बुनकर आंदोलन पर भारी पड़ी यूनियनबाजी

बिहार का मैनचेेस्टर कहे जाने वाले गया के मानपुर पटवा टोली में 11 सूत्रीय मांगों को लेकर क़रीब दस हज़ार

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ऐसे साथियों के होते दुश्मनों की क्या ज़रूरत

सभी राजनीतिक दलों को वैचारिक रूप से सहमति रखने वाली अपनी छोटी-छोटी इकाइयों से परेशानी रहती है. उक्त लोग पार्टी

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जनता को विकल्प की तलाश है

नरेंद्र मोदी की विजय ने संघ और भारतीय जनता पार्टी में एक चुप्पी पैदा कर दी है. संघ के प्रमुख लोगों में अब यह राय बनने लगी है कि नरेंद्र मोदी को देश के नेता के रूप में लाना चाहिए, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के नेता इस सोच से सहमत नहीं हैं. भारतीय जनता पार्टी के लगभग सभी नेताओं का मानना है कि नरेंद्र मोदी को देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तुत करते ही देश के 80 प्रतिशत लोग भारतीय जनता पार्टी के ख़िला़फ हो जाएंगे, क्योंकि मोदी की सोच से देश के 16 प्रतिशत मुसलमान और लगभग 80 प्रतिशत हिंदू सहमत नहीं हैं.

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एक अफसर का खुलासाः ऐसे लूटा जाता है जनता का पैसा

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने अपने पद से इस्ती़फा दे दिया है. हालांकि उनके इस्ती़फे के बाद राज्य में सियासी भूचाल पैदा हो गया है. अजीत पवार पर आरोप है कि जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने लगभग 38 सिंचाई परियोजनाओं को अवैध तरीक़े से म़ंजूरी दी और उसके बजट को मनमाने ढंग से बढ़ाया. इस बीच सीएजी ने महाराष्ट्र में सिंचाई घोटाले की जांच शुरू कर दी है.

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आरएसएस का चक्रव्‍यूह

हिंदुस्तान में सदियों से संयुक्त परिवार की प्रथा चली आ रही है. इस व्यवस्था में परिवार का मुखिया जो अक्सर बुज़ुर्ग होता है, उसके ऊपर परिवार को एक रखने और उसे चलाने की ज़िम्मेदारी होती है. आम तौर पर आज भी हिंदुस्तान में ज़्यादातर घरों में पीढ़ी दर पीढ़ी बंटवारा नहीं होता. जबसे पश्चिम का प्रभाव अपने देश पर बढ़ा है, तबसे परिवारों में बंटवारे का चलन बढ़ गया है, पर यह अभी भी अपवाद स्वरूप ही है.

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संघ नहीं चाहता भाजपा मज़बूत हो

यह हमेशा विवाद का विषय रहा है कि विधानसभा का चुनाव मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित करके लड़ा जाए या चुनाव के बाद मुख्यमंत्री चुना जाए. ठीक उसी तरह, जैसे लोकसभा चुनाव में कुछ पार्टियां प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा करके लड़ती हैं, कुछ पार्टियां ऐसा नहीं करती हैं. 2004 में भाजपा ने आडवाणी जी को प्राइम मिनिस्टर इन वेटिंग कहकर चुनाव लड़ा था, जबकि कांग्रेस ने किसी को भी अपना उम्मीदवार नहीं बनाया था.

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बिहारः इंतिहा हो गई इंतज़ार की

दरभंगा स्थित अशोक पेपर मिल प्रबंधन और मज़दूर कामगार यूनियन के बीच शुरू हुई तक़रार थमने का नाम नहीं ले रही है. मज़दूर कामगार यूनियन के नेताओं द्वारा जहां मिल प्रबंधन पर औज़ारों एवं मशीनों की चोरी के साथ-साथ राशि डकारने का आरोप लगाया जा रहा है, वहीं मिल प्रबंधन द्वारा कामगारों के विरुद्ध दमनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है. इसके चलते अशोक पेपर मिल प्रबंधन और मज़दूर कामगार यूनियन आमने-सामने आ गए हैं.

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पूर्वी चंपारणः महात्‍मा गांधी केंद्रीय विश्‍वविद्यालय, जनसंघर्ष और नेतागिरी

संघर्ष ज़मीन तैयार करता है और फिर उसी ज़मीन पर नेता अपनी राजनीतिक फसल उगाते हैं. कुछ ऐसा ही हो रहा है मोतिहारी में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए बने संघर्ष मोर्चा के साथ. चंपारण की जनता केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए दिन-रात एक करके संघर्ष करती है और जब दिल्ली आती है अपनी बात केंद्र तक पहुंचाने, तो वहां मंच पर मिलते हैं बिहार के वे सारे सांसद, जो संसद में तो इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोलते, लेकिन जनता के बीच भाषणबाज़ी का मौक़ा भी नहीं छोड़ते.

