अमेरिका में क्यों लगा चप्पल चोर पाकिस्तान का नारा

वाशिंगटन में सोमवार को पाकिस्तान एम्बेसी के सामने लोग हाथ में जूते और चप्पल लेकर पहुंच गए. लोग चप्पल चोर

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पाकिस्तान से अमेरिकी नाराजगी की वजह क्या है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान को मिलने वाली 1626 करोड़ रुपए की आर्थिक मदद रोक दी है. राष्ट्रपति बनने

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तीसरा विश्वयुद्ध हुआ तो भारत भी सुरक्षित नहीं

मैं उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच झगड़े को लेकर उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया, जापान, सिंगापुर और चीन के लोगों

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तीसरा विश्वयुद्ध हुआ तो भारत भी सुरक्षित नहीं  (पार्ट-1 )

(नॉर्थ कोरिया-अमेरिका विवाद: साउथ चाइना सी से संतोष भारतीय की ग्राउंड रिपोर्ट) उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच झगड़े को

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अब अच्छी अंग्रेजी बोलने वाले ही जा सकेंगे अमेरिका, ट्रंप सरकार के नए फरमान भारत को राहत!

  नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अहम फैसला लेने का मन बना लिया है, फिलहाल दुनिया

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सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता की पहल

अाज की तारीख में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 193 सदस्य देश (एवं 2 आब्जर्वर सदस्य) हैं, जबकि सुरक्षा परिषद की

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मुशायरा जश्न-ए-बहार : गंगा-जमुनी तहज़ीब का अलमबरदार

निगाहों के तक़ाज़े चैन से मरने नहीं देते, यहां मंजर ही ऐसे हैं कि दिल भरने नहीं देते. क़लम मैं

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भोपाल त्रासदी : न्याय के लिए अंतहीन प्रयास जारी है

संयुक्त राज्य अमेरिका के एक नर्सिंग होम में बीते 29 सितंबर को हुई मौत से 30 साल पहले वॉरेन एंडरसन

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आगे बढ़ने के लिए विरोधाभास ख़त्म करने होंगे

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस बात को मानने के लिए भी सहमत नहीं है कि गांधी जी अन्य स्वतंत्रता सेनानियों से

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अमेरिका की राह पर इजरायल

गलत आरोप लगाकर हजारों लोगों की हत्याएं करने का गुनाह करते हुए दुनिया अमेरिका को पहले भी देख चुकी  है.

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मोदी का साज़िश भरा स्वागत

एक पुरानी कहावत है, चोर से कहो, चोरी कर और साह से कहो, जागते रहो. खुद को दुनिया का दादा

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फिर सामने आया अमेरिका का असभ्य चेहरा

अमेरिका ने भारत की राजदूत देवयानी खोबराग़डे के साथ तलाशी के नाम पर जिस तरह से असभ्य हरकत की, उसके

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सरकार जवाब दे यह देश किसका है

हाल में देश में हुए बदलावों ने एक आधारभूत सवाल पूछने के लिए मजबूर कर दिया है. सवाल है कि आखिर यह देश किसका है? सरकार द्वारा देश के लिए बनाई गई आर्थिक नीतियां और राजनीतिक वातावरण समाज के किस वर्ग के लोगों के फायदे के लिए होनी चाहिए? लाजिमी जवाब होगा कि सरकार को हर वर्ग का ख्याल रखना चाहिए. आज भी देश के साठ प्रतिशत लोग खेती पर निर्भर हैं. मुख्य रूप से सरकारी और निजी क्षेत्र में काम कर रहा संगठित मज़दूर वर्ग भी महत्वपूर्ण है.

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आतंक का चक्रव्यूह

दो मई की सुबह दुनिया के सबसे खूंखार आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में मार गिराए जाने के बाद यह बात साफ हो गई कि पाकिस्तान में आतंकियों को लंबे समय से पनाह मिल रही है. लादेन की मौत के साथ ही आतंक का पाकिस्तान कनेक्शन एक बार फिर दुनिया के सामने उजागर हो गया. यह भी साफ हो गया कि लादेन एबटाबाद में पिछले पांच सालों से सिर छुपाकर रह रहा था और पाकिस्तान दुनिया के सामने आतंक के ख़िला़फ बयानबाज़ी कर रहा था.

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दस साल पहले हुआ था ओसामा का सौदा

ओसामा के मारे जाने के बाद अटकलों का बाज़ार काफी गर्म हो गया है. लगभग रोज़ ही कोई न कोई नई कहानी पता चलती है. इसी क्रम में हाल में जनता को बताया गया कि ओसामा का सौदा आज से दस साल पहले ही तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बुश और तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्ऱफ के बीच हो चुका था.

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क्या सचमुच न्याय हुआ?

