मगध विश्वविद्यालय में करोड़ों की हेराफेरी

शैक्षणिक अराजकता, फर्जी डिग्री और वित्तीय अनियमितता के कारण सुर्खियों में रहने वाला मगध विश्वविद्यालय एक बार फिर से चर्चा

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क्या फर्ज़ी डिग्री बांट रहा है बीएचयू?

क्या बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय बीएड की फर्ज़ी डिग्रियां बांट रहा है? अगर बीएड कोर्स को मान्यता देने वाली संस्था ‘राष्ट्रीय

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जामिया हमदर्द को बर्बाद करने की साजिश-2 प्रधानमंत्री जी, हकीम अब्दुल हमीद के सपनों को बचाने की जरुरत है

कुलपति जीएन काज़ी ने वर्ष 2010 में जामिया हमदर्द प्रशासन को अंधेरे में रखते हुए दिल्ली के जंगपुरा एक्सटेंशन स्थित

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जामिया हमदर्द को बर्बाद करने की साजिश

चौथी दुनिया ने वर्ष 2013 में जामिया हमदर्द में चल रहे भ्रष्टाचार और ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियों को उजागर करते हुए तत्कालीन

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व्यक्तित्व के धनी बाबू राम बुझावन

हिंदी साहित्य के अजातशत्रु नामक स्मृति-ग्रंथ उनके विशाल व्यक्तित्व और सफल जीवन के अंश लेकर प्रकाशित हुई है. राम बुझावन

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महिला अरब जासूस अमीना दाऊद मुफ्ती: मोहब्बत और इंतकाम की दास्तान

एक कहावत बेहद मशहूर है कि महिला मोहब्बत में अपनी जान खुशी-खुशी कुर्बान कर देती है और जब बदला लेने

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अन्य देशों के मुकाबले : कितना मजबूत है आईएसआईएस

दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस पर अमेरिका समेत कई देशों ने हमले शुरू कर  दिए हैं. ये सभी

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गांधी को नहीं जानती हैं अरुंधति राय

बुकर पुरस्कार से सम्मानित मशहूर लेखिका अरुंधति राय ने पिछले दिनों केरल विश्‍वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि

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किस्सा-ए-कुलगुरु : ब्रह्मांड विश्वतविद्यालय

दसराज्ञ युद्ध की समाप्ति पर विजय पक्ष के सेनानायक ने एक सवाल के जवाब में कहा-दुनिया वालों से कह दो

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बंद मिलें और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी

समस्तीपुर बिहार का प्रमुख ज़िला है. यहां पूर्व मध्य रेलवे का मंडलीय कार्यालय है, उत्तर बिहार का इकलौता राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय है. फिर भी यह जिला औद्योगिक क्षेत्र में पिछड़ा है. प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता के बावजूद यहां उद्योग पनप नहीं पा रहे हैं.

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पूर्वी चंपारणः महात्‍मा गांधी केंद्रीय विश्‍वविद्यालय, जनसंघर्ष और नेतागिरी

संघर्ष ज़मीन तैयार करता है और फिर उसी ज़मीन पर नेता अपनी राजनीतिक फसल उगाते हैं. कुछ ऐसा ही हो रहा है मोतिहारी में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए बने संघर्ष मोर्चा के साथ. चंपारण की जनता केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए दिन-रात एक करके संघर्ष करती है और जब दिल्ली आती है अपनी बात केंद्र तक पहुंचाने, तो वहां मंच पर मिलते हैं बिहार के वे सारे सांसद, जो संसद में तो इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोलते, लेकिन जनता के बीच भाषणबाज़ी का मौक़ा भी नहीं छोड़ते.

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मेहनत रंग लाएगी, लेकिन…

जहां चाह है वहां राह है, लेकिन अपनी मंज़िल की ओर बढ़ना जितना आसान है उतना ही कठिन भी. कुछ ऐसा ही हाल है अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च (आईपी यूनिवर्सिटी, दिल्ली) के 13 छात्रों का, जिन्होंने अपने सपने को साकार करने के लिए दिन रात मेहनत की. मगर हर बार निराशा ही हाथ लगी.

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सिंह नहीं, किंग महेंद्र

हम और आप केवल कल्पना कर सकते हैं कि क्या कोई शख्स सात बार लगातार राज्यसभा के लिए चुना जा सकता है, लेकिन नज़र जब किंग महेंद्र के चेहरे पर जाकर अटकती है तो लगता है कि इस धरती एवं इस लोकतंत्र में कुछ भी संभव है. इस लंबे दौर में बिहार एवं केंद्र में सत्ता की राजनीति का चेहरा कई बार बदला, पर एक चीज़ नहीं बदली और वह थी किंग महेंद्र की राज्यसभा के लिए दावेदारी.

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बिहारः केंद्रीय विश्वविद्यालय कहां खुलेगा, गांधी की कर्मभूमि या तथागत की तपोभूमि में

केंद्रीय विश्वविद्यालय को लेकर बिहार में बहस शुरू हो गई है. इसे राजनीतिक रंग भी दिया जा रहा है. इस मामले को लेकर केंद्र सरकार के मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल फ्रंट फुट पर हैं, तो बिहार सरकार के मुखिया नीतीश कुमार बैक फुट पर आ गए हैं. लेकिन राजनीतिक मजबूरी और वादा़खिला़फी से घबराये बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, अंतरराष्ट्रीय पटल पर महत्वपूर्ण होते जा रहे गया में केंद्रीय विश्वविद्यालय नहीं बनने देना चाह रहे हैं.