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काम रोको

यह सही है कि इससे जनता को कष्ट और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. अभी हम श्रमिक संघ प्रणाली का विश्लेषण कर रहे हैं. इसके कई पहलू अभी तक बाक़ी रह गए हैं. मज़दूरों के किसी भी आंदोलन को सफल बनाने के लिए सविनय अवज्ञा के तरीक़े हैं, जैसे टूल्स डाऊन, स्टे-इन-स्ट्राइक आदि.

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मिथुन दा की छत्रछाया

इस वर्ष फिल्म स्टूडियो सेटिंग एंड एलाइड मज़दूर यूनियन ने गणतंत्र दिवस और अपना वार्षिक उत्सव एक साथ मनाया. यह मज़दूर यूनियन किसी परिचय की मोहताज नहीं है, यह अपनी तरह की एक ही संस्था है और मिथुन चक्रवर्ती की छत्रछाया में फलफूल रही है. इस संस्था के सभी मज़दूर स़िर्फ मिथुन दा को ही अपना चेयरमैन बनाए रखना चाहते हैं और उनके आलावा किसी अन्य को इस पद के लिए स्वीकार नहीं करते.

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ओलंपिक 2012 : डाओ प्रायोजक बना, विवाद शुरू

जैसे ही यह खबर आई कि डाओ कंपनी को भी लंदन ओलंपिक का प्रायोजक बनाया गया है, भारत में इस बात को लेकर भोपाल गैस पी़ड़ित संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया, लेकिन एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि भारत सरकार की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई भी बयान नहीं आया है.

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केंद्रीय विश्‍वविद्यालय स्‍थापित करने की मांगः चंपारण एक बार फिर आंदोलन की राह पर

महात्मा गांधी के नाम पर कसमें खाकर दुबली होने वाली कांग्रेस सरकार उनके नाम पर एक अदद केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने को तैयार नहीं है, जो कि बापू की कर्मभूमि चंपारण के मोतिहारी में प्रस्तावित है. केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल का अड़ियल रवैया उसकी स्थापना में बाधक बन रहा है. सिब्बल के ताजा बयान ने केंद्रीय विश्वविद्यालय का सपना संजोए चंपारणवासियों के अरमान में पलीता लगा दिया है.

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एन डी तिवारी का संघ प्रेम

कांग्रेस के दिग्गज नेता एन डी तिवारी ने उत्तराखंड सरकार द्वारा आयोजित अटल खाद्यान्न योजना के शुभारंभ कार्यक्रम में भाग लेकर राजनीतिक गलियारे में भूचाल खड़ा कर दिया है. इसे राहुल गांधी के मिशन-2012 को पलीता लगाने वाला क़दम माना जा रहा है.

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बिन लादेन और असीमानंद एक ही थैली के चट्टे-बट्टे

साधारण अपराधों की तुलना में आतंकी अपराधों की जांच कहीं अधिक कठिन होती है. इनमें बम फेंकने या गोली चलाने वालों के असली नियंत्रक रहस्य के आवरण में लिपटे रहते हैं और उन तक पहुंचना आसान नहीं होता.

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संघ, अयोध्या निर्णय व भारतीय राष्ट्रवाद

अयोध्या निर्णय की जिन आधारों पर आलोचना की जा रही है, उनमें से कुछ हैं, ज़मीन के मालिकाना हक़ संबंधी मूल मुद्दे की उपेक्षा व 23 दिसंबर, 1949 की आधी रात को मस्जिद के अंदर रामलला की मूर्तियों की स्थापना और 6 दिसंबर 1992 को संघ परिवार द्वारा मस्जिद को ढहाए जाने के घोर अवैधानिक व अनैतिक कृत्यों को नज़रअंदाज़ किया जाना.

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कौन किसे बदनाम कर रहा है

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का ढोल पीटने वाला हिंदुत्ववादी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक बार फिर अपने ऊपर लगे आपराधिक आरोपों से तिलमिला उठा है और इसी तिलमिलाहट के परिणामस्वरूप संघ को राष्ट्रव्यापी धरना-प्रदर्शन का आयोजन गत 10 नवंबर को मात्र 2 घंटे के लिए करना पड़ा.

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मेनका गांधी और वरुण गांधी को सच्चाई बतानी चाहिए

अफसोस किस पर करें. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ क्या इससे नीचे भी गिरेगा या यही इसकी सीमा है. हमने हमेशा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को नैतिकता का नाम लेते और शालीनता का व्यवहार करते देखा है. जो लोग संघ को ज़्यादा जानते हैं, वे इस पर ज़्यादा भरोसा नहीं करते तथा कहते हैं कि वह संघ का बाहरी चेहरा है.

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पंचायत चुनाव की कठिन डगर

झारखंड के मुख्यमंत्री शिबू सोरेन 15 जून से पहले पंचायत चुनाव की घोषणा कर चुके हैं और उप मुख्यमंत्री रघुवर दास उनके सुर में सुर मिलाकर बरसात के पहले पंचायत चुनाव करा लेने का दावा कर रहे हैं. हाल में भूरिया आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप सिंह भूरिया एक कार्यशाला में शिरकत करने रांची आए.

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