क्या रावण के साथ न्याय हुआ था? उसने तो राम से अपनी बहन सूर्पनखा की नाक काटने का बदला लेना चाहा था और इसलिए सीता को अगवा किया. क्या यह कारण इतना बड़ा था कि लंका नगरी को ही तबाह कर दिया जाए और उसके साथ-साथ सैकड़ों लोगों को भी मार डाला जाए और मार डाला जाए रावण के सारे बेटों को और फिर उसे भी?

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लीबिया पर हमलाः असली मंसूबे कुछ और हैं

अमेरिका, फ्रांस एवं इंग्लैंड ने लीबिया को हवाई उड़ान प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करने संबंधी संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्ताव को लागू करने में जो तत्परता दिखाई, वह इन देशों के साम्राज्यवादी लक्ष्यों के अनुरूप है. इन्हीं तीनों देशों ने 19वीं एवं 20वीं सदी में लगभग आधी दुनिया को अपना ग़ुलाम बनाया था. इंग्लैंड एवं फ्रांस ने यह काम प्रत्यक्ष ढंग से किया था और अमेरिका ने अप्रत्यक्ष ढंग से.

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डेविड हेडली : भारत बनाम अमेरिका-पाकिस्तान

पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिक डेविड हेडली के बारे में परत दर परत जो खुलासे हो रहे हैं, वह निश्चित रूप से चौंकाने वाले हैं. उक्त खुलासे खासकर भारत को सचेत करते हैं कि जिस तरह वह पाकिस्तान पर भरोसा नहीं कर सकता, उसी तरह उसे अमेरिका को भी संदिग्ध निगाहों से देखना चाहिए.

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ई-वेस्‍ट का खतरा

यूरोप और अमेरिका की तरह अब भारत भी ई-वेस्ट की गंभीर समस्या से जूझ रहा है. एक ओर यूरोपीय एवं अमेरिकी देशों ने अपने ई-वेस्ट को भारत में डंप करने का अड्डा बना लिया है, वहीं दूसरी ओर भारत में ई-वेस्ट की समस्या से निपटने का कोई सशक्त प्रबंधन नहीं है.

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यूपीए युवावस्था के मुहासों से परेशान है

साल 2010 अभी अपने युवावस्था में ही है. केंद्र सरकार के चेहरे पर अचानक नज़र आने लगे मुहासों की वजह भी कहीं यही तो नहीं है? यह न तो लाइलाज है और न ही ज़्यादा गंभीर. बस एक छोटी सी चाहत कि इस खुजलाहट और धब्बे वाले चेहरे के बिना ज़िंदगी शायद ज़्यादा आसान और हसीन होती.

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उच्च शिक्षा विभाग बदहाली का शिकार

मध्य प्रदेश के किसी विश्वविद्यालय में उप कुलपति बनने से बेहतर है किसी होटल का मैनेजर बनना. यह कथन है लेफ्टिनेंट जनरल (अवकाशप्राप्त) के टी सतारावाला का. इस कथन की पृष्ठभूमि यह है कि 1978 में सतारावाला को जबलपुर विश्वविद्यालय का उप कुलपति नियुक्त किया गया था.

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जैव विविधता और जैव प्रौद्योगिकी के बीच का घालमेल

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकार यानी एनबीए ने उत्तराखंड के देहरादून डॉल्फिन इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल एंड नेचुरल साइंसेस के साथ एक समझौता किया है. उसने तीन जनवरी 2008 को अमेरिका स्थित लिबेनन में मास्कोमा कॉरपोरेशन को जैविक संसाधन हस्तांतरित करने के लिए समझौते की यह प्रक्रिया पूरी की.

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केजीबी का काला सच

तारीख एक सितंबर 1983. इस दिन कोरियन एयरलाइंस के बोइंग 747 विमान ने न्यूयॉर्क से सियोल के लिए उड़ान भरी. इसने अमेरिका के जॉन एफ कैनेडी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 246 यात्रियों एवं 23 क्रू मेंबर्स के साथ उड़ान भरी थी.

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नई विश्व व्यवस्था और बदलता नज़रिया

जब किसी वर्ष के साथ दशक का अंत होता हो तो एक स्तंभकार की ज़िम्मेदारियां का़फी बढ़ जाती हैं. इनमें अधिकांश एक स्मृति लेख की तरह उबाऊ होते हैं, लेकिन किसी के ज़ेहन में एक असामान्य सवाल आया कि पिछले दस वर्षों में किसी चीज़ के बारे में आपने अपना विचार बदला?

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आखिर क्यों महतवपूर्ण है विदेश नीति

स्वतंत्रता के छह दशकों में पूरी दुनिया नेहरू जी की कल्पना से भी अधिक एक-दूसरे के साथ जुड़ गई है. आज यह कहना उचित ही होगा कि वे देश-जो अपने धन, ताक़त अथवा दूरी के कारण- जो कभी अपने आपको बाहरी ख़तरों से सुरक्षित मानते थे, ने भी अपना स्टैंड बदला है.

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