सीएजी, संसद और सरकार

आज़ादी के बाद से, सिवाय 1975 में लगाए गए आपातकाल के, भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाएं और संविधान कभी भी इतनी तनाव भरी स्थिति में नहीं रही हैं. श्रीमती इंदिरा गांधी ने संविधान के प्रावधान का इस्तेमाल वह सब काम करने के लिए किया, जो सा़फ तौर पर अनुचित था और अस्वीकार्य था. फिर भी वह इतनी सशक्त थीं कि आगे उन्होंने आने वाले सभी हालात का सामना किया. चुनाव की घोषणा की और फिर उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

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बिगड़े रिश्‍ते, बिगड़ी अर्थव्‍यवस्‍था

अब प्रणब मुखर्जी के दूसरे मंत्रियों और प्रधानमंत्री से रिश्ते की बात करें. वित्त मंत्री माना जाता है कि आम तौर पर कैबिनेट में दूसरे नंबर की पोजीशन रखता है. वित्त मंत्रालय इन दिनों मुख्य मंत्रालय (की मिनिस्ट्री) हो गया है, क्योंकि हर पहलू का महत्वपूर्ण पहलू वित्त होता है, इसलिए बिना वित्त के क्लीयरेंस के कोई भी फैसला हो ही नहीं सकता.

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प्रधानमंत्री का मणिपुर दौरा : जनता के ज़ख़्मों पर विकास का मरहम

बीते एक अगस्त से मणिपुर के दोनों राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच-39 एवं 53) पर यूनाइटेड नगा काउंसिल (यूएनसी) ने आर्थिक नाकेबंदी कर रखी थी. इस 100 दिनों की बंदी ने यहां के जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया. हर वस्तु के दाम आसमान छूने लगे.

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एक कदम ही सही आगे तो बढ़े हम

वाशिंगटन में परमाणु शिखर सम्मेलन के ठीक बाद 16वें सार्क सम्मेलन के दौरान भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों की मुलाक़ात की संभावना बनी तो यह उम्मीद ज़ोर पकड़ने लगी थी कि इसका कुछ न कुछ अच्छा परिणाम निकलेगा.

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महेश्‍वर नर्मदा जल परियोजनाः केंद्र और राज्‍य आमने-सामने

महेश्वर नर्मदा जल परियोजना को लेकर केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार में तनातनी चल रही है. प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने परियोजना से प्रभावित लोगों के पुनर्वास को लेकर इस पर आगे काम बंद करने के निर्देश दिए तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भड़क उठे. उन्होंने प्रधानमंत्री को मध्य प्रदेश के विकास के प्रति अनुदार और संवेदनहीन बताया. लेकिन, सच्चाई मुख्यमंत्री को भी मालूम है.

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देश की केंद्रस्थली करौंदी उपेक्षा की शिकार

मध्य प्रदेश का एक छोटा सा गांव करौंदी, देश की भौगोलिक सीमाओं के केंद्र बिन्दु में स्थापित है. यह गांव डॉ. राममनोहर लोहिया, आध्यात्मिक गुरु महर्षि महेश योगी और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के विचारों और आन्दोलनों का मुख्य प्रेरणास्त्रोत बना रहा है.

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सीहोर : घर की सुध तो ले लो भैया!

राजधानी भोपाल का पड़ोसी ज़िला सीहोर मध्य प्रदेश के अति पिछड़े और ग़रीब ज़िलों में शुमार है, लेकिन इसे गर्व है कि इसने प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व मुख्यमंत्री सुंदर लाल पटवा एवं वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपना जनप्रतिनिधि चुनकर देश और प्रदेश का भाग्य विधाता बनाया.

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दिल्‍ली का बाबू : ख़तरे की घंटी

जो होने जा रहा है, उसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. केंद्र सरकार ने काम के प्रति लेटलतीफ बाबुओं को सबक सिखाने का निर्णय लिया है. अगर इस पवित्र मक़सद में कामयाबी मिल जाती है तो हम जिस बाबूगिरी को जानते हैं, उसका दौर समाप्त हो जाएगा.

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