अय्यूब पंडित की हत्या : कश्मीरियत और इंसानियत की हत्या है

श्रीनगर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद के बाहर एक कश्मीरी पुलिस अधिकारी की पीट-पीट कर हत्या करने की वीभत्स  घटना ने

Read more

दहेज प्रथा की शिकार बेटियां

हिंदुस्तानी मुसलमानों में दहेज का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है. हालत यह है कि बेटे के लिए दुल्हन तलाशने वाले मुस्लिम अभिभावक लड़की के गुणों से ज़्यादा दहेज को तरजीह दे रहे हैं. एक तऱफ जहां बहुसंख्यक तबक़ा दहेज के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद कर रहा है, वहीं मुस्लिम समाज में दहेज का दानव महिलाओं को निग़ल रहा है. दहेज के लिए महिलाओं के साथ मारपीट करने, उन्हें घर से निकालने और जलाकर मारने तक के संगीन मामले सामने आ रहे हैं.

Read more

नए सेनाध्‍यक्ष की नियुक्ति पर विवादः प्रधानमंत्री की अग्नि परीक्षा

चौथी दुनिया को कुछ ऐसे दस्तावेज़ हाथ लगे हैं, जिनसे हैरान करने वाली सच्चाई का पता चलता है. कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका की सुनवाई हुई, जिसमें लेफ्टिनेंट जनरल बिक्रम सिंह को अगले सेनाध्यक्ष के रूप में नियुक्ति पर सवाल खड़े किए गए.

Read more

भारतीय समाज को बेहतर बनाने के लिए आईओएस का 25 वर्षों का प्रयास

भारत में मुसलमान अल्पसंख्यक बिरादरी का दर्जा रखता है. देश के संविधान ने दूसरे वर्गों के साथ-साथ इस देश के मुसलमानों को भी बराबर के अधिकार दिए हैं, लेकिन आज़ादी के 60 साल से भी ज़्यादा का वक़्त गुज़र जाने के बाद भी, आज मुसलमानों को अपना हक़ मांगना पड़ रहा है.

Read more

समाज को आईना दिखाती रिपोर्ट

हाल में यूनीसेफ द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत में 22 फीसदी लड़कियां कम उम्र में ही मां बन जाती हैं और 43 फीसदी पांच साल से कम उम्र के बच्चे कुपोषण का शिकार हैं. रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतर बच्चे कमज़ोर और एनीमिया से ग्रसित हैं. इन क्षेत्रों के 48 प्रतिशत बच्चों का वज़न उनकी उम्र के अनुपात में बहुत कम है. यूनिसेफ द्वारा चिल्ड्रन इन अर्बन वर्ल्ड नाम से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी ग़रीबों में यह आंकड़ा और भी चिंताजनक है, जहां गंभीर बीमारियों का स्तर गांव की तुलना में अधिक है.

Read more

स्त्रियों की मज़दूरी का मूल्यांकन

फिर कल-काऱखानों के चल निकलने के कारण स्त्री कामगारों की संख्या बढ़ी, लेकिन बाज़ार में इनकी मज़दूरी का भाव पुरुषों की अपेक्षा निम्न स्तर का ही रहा. मालिकों की दलील यह थी कि यदि हमें मज़दूरों की ज़रूरत ही हो तो हम पुरुषों को ही क्यों न रखें और फिर सस्ती दर में औरतें काम करने के लिए राज़ी भी तो हैं. उनके इस उत्तर में सुदृढ़ तर्क का अभाव भले हो, इसने स्त्रियों को मज़दूरी की आवश्यकता के कारण सस्ती दर पर काम करने के लिए बाध्य कर दिया.

Read more

इमोशनल चूहे

इमोशनल अत्याचार अब स़िर्फ इंसानों में नहीं, बल्कि चूहों में भी देखा जा सकता है. एक अनुसंधान कहता है कि वे दयालु और उदार होते हैं. शिकागो विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने प्रयोग के लिए चूहों को जोड़ों में रखा, ताकि वे एक-दूसरे को जान सकें.

Read more

आदिवासियों की उपेक्षा कब तक?