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सही प्रशिक्षण से सफलता मिलेगी

आज पूरा विश्व बैंकिंग और कॉरपोरेट क्षेत्र में आई मंदी की मार झेल रहा है. यूरोप में इसका प्रभाव ज़्यादा दिखा, जबकि भारत इस मंदी से कुछ हद तक अपने को दूर रखने में कामयाब रहा है. भारत ने इसके लिए एक अच्छा रास्ता अपनाया. उसने अपनी घरेलू मांग को बढ़ाया. साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की आर्थिक नीतियों ने भी कॉरपोरेट क्षेत्र को मंदी से निपटने में सहयोग दिया, लेकिन सरकार का सहयोग और घरेलू मांगों को बढ़ाना ही वैश्वीकरण के इस दौर में मंदी से बचने के लिए का़फी नहीं है.

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बार-बार वर्धा

तक़रीबन दस-ग्यारह महीने बाद एक बार फिर वर्धा जाने का मौक़ा मिला. वर्धा के महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के छात्रों से बात करने का मौक़ा था. दो छात्रों हिमांशु नारायण और दीप्ति दाधीच के शोध को सुनने का अवसर मिला.

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संकट में हॉवर्ड की प्रतिष्ठा

दुनिया के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक हॉवर्ड विश्वविद्यालय इन दिनों विवादों में घिर गया है. विश्वविद्यालय के दो निर्णयों की दुनिया भर में आलोचना हो रही है. पहला निर्णय तो भारतीय राजनेता एवं अर्थशास्त्री सुब्रह्मण्यम स्वामी को गर्मी के दौरान चलने वाले अर्थशास्त्र के दो पाठ्यक्रमों के शिक्षण से हटा देने का है.

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नालंदा के गौरव के साथ खिलवाड़: यह विश्वविधालय भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है

हिंदुस्तान को सचमुच किसी की नज़र लग गई है. ईमानदारी से कोई काम यहां हो नहीं सकता है. निचले स्तर के अधिकारी अगर भ्रष्टाचार करते हैं तो ज़्यादा दु:ख नहीं होता है, लेकिन जिस प्रोजेक्ट के साथ प्रोफेसर अमर्त्य सेन एवं पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जैसे लोग जुड़े हों और वहां घपलेबाजी हो, बेईमानी हो, ग़ैरक़ानूनी और अनैतिक काम हों तो दु:ख ज़्यादा होता है.

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केंद्रीय विश्‍वविद्यालय स्‍थापित करने की मांगः चंपारण एक बार फिर आंदोलन की राह पर

महात्मा गांधी के नाम पर कसमें खाकर दुबली होने वाली कांग्रेस सरकार उनके नाम पर एक अदद केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने को तैयार नहीं है, जो कि बापू की कर्मभूमि चंपारण के मोतिहारी में प्रस्तावित है. केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल का अड़ियल रवैया उसकी स्थापना में बाधक बन रहा है. सिब्बल के ताजा बयान ने केंद्रीय विश्वविद्यालय का सपना संजोए चंपारणवासियों के अरमान में पलीता लगा दिया है.

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पाटलिपुत्र का दर्द

ईसा से 304 वर्ष पूर्व भारत आए प्रसिद्ध ग्रीक राजदूत मेगास्थनीज ने यदि यह न लिखा होता कि भारत के इस महानतम नगर पाटलिपुत्र (पटना) की सुंदरता और वैभव का मुक़ाबला सुसा और एकबताना जैसे नगर भी नहीं कर सकते, तो शायद आज भारत के गंदे नगरों में गिना जाने वाला पटना कभी इतना सुंदर था, यह मानने के लिए लोग तैयार न होते.

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पत्रकारिता के अभिमन्यु

कॉलेज के उत्साही शिक्षक डॉ. हरीश अरोड़ा ने बेहद श्रमपूर्वक दो दिन की राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की थी. इस संगोष्ठी के अंतिम दिन और अंतिम सत्र में मुझे भी बोलना था.

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सार-संक्षेपः ब्याज़ मा़फिया का आतंक

पिछले दिनों आगरा में आईजी रेंज पी.के. तिवारी की पहल पर छह ब्याज़ माफिया के खिला़फ मुक़दमे ज़रूर लिखे गए किंतु ब्याज़ माफियाओं पर इसका कोई असर नहीं दिखाई दे रहा. उनके सर पर राजनीतिक पहुंच वाले लोगों का हाथ है, इसलिए उनके आका मामलों को खत्म करने की जुगत में लगे हुए हैं और ब्याज़ मा़फिया शान से खुले घूम रहे हैं.

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मगध विश्‍वविद्यालयः बेहतर भविष्‍य की ओर अग्रसर

जिस प्रकार प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय अपनी शैक्षणिक व्यवस्था तथा पठन-पाठन के उच्च मापदंड के कारण पूरी दुनिया में प्रसिद्ध था, ठीक उसी प्रकार अब मगध विश्‍वविद्यालय भी देश-दुनिया में उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीय मानक पर खरे उतरते हुए अपनी पहचान बनाने में सफल हो रहा है.

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