रोहिंग्या मुसलमान : र्नेंरत की राजनीति के शिकार हैं

रोहिंग्या के खिर्लों चल रहे सुनियोजित दंगों की वजह से विश्व में न केवल म्यांमार की छवि धूमिल हुई है,

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अमेरिकी रक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा : युद्ध के मैदान में वापसी का संकेत

अमेरिका के रक्षा मंत्री चक हेगल ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया. इसके बाद माहौल कुछ ऐसा बनाया गया

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आफिया सिद्दीकी : दुनिया की मोस्ट-वांटेड महिला

तालिबान उसके बदले बर्गडहल को अमेरिका के हवाले करने को तैयार है. इस्लामिक स्टेट उसके बदले फोली को रिहा करने

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समाज का दर्पण है ‘प्रिय कहानियां’

जाने-माने कवि, कथाकार व उपन्यासकार डॉ. लालजी प्रसाद सिंह की कहानियों का संग्रह प्रकाशित हुआ है. ‘प्रिय कहानियां’ शीर्षक वाले

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शिकागो सम्मेलन और अफ़ग़ान मुद्दा

वर्ष 2014 तक अ़फग़ानिस्तान से नाटो सेना की वापसी हो जाएगी, लेकिन इसके बाद भी नाटो अ़फग़ानिस्तान को सहायता देता रहेगा, ताकि वहां लोकतंत्र मज़बूत हो सके और तालिबान का शासन फिर से स्थापित न हो पाए. हाल में अमेरिकी शहर शिकागो में हुई नाटो की बैठक का मुख्य मुद्दा अ़फग़ानिस्तान से नाटो सेना की वापसी ही रहा.

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अफगानिस्‍तानः रणनीति पर पुनर्विचार की जरूरत है

अफग़ानिस्तान में तालिबान का असर कम होता नहीं दिखाई पड़ रहा है. यहां छिटपुट हमले तो होते ही रहते हैं, लेकिन इस बीच एक बड़ा हमला हुआ, जो अ़फग़ानिस्तान की वर्तमान स्थिति और इसके भविष्य के बारे में पुनर्विचार करने को मजबूर कर देता है. यह हमला पिछले कई हमलों से अलग दिखाई पड़ता है. पहले के हमले किसी दूतावास या किसी विशेष जगह पर बम विस्फोट के ज़रिये किए जाते रहे हैं.

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अब भारत में तालिबानी फरमान

ऐसा लगता है कि आजकल इस्लाम को बदनाम करने का ठेका स़िर्फ मुसलमानों ने ले रखा है. न स़िर्फ दुनिया के तमाम देशों, बल्कि भारत से भी अक्सर ऐसे समाचार मिलते रहते हैं, जिनसे इस्लाम बदनाम होता है और मुसलमानों का सिर नीचा होता है.

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आतंकवाद के खिलाफ जंगः रणनीति में खामी

आतंकवाद के खिला़फ चल रही जंग की रणनीति में कुछ ऐसी आधारभूत खामियां हैं कि इस जंग में जीत हासिल करने का भी शायद ही कोई फायदा हो. युद्ध की रणनीति बनाते समय अमेरिका और पाकिस्तान इस तथ्य को नज़रअंदाज़ कर गए कि यह एक बहुआयामी लड़ाई है.

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गोरखा राजनीति का एक तालिबानी चेहरा

उनका यक़ीन है कि वे मुझे चुप करा सकते हैं, मगर यहां तक कि अगर कल मैं मर जाता हूं तो कब्र से भी आवाज़ दूंगा. मुझे जिस विचार पर विश्वास है, उसका त्याग मैं इतनी आसानी से नहीं करूंगा. मैं पूरी ताक़त से आवाज़ दूंगा, जगो जगो! केवल तुम्हीं हो, जिसमें एक बेहतर गोरखालैंड बनाने की ताक़त है.

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हमने इतिहास से कुछ नहीं सीखा

एक राष्ट्र के रूप में आज हम जिन समस्याओं से रूबरू हैं, वह बेवजह नहीं है. आतंकवाद, बढ़ती बेरोज़गारी, ग़रीबी, शिक्षा का अभाव, संस्थाओं के बीच टकराव और सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने के लिए मची होड़ आदि सारी समस्याओं की जड़ में दशकों का कुशासन और देश के प्रति हमारी प्रतिबद्धता में कमी है.

