesh Kukunoor, Naukaduvi, Raima Sen, Riya Sen, Subhash Ghai, Supreme Court Posted in Internet Tv Archives, जरुर देखें by Author: India's First Internet TV | No Comments » | Read More... |
Corruption : Do Took
Tags: CAG, Corruption, SIT, Supreme Court, corrupt, government, मीडिया Posted in Internet Tv Archives, जरुर देखें by Author: India's First Internet TV | 1 Comment » | Read More... |
वर्तमान हालात में जन सरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता का स्वरूप क्या हो सकता है? इसकी एक मिसाल चौथी दुनिया की उन रिपोर्टों में देखने को मिलती है, जो देश भर में चल रही जल, जंगल और ज़मीन की लड़ाई से संबंधित हैं. दरअसल, पिछले दो सालों के दौरान लिखी गईं उक्त रिपोट्र्स आने वाले समय में समस्याओं की चेतावनी दे रही थीं.
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अपने साथियों पर लिखना या टिप्पणी करना बहुत दु:खदायी होता है, क्योंकि हम इससे एक ऐसी परंपरा को जन्म देते हैं कि लोग आपके ऊपर भी लिखें. आप उन्हें आमंत्रित करते हैं. मैं यही करने जा रहा हूं. मैं अपने साथियों को आमंत्रित करने जा रहा हूं कि हमारे ऊपर जहां उन्हें कुछ ग़लत दिखाई दे, वे लिखें.
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इस विषय के बारे में लिखने में एक अलग रोमांच है, इसलिए मैं बहुत सी ऐसी बातें यहां लिख सकता हूं, जो कि मैं उच्चतम न्यायालय में जजों के सामने बहस करते समय नहीं बोल सकता. जब बात होती है कि भारतीय न्यायपालिका के साथ क्या परेशानियां हैं तो हमें जवाब में हां या न कहना पड़ता है, लेकिन मेरा जवाब हां भी है और न भी. मैं उच्चतम न्यायालय में वर्ष 1979 से हूं.
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भारत की राजनीति में संभवत: सुप्रीम कोर्ट के दख़ल से कई आश्चर्यजनक चीज़ें हो रही हैं. पहले ए राजा का जेल जाना, बाद में सुरेश कलमाडी का और फिर कनिमोझी की जेलयात्रा संकेत देती है कि कई और लोग भी इस राह के संभावित राही हैं. पर यह क्यों सुप्रीम कोर्ट के दख़ल के बाद हो रहा है?
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चौहत्तर में लिखी लाइनें, जिन्हें बुंदेलखंड के जनकवि राम गोपाल दीक्षित ने लिखा था, कौन चलेगा आज देश से भ्रष्टाचार मिटाने को, बर्बरता से लोहा लेने सत्ता से टकराने को, आज देख लें कौन रचाता मौत के संग सगाई है, उठो जवानों तुम्हें जगाने क्रांति द्वार पर आई है, याद आती हैं. संयोग है कि उन दिनों सत्ता में इंदिरा गांधी थीं और उनके ख़िला़फ छात्र आंदोलन चल रहा था, जिसका मुख्य मुद्दा भ्रष्टाचार था. छात्र युवा उठ खड़े हुए, इंदिरा जी चुनाव हार गईं, लेकिन जो सत्ता में आए, न उसे संभाल सके और न जनता की आशाएं पूरा कर सके.
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हर दिन एक न एक नया घोटाला आम जनता के सामने उजागर हो रहा है. अ़फसोस की बात यह है कि यह सब ऐसे प्रधानमंत्री के शासनकाल में हो रहा है, जो स्वयं ईमानदार एवं सज्जन पुरुष हैं. जिस तरह हर दिन एक के बाद एक घोटाले सामने आ रहे हैं, सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टाचार की असलियत सामने आ रही है, मन में एक सवाल उठता है कि अगर आज गांधी ज़िंदा होते तो क्या करते. शायद सत्याग्रह या फिर भूख हड़ताल के बजाय शर्म से आत्महत्या करने के अलावा उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता.
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आदर्श घोटाला. सुनकर अच्छा नहीं लगता. क्या कोई घोटाला भी आदर्श हो सकता है? लेकिन सेना के अधिकारियों, नेताओं एवं नौकरशाहों की मिलीभगत और रक्षा मंत्री की चुप्पी से जन्मा आदर्श नामधारी एक हाउसिंग सोसाइटी का घोटाला राजनीति में एक नया आदर्श स्थापित कर रहा है. वह आदर्श है, तब तक चुप रहो, जब तक मीडिया या अदालत अपना डंडा न चला दे. पुरानी कहावत है. एक चुप, सौ सुख. लेकिन कभी-कभी यह चुप्पी महंगी भी पड़ जाती है. इसी का एक नमूना 2-जी स्पेक्ट्रम में देखने को मिला.
Tags: AK Antony, Ideally, Prime Minister, Scandal, Supreme Court, the Defence Minister, to - G spectrum, आदर्श, ए के एंटनी, घोटाला, टू-जी स्पेक्ट्रम, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, सुप्रीमकोर्ट Posted in कवर स्टोरी-2, कानून और व्यवस्था, मीडिया, राजनीति by Author: शशि शेखर | No Comments » | Read More... |
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व्यवस्था संविधान को धोखा देकर बनी है |
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