आतंकवादियों को सबक सिखाने के मामले में इजरायली सेना का नहीं है कोई जवाब

हमारे देश में आतंकवाद एक बड़ा मुद्दा है. आए दिन भारतीय सेना के जवान आतंकवादियों के हाथ शहीद होते रहते

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यूएन में फिर गुंजी भारत की आवाज, कश्मीर हमारा हिस्सा

नई दिल्ली। कश्मीर को लेकर भारत अपना स्टैंड कई बार क्लियर कर चुका है। भारत ने कई जगहों पर साफ

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ट्रंप ने की प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत, अमेरिका आने के लिए किया आमंत्रित

नई दिल्ली, (विनीत सिंह) : अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की

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भारत-इजराइल ड्रोन सौदा सीमा पार आतंक का होगा खात्मा

भारत सबसे ज्यादा सीमा पार की आतंकी गतिविधियों से परेशान है. कभी पाकिस्तान, तो कभी चीन तो कभी बांग्लादेश और

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भारत-अमेरिका कि नई पहल : आतंकी संगठनों की आर्थिक नाकाबंदी

भारत और अमेरिका ने आतंकियों के आर्थिक नेटवर्क को तो़डने के लिए एक नई पहल की है. हालांकि अमेरिका पाकिस्तान

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अफगानिस्‍तानः रणनीति पर पुनर्विचार की जरूरत है

अफग़ानिस्तान में तालिबान का असर कम होता नहीं दिखाई पड़ रहा है. यहां छिटपुट हमले तो होते ही रहते हैं, लेकिन इस बीच एक बड़ा हमला हुआ, जो अ़फग़ानिस्तान की वर्तमान स्थिति और इसके भविष्य के बारे में पुनर्विचार करने को मजबूर कर देता है. यह हमला पिछले कई हमलों से अलग दिखाई पड़ता है. पहले के हमले किसी दूतावास या किसी विशेष जगह पर बम विस्फोट के ज़रिये किए जाते रहे हैं.

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एनसीटीसी : इस जल्दबाज़ी की वजह क्या है

एनसीटीसी के गठन के पीछे क्या वाकई देश की सुरक्षा की चिंता है या फिर यह कांग्रेस की विपक्षी पार्टियों और नेताओं, ख़ासकर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी एवं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर शिकंजा कसने की कोई सियासत? आख़िर कांग्रेस और उसके मंत्री एनसीटीसी यानी आतंकवाद निरोधी ख़ु़फिया केंद्र को लेकर इतनी हड़बड़ी में क्यों हैं?

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सॉफ्ट स्टेट कभी सुपर पावर नहीं बन सकता

कुछ दिनों पहले दिल्ली में इज़रायली राजनयिक की कार पर बम से हमला किया गया. इसे भारत में आतंकवादी कार्रवाई की एक नई घटना माना जा सकता है. इस हमले में एक विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया गया था और हमलावर भी पेशेवर थे. यह हमला प्रधानमंत्री आवास के नज़दीक किया गया. हमले से संबंधित प्रारंभिक जानकारी सीसीटीवी कैमरे में की गई रिकॉर्डिंग के आधार पर प्राप्त हुई.

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विवाद में फंसी पाकिस्तान सरकार

पाकिस्तान और विवाद का चोली दामन का रिश्ता है. कभी उसे आतंकवाद को समर्थन देने के आरोपों का सामना करना पड़ता है, तो कभी सेना और सरकार के बीच के तनाव के कारण लोकतंत्र ही खतरे में पड़ता मालूम होता है. मेमोगेट का मामला अभी चल ही रहा है कि सरकार को एक अन्य मामले का सामना करना पड़ गया है.

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सिर्फ़ उत्तर प्रदेश में नहीं हो रहे चुनाव

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन ताज्जुब की बात है कि मीडिया में सबसे ज़्यादा ख़बरें स़िर्फ उत्तर प्रदेश से ही आ रही हैं. मानों मणिपुर या गोवा देश के लोगों के लिए महत्वपूर्ण नहीं है.