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पेशावर में इस्लाम का क़त्लेआम हुआ

पाकिस्तान के पेशावर प्रांत में दो सिख युवकों को खुलेआम क़त्ल किए जाने की खबर मार्मिक भले हो, लेकिन आश्चर्यजनक कतई नहीं है. हिंसा और घृणा की खुराक़ पर पले-बढ़े तालिबान से भला हम और उम्मीद भी क्या कर सकते हैं. लेकिन इतना ज़रूर है कि इस घटना के बाद पाकिस्तानी सरकारी तंत्र के तालिबान के खतरे को नियंत्रित कर लेने संबंधी दावों की असलियत उजागर हो गई है.

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पाकिस्‍तान का जिन्‍ना कहीं खो गया है

कुछ दिनों पहले मुझे अर्देशिर कोवासजी का एक आलेख ब्रिंग बैक जिन्नाज पाकिस्तान पढ़ने का मौक़ा मिला, जिसमें उन्होंने राष्ट्र के प्रति जिन्ना के उदारवादी विचारों की चर्चा की थी. कोवासजी का यह दावा है कि यदि पाकिस्तान जिन्ना के बताए रास्ते पर चलता तो देश की सामाजिक दशा मौजूदा हालात से कहीं अलग होती. लेकिन मैं उन्हें बताना चाहूंगी कि जिन्ना के पाकिस्तान की तलाश करते-करते कहीं हम पाकिस्तान के जिन्ना को ही न खो दें.

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क्‍या तालिबान आतंकवाद को बेच देगा?

तालिबान को खदेड़ने के लिए अमेरिका ने आठ साल पहले अ़फग़ानिस्तान में क़दम रखा. एक हफ़्ते पहले लंदन में तालिबानियों का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया कि वे आगे आकर सत्ता में भागीदारी करें. इससे भी अहम बात यह है कि तालिबानियों को ऐसा करने के लिए 1.5 बिलियन डॉलर की पेशकश की गई.

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अफ़ग़ानिस्तान, तालिबान और अमेरिका

इससे ज़्यादा स्पष्ट और कुछ नहीं हो सकता है कि अ़फग़ानिस्तान में मौजूद विदेशी सेनाओं के अपने-अपने हितों और परिस्थितियों के बीच एक चौड़ी खाई है. हालांकि अमेरिकी अधिकारी कह चुके हैं कि अ़फग़ानिस्तान से सेना को हटाने के बारे में ओबामा प्रशासन द्वारा अंतिम निर्णय लिया जाना अभी बाक़ी है.

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सातवां एनएफसी अवार्ड और पाकिस्तान

पाकिस्तान में उग्र तालिबान की आतंकवादी वारदातों की अंतहीन दास्तां हर रोज़ की ख़बरों में होती है. यहां धमाकों और मौत की कहानी भी आम हो चुकी है. इन ख़बरों के बीच समाज के ग़रीब और आम लोगों के लिए लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था एक छोटी सी राहत लेकर आई है.

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केजीबी का ऑपरेशन स्टॉर्म यानी एक राष्ट्रपति की हत्या

खुफिया दुनिया में जासूसों का अपनी पहचान बदलना कोई नई बात नहीं है. बहुरुपिए के तौर पर इन जासूसों ने कई ख़तरनाक और अहम मिशन को अंजाम दिया है. यही कहानी केजीबी के जासूस मितालियन टेलिबोव की है.

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नई अ़फग़ान—पाक नीति ख़तरनाक क़दम

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा अपनी अ़फग़ानिस्तान-पाकिस्तान (अ़फग़ान-पाक) नीति में पूरी तरह से विफल हो चुके हैं. इसी साल मार्च में ज़ोर-शोर से लाई गई अ़फगान-पाक नीति कारगर साबित नहीं हुई. लिहाजा, आठ साल से अ़फग़ानिस्तान में आतंकवाद के खिला़फ लड़ रही अमेरिकी सेना को बाहर निकालने के लिए ओबामा प्रशासन ने नई रणनीति की घोषणा की है. इसमें दो बातें सबसे अहम हैं. पहली, वह अमेरिकी सैनिकों की वापसी की बात कर रहे हैं और दूसरी यह कि 30 हज़ार अमेरिकी सैनिकों को अ़फग़ानिस्तान भेजने के साथ हज़ारों विदेशी सैनिकों को अ़फग़ानिस्तान में उतारने की तैयारी में लगे हैं.

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