दिव्यांगों को मिल सकती है घर से वोट देने की सुविधा, आयोग कर रहा विचार

ऐसा देखा गया है कि दिव्यांग जनों को मतदान केंद्रों तक आने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.

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मध्यप्रदेश: विधानसभा चुनाव में निर्णायक होगा ओबीसी फैक्टर

  मध्यप्रदेश की राजनीति जातिनिरपेक्ष रही है. यहां की सियासत में यूपी, बिहार की तरह न तो जातियों का दबदबा

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चौथी दुनिया ने उजागर किया था फ़र्जी ऋृण का मामला

फर्जी एलपीसी (भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र) सहित अन्य फर्जी कागजातों के आधार पर विभिन्न बैंकों को करोड़ों रुपये की चपत

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क्या कश्मीरी अवाम मोदी को पसंद करने लगी हैं?

लगता है कि पूरे हिंदुस्तान में ज़बरदस्त मोदी लहर चलाने के बाद भाजपा एक मात्र मुस्लिम राज्य यानी जम्मू-कश्मीर की

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उत्तर प्रदेश में मोदीमय भाजपा, संगठन रसातल में

उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी अति उत्साह में है. मोदी का डंका बज रहा है. रैलियों में लाखों की भीड़

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रूस : पुतिन की वापसी

रूस की जनता ने ब्लादिमीर पुतिन को अपना राष्ट्रपति चुना है. विगत चार मार्च को रूस में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव कराए गए, जिसमें पुतिन को लगभग 64 फीसदी मत मिले. उनके विरोधियों में से किसी ने बीस प्रतिशत मत नहीं पाए. कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार गेन्नादी ज्युगानोव को लगभग 18 फीसदी मत मिले, जबकि अन्य उम्मीदवार दहाई के अंक तक नहीं पहुंच सके. रूस के एक बड़े उद्योगपति मिखाइल प्रोखोरोव को लगभग 7.9 फीसदी मत मिले.

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बेनी-पुनिया-शाही की प्रतिष्ठा दांव पर

उत्तर प्रदेश में पहले चरण के चुनाव की सरगर्मी आजकल चरम पर है. पहले चरण में पूर्वांचल के सात ज़िलों अंबेडकर नगर, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, सिद्धार्थ नगर, डुमरियागंज एवं बस्ती और अवध क्षेत्र के तीन ज़िलों फैज़ाबाद, बाराबंकी और सीतापुर की कुल 55 विधानसभा सीटों के लिए आठ फरवरी को मतदान होना है.

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हिंदी भाषी प्रत्याशी हाशिए पर

कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना ज़िले के उपनगरों, आसनसोल, दुर्गापुर और रानीगंज को मिलाकर बने शिल्पांचल, सिलीगुड़ी और उत्तर बंगाल के चाय बागान क्षेत्रों में हिंदीभाषी वोटर निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं.

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मतदाताओं की पहचान से खिलवाड़

लोकतंत्र का महापर्व है चुनाव. इस पर्व की शुरुआत होती है मतदाताओं से. मतदाता ही इस पर्व का आयोजक, नियोजक और प्राप्तकर्ता है. मतदाता वह होता है, जो देश का भविष्य तय करता है, पर अ़फसोस कि किसी भी नगर, क़स्बे या गांव में चले जाइए, आपको मतदाता सूची सा़फ-सुथरी शायद ही मिले.

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विजय हुंकार भरने को सेना तैयार

बेगूसराय ज़िले में पहली बार हो रहे नगर निगम चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. पूर्व के नगर परिषद चुनाव में जीत हासिल करने के बाद मुख्य पार्षद पुष्पा शर्मा तथा उपमुख्य पार्षद जवाहर लाल भारद्वाज सहित कई दिग्गज वार्ड पार्षदों के द्वारा इस बार चुनाव न लड़ने तथा कई पंचायतों के नगर निगम में शामिल किए जाने के कारण मुखिया या मुखिया पति के चुनाव लड़ने से मुक़ाबला का़फी रोचक हो गया है.

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चुनावी ताना-बाना बुनना शुरू

जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव एवं राज्य में नई सरकार के गठन की चर्चा पुरानी पड़ती जा रही है, वैसे-वैसे आगामी पंचायत चुनाव की सरगर्मी ग्रामीण क्षेत्रों में रेस पकड़ने लगी है. विभिन्न पदों के संभावित उम्मीदवार मतदाताओं का हालचाल पूछते देखे जा रहे हैं.

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चुनाव के बाद का पोस्टमार्टम

बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों ने कांगे्रस को सबसे अधिक प्रभावित किया. 1990 से लेकर 2005 तक राजद का साथ देना कांगे्रस के लिये आत्मघाती साबित हुआ. लोकसभा की तर्ज पर इस बार विधानसभा चुनाव में एकला चलो की नीति के साथ लड़ने के बाद भी कांगे्रस को असफलता ही हासिल हुई. इसे सबसे अधिक फज़ीहत ग़ैर-कांगे्रसी और नए प्रत्याशी उतारने के कारण भी झेलनी पड़ी. मगध प्रमंडल के 26 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव पूर्व ही पार्टी टिकट बंटने के बाद ही विद्रोह की स्थिति उत्पन्न हो गई थी. लेकिन प्रतिबद्ध कांगे्रसियों ने पार्टी के सवाल पर चुनाव भर चुप रहना ही उचित समझा.

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चेनारीः वादे नहीं जवाब मांगेगी जनता

रोहतास ज़िले के दक्षिणी छोर पर अगर कैमूर की पहाड़ियां झारखंड और उत्तर प्रदेश की सीमाएं छूती हैं तो यहीं से निकटवर्ती कैमूर ज़िले का बंटवारा भी होता है. इन दुर्गम घाटियों में और इसके आसपास रहने वाले लोगों की समस्याएं भी उतनी ही दुर्गम हैं.

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औरंगाबादः सब कुछ दांव पर लगा है

चित्तौड़गढ़ के नाम से प्रसिद्ध नक्सल प्रभावित औरंगाबाद ज़िले के छह विधानसभा क्षेत्रों में इस बार विधानसभा चुनाव की जंग कम रोचक नहीं है. प्रत्याशियों के साथ-साथ उनके आकाओं की साख भी दांव पर लगी है. औरंगाबाद के मतदाता भी यह स्वीकार करते हैं.

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नालंदाः जातीय समीकरण हावी रहेगा

भगवान महावीर और बुद्ध की नगरी नालंदा में मतदाताओं को रिझाने में प्रत्याशियों के पसीने छूट रहे हैं. ज़िले में नए परिसीमन के बाद आठ विधानसभा क्षेत्रों में से चंडी विधानसभा क्षेत्र विलोपित होने से अब केवल सात विधानसभा क्षेत्र रह गए हैं. यह क्षेत्र नीतीश कुमार का गृह ज़िला है, इसलिए लोगों का इस पर विशेष ध्यान है.

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दलीय प्रत्‍याशियों की नींद हराम

गया ज़िले के नवसृजित विधानसभा क्षेत्र