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मणिपुर: कांग्रेस की राह आसान नहीं

देश में गठबंधन की राजनीति और राजनीतिक दलों का एक साथ मिलकर चुनाव लड़ना कोई नई बात नहीं है, लेकिन 60 सदस्यीय विधानसभा वाले मणिपुर में, जहां आगामी 28 जनवरी को मतदान होना है, गठबंधन का ऐसा खेल खेला जा रहा है, जो आपको हैरत में डाल सकता है.

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भारत-मालदीव : बेहतर संबंध बनाने की क़वायद

हिन्द महासागर में अपनी स्थिति मज़बूत करने और दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए भारत के लिए यह ज़रूरी है कि वह अपने पड़ोसियों को विश्वास में ले. मालदीव के साथ हाल में हुआ समझौता इसी दिशा में उठाया गया एक अच्छा क़दम माना जा सकता है.

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आतंकवाद से लड़ने वाली सबसे बड़ी एजेंसी : एन आई ए का सच

गृहमंत्री पी चिदंबरम ने नॉर्थ ब्लॉक में बैठे बाबुओं और नौकरशाहों को ज़रिया बनाकर देश की आंतरिक सुरक्षा को भी सियासत का खेल बना दिया है. आप इसकी त्रासद बानगी देखना चाहें तो एनआईए यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी पर नज़र डालें.

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कमल मोरारका का ब्लॉग : पुलिस तंत्र मे सुधार समय की मांग है

दिल्ली हाईकोर्ट के निकट हुए बम विस्फोट ने एक बार फिर से एक बड़े खतरे के तौर पर आतंकवाद की ओर लोगों का ध्यान खींचा है. इसी तरह के बम विस्फोट मुंबई, पुणे एवं जयपुर आदि शहरों में भी हुए थे. लेकिन 9/11 के बाद अमेरिका में कोई बड़ा बम धमाका नहीं हुआ और न 2005 के विस्फोट के बाद ब्रिटेन में ही ऐसी कोई घटना घटी.

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पूरे तंत्र को सुधारने की ज़रूरत है

बार-बार कहने के बावजूद सरकार के कानों पर जूं नहीं रेंग रही है. सरकार से मतलब सिर्फ मंत्री नहीं, बल्कि सरकार से मतलब पूरा सिस्टम, दारोगा से लेकर गृह सचिव तक. ये सब नशे की गोली खाकर सो रहे हैं और देश हर दूसरे-तीसरे महीने खतरे का सामना कर रहा है. दिल्ली हाईकोर्ट में तीन महीने के भीतर हुआ दूसरा बम धमाका हमारे सिस्टम के खोखलेपन और सबसे अंत में प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री के नकारेपन को चीख-चीखकर बयान कर रहा है.

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सरकार चुप क्यों है

26 नवंबर, 2008 की त्रासदी को मुंबई के लोग अभी भूल भी नहीं पाए थे कि 13 जुलाई, 2011 को फिर से दिल दहला देने वाली घटना घट गई. महाराष्ट्र में कांग्रेस की सरकार है, इसलिए कौन वहां की क़ानून व्यवस्था की स्थिति की आलोचना कर सकता है. बिना किसी सरकारी सहायता के मुंबई वालों को इस विपत्ति से उबरने में अपनी चिरपरिचित योग्यता का परिचय देना पड़ेगा.

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पाकिस्तान : सामंतवादी तंत्र की हकीकत

फ्यूडलिज्म या सामंतवादी तंत्र एक सोच का नाम है. एक ऐसे व्यक्ति की सोच, जो दूसरों को अपने मुक़ाबले तुच्छ मानता हो और उनका हक़ छीनना जायज़ समझता हो. ऐसी नकारात्मक सोच और चिंता रखने वाले वर्ग सामंतवादी तंत्र को जन्म देते हैं. यह तंत्र अमीरों को कमज़ोरों के शोषण का गुण सिखाता है, नाजायज़ तरीक़े से दौलत जमा करता है, ग़रीब को और ग़रीब बनाता है, अमीर को और अमीर बनाता है.

