जीएसटी के एक साल, सरकार के खाते में आया हर महीने औसतन 91 हजार करोड़

एक जुलाई 2017 को लागू हुए गुड्स एंड सर्विस टैक्स यानि जीएसटी ने अपने एक साल पूरे कर लिए. पिछले

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1 अप्रैल से महंगे हो जाएंगे ये इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स, आज ही खरीद लें

कल से यानी 1 अप्रैल से नया वित्तीय वर्ष शुरू हो जाएगा, ऐसे में इस नए वित्तीय वर्ष पर टैक्स

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जल्दी फाइल करें RTI कहीं निकल न जाए लास्ट डेट, इन बातों का रखें ध्यान

नई दिल्ली, (राज लक्ष्मी मल्ल) : इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना रह गया हैं तो जल्द से जल्द भरने की

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जानिये कैसे काम करता है GST और कैसे लोगों को मिलेगा फायदा

नई दिल्ली : गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) एक अप्रत्यक्ष कर है. जीएसटी के तहत वस्तुओं और सेवाओं पर एक

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बजट : स्वास्थ्य सेवाओं को सेवाकर में छूट मिले

स्वास्थ सेवायें  महंगी  होने  के कारण इसका लाभ सभी को नहीं मिल पाता, ऐसे में ज़रूरी है कि सरकार  बजट

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जेटली ने कहा, 16 सितंबर 2017 से बदल जाएगी मौजूदा टैक्स की व्यवस्था

मौजूदा टैक्स व्यवस्था का प्रारुप अगले साल 16 सिंतबर से पूरी तरह बदल जाएगा. ये बातें वित्त मंत्री अरुण जेटली

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सरकार जवाब दे यह देश किसका है

हाल में देश में हुए बदलावों ने एक आधारभूत सवाल पूछने के लिए मजबूर कर दिया है. सवाल है कि आखिर यह देश किसका है? सरकार द्वारा देश के लिए बनाई गई आर्थिक नीतियां और राजनीतिक वातावरण समाज के किस वर्ग के लोगों के फायदे के लिए होनी चाहिए? लाजिमी जवाब होगा कि सरकार को हर वर्ग का ख्याल रखना चाहिए. आज भी देश के साठ प्रतिशत लोग खेती पर निर्भर हैं. मुख्य रूप से सरकारी और निजी क्षेत्र में काम कर रहा संगठित मज़दूर वर्ग भी महत्वपूर्ण है.

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असफल वित्त मंत्री सक्रिय राष्‍ट्रपति

वर्ष 2008 में ग्लोबल इकोनॉमी स्लो डाउन (वैश्विक मंदी) आया. उस समय वित्त मंत्री पी चिदंबरम थे. हिंदुस्तान में सेंसेक्स टूट गया था, लेकिन आम भावना यह थी कि इस मंदी का हिंदुस्तान में कोई असर नहीं होने वाला है. उन दिनों टाटा वग़ैरह का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा था और एक धारणा यह बनी कि भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व की अर्थव्यवस्था की ज़रूरत नहीं है.

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उत्तर प्रदेश : नई औधोगिक नीति से बनेगी नई तस्वीर

हाल के कुछ वर्षों में राज्य में औद्योगिक विकास की गति पूरी तरह अवरुद्ध हो गई है. मायावती के शासनकाल में न तो कोई नया उद्योग लगा और न चालू उद्योगों को पनपने का कोई मौका दिया गया. अखिलेश सरकार के सामने औद्योगिक विकास एक बड़ी चुनौती है. इसके लिए वह चिंतित भी हैं. उनकी यह चिंता विधानसभा सत्र के दौरान सा़फ-सा़फ दिखाई पड़ रही थी.

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कम आय वालों का उत्तरदायित्व

नगरपालिकाओं द्वारा वसूल किए गए हाउस टैक्स आदि का भी कुछ न कुछ भाग पूंजीवादियों के खजानों में चला ही जाता है. नगरपालिका कई स्कूल चलाती है, कई हॉस्पिटल चलाती है, सड़कें बनवाती है, सार्वजनिक बागों का रखरखाव करती है.

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गरीबों के आनंद की कीमत धुंआ–धुंआ

अगर सब कुछ ठीकठाक रहा, सरकार किसी दबाव में नहीं आई तो अगले महीने यानी अगस्त में बीड़ी के खिला़फ बहुत प्रभावी विज्ञापन अभियान शुरू हो जाएगा. अंदऱखाने इसकी तैयारी पूरी हो चुकी है. बस हरी झंडी मिलते ही सभी चैनलों, सिनेमाघरों और अ़खबारों में सरकारी विज्ञापन दिखाई देने लगेगा. अभी तक सिर्फ सिगरेट को लेकर विज्ञापन दिखाए जा रहे हैं, जो का़फी हद तक प्रभावी रहे हैं.

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अफसरों ने सरकार को 2342 करोड़ रुपयों का चूना लगाया

जिन अफसरों और कर्मचारियों पर सरकारी करों और सेवाओं के शुल्क की वसूली का दायित्व है, वे किस लापरवाही और ग़ैर ज़िम्मेदारी से काम करते हैं, इसका खुलासा भारत के नियंत्रक- महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट में किया गया है.

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बाबुओं ने किया कायापलट

राजधानी दिल्ली से सटे गाजियाबाद के म्यूनिसिपल अधिकारियों ने, ऐसा लगता है, एक बड़ी पुरानी पहेली का हल ढूंढ लिया है. लंबे समय से लोग यह जानने की कोशिश कर रहे थे कि सरकारी अधिकारियों से काम कराया जाए तो कैसे, लेकिन गाजियाबाद नगर प्रशासन ने इसमें कामयाबी हासिल कर ली है.

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