प्रेसीडेंट बुश के ऊपर जूता क्या चला, सारी दुनिया में जूतों की बहार आ गई. हमारे देश में भी यह दूसरा या तीसरा वाक़िया है, जब राजनेताओं के ऊपर हमले हुए. जनार्दन द्विवेदी पर जूता फेंका गया और अब शरद पवार को एक शख्स ने थप्पड़ मारा. ये घटनाएं दो तरह के संकेत देती हैं. पहला संकेत यह है कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों से नौजवानों का भरोसा उठ रहा है. उन्हें यह लगता है कि धरना-प्रदर्शन, भूख हड़ताल, सिविल ना़फरमानी, ये शब्द बेमानी हो गए हैं और इनके ऊपर अमल करने से कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है.
Tags: Anna Hazare, Fast, Sharad Pawar, attack, movements, political, politics, the, अनशन, अन्ना हजारे, आंदोलन, राजनीति, राजनीतिक, शरद पवार, सरकार, हमला Posted in आंदोलन, कानून और व्यवस्था, जब तोप मुकाबिल हो, मीडिया, राजनीति, विधि-न्याय, संपादकीय, समाज by Author: संतोष भारतीय | No Comments » | Read More... |
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जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
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