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जम्‍मू-कश्‍मीरः पंचायत चुनाव ने उम्‍मीद जगाई

हाल में जम्मू-कश्मीर में संपन्न हुए पंचायत चुनाव से राज्य में एक नई बयार देखने को मिली. बड़ी तादाद में घरों से निकल कर लोगों ने मतदान करके न स़िर्फ लोकतंत्र में अपनी आस्था व्यक्त की, बल्कि चुनाव बहिष्कार करने वालों को स्पष्ट संकेत भी दे दिया.

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इलियास का इफेक्‍ट

पहले अल क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन, फिर उसके सक्रिय सदस्य इलियास कश्मीरी का मारा जाना और अब पाकिस्तान में धड़ाधड़ हो रहे बम धमाकों ने सबको सकते में डाल दिया है. पता नहीं पाकिस्तान को अब भी इस बात का एहसास है या नहीं कि उसने जो वर्षों पहले भारत विरोधी आतंकवाद की फसलें बोई थीं, अब वही फलफूल रही हैं.

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असमः अब उग्रवाद नहीं अंधविश्वास हावी

असम में अब उग्रवाद से कहीं ज़्यादा हत्याएं अंधविश्वास से हो रही हैं. राज्य की कांग्रेस सरकार स्वास्थ्य सेवा में आमूलचूल परिवर्तन का दावा करती है, पर हक़ीक़त इससे कोसों दूर है. गांवों में आज भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं. इसलिए लोग कविराज की झाड़-फूंक का सहारा लेते हैं.

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आतंक का चक्रव्यूह

दो मई की सुबह दुनिया के सबसे खूंखार आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में मार गिराए जाने के बाद यह बात साफ हो गई कि पाकिस्तान में आतंकियों को लंबे समय से पनाह मिल रही है. लादेन की मौत के साथ ही आतंक का पाकिस्तान कनेक्शन एक बार फिर दुनिया के सामने उजागर हो गया. यह भी साफ हो गया कि लादेन एबटाबाद में पिछले पांच सालों से सिर छुपाकर रह रहा था और पाकिस्तान दुनिया के सामने आतंक के ख़िला़फ बयानबाज़ी कर रहा था.

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यूरोपीय शीष्टमंडल और हुर्रियत की लादेनपरस्ती

हुर्रियत कांफ्रेंस की लादेनपरस्ती ने उसे एक बार फिर कठघरे में खड़ा किया है. कश्मीर यात्रा पर आए यूरोपीय संघ के शिष्टमंडल की गतिविधियों से तो यही लगता है. यूरोपीय संघ के राजनयिकों द्वारा हुर्रियत कांफ्रेंस के नेता सैयद अली शाह गिलानी से मिलने से मना करना कई अर्थों को जन्म दे रहा है. कहा जा रहा है कि अलक़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के नमाज़े जनाज़ा के आयोजन से नाराज़ होकर यूरोपीय राजनयिकों ने यह क़दम उठाया.

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अफगानिस्‍तानः एशिया में भारत की कुंजी

ओसामा के मारे जाने के बाद भारतीय उपमहाद्वीप की राजनीति में कई महत्वपूर्ण मोड़ आए हैं. वैसे ओसामा का मारा जाना ही ख़ुद में कोई ऐसी बड़ी अकेली घटना नहीं है, जिससे ये बदलाव आए हैं. असल मुद्दे इस बात पर टिके हैं कि ओसामा मारा कहां गया. ओसामा मारा गया पाकिस्तान के बहुत भीतर एबटाबाद में, जहां से कुछ दूर पर ही पाकिस्तान की सैन्य अकादमी है, जो इस्लामाबाद से केवल कुछ मीलों की दूरी पर स्थित है.

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