आज देश का आदिवासी समुदाय राजनीति के केंद्र में आ गया है, लेकिन अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक धरोहर के लिए नहीं, बल्कि इसलिए कि उसने देश की सरकार के ख़िला़फ संघर्ष का बिगुल बजा दिया है. आदिवासी एक ऐसे सामजिक समूह के सदस्य हैं, जो आज अपनी पहचान के लिए लड़ रहा है.

Read more

कश्मीरियों की व्यथा कब तक अनसुनी की जाएगी

अरुंधति राय के इस वक्तव्य कि कश्मीर भारत का अविभाज्य हिस्सा नहीं है, पर काफी बवाल मचा. भाजपा ने मांग की कि अरुंधति के ख़िला़फ देशद्रोह का मुक़दमा क़ायम किया जाना चाहिए. भाजपा महिला मोर्चा के सदस्यों ने उनके दिल्ली स्थित निवास में तोड़फोड़ की और बजरंग दल ने उन्हें कई तरह की धमकियां दीं.

Read more

अपनी ही करनी का फल भोग रहे हैं हम

पाकिस्तान में इन दिनों न्यूज़ चैनलों और वेबसाइटों पर सियालकोट की एक घटना की वीडियो बार बार दिखाई जा रही है. वीडियो में दिखाया गया है कि चंद लोग एक भीड़ की मौजूदगी में, जिसमें कुछ पुलिस के जवान भी शामिल हैं, दो लड़कों को डंडों से बुरी तरह पीट रहे हैं. जिन को मारा गया है, वह दोनों भाई हैं, जिनमें से एक की उम्र 18 वर्ष और दूसरे की उम्र 15 वर्ष है.

Read more

यूरोप में महिलाओं पर अत्याचार

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप और अमेरिका में रहने वाले दक्षिणी एशियाई ख़ानदानों में सैकड़ों महिलाएं ऐसी हैं, जिन्हें ग़ुलामों की तरह रखा जाता है. हाल के दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें पर्दे में रहने वाली मुस्लिम महिलाओं को ब्याह कर पाकिस्तान लाया गया और ग़ुलामों की ज़िंदगी जीने पर विवश किया गया.

Read more

आदिवासी लड़की से बलात्कारः रसू़खदारों के आगे पुलिस कमज़ोर

सरकार के सारे क़ायदे क़ानून और नियम केवल आम लोगों को ही प्रताड़ित करने के लिए होते हैं. जब एक आदिवासी लड़की किसी मंत्री के भतीजे पर शारीरिक उत्पीड़न का आरोप लगाए तो पुलिस भी मौन हो जाती है.

Read more

बाल शोषण के खिला़फ जनजागरण ज़रूरी

बाल शोषण आज हमारे लिए कोई अंजान शब्द नहीं है, बल्कि यह आधुनिक समाज का एक विकृत और ख़ौ़फनाक सच बन चुका है. मौजूदा दौर में निर्दोष एवं लाचार बच्चों को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने की घटनाएं इतनी आम हो चुकी हैं कि अब तो लोग इस ओर ज़्यादा ध्यान भी नहीं देते.

Read more

औरतों का मुक़ाम समाजी और सियासी दोनों है

सामाजिक जीवन में पुरुष-महिला का रिश्ता सबसे अहम है. उसका कारण यह है कि यह रिश्ता मानवीय संवेदना की बुनियाद है और इसमें मामूली सी ग़लती भी सामाजिक ढांचे को बदनुमा और दाग़दार बना सकती है. हमारा इतिहास औरतों पर होने वाले अत्याचार और पाबंदियों के कलंकित दृश्यों से भरा पड़ा है.

Read more

सार-संक्षेप

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्वाचन क्षेत्र बुदनी के वनग्राम खटपुरा के 200 वनवासी परिवारों को एक भाजपा नेता के इशारे पर वन विभाग के अफसर प्रताड़ित कर रहे हैं. 25 वर्षों से वनभूमि पर रहने वाले वनवासियों का आरोप हैं कि उन्हें खेती के लिए पट्टे देना तो दूर, वन अधिकारी उनकी फसल चौपट कर उनके खिला़फ झूठे मुकदमे दर्ज करा रहे हैं.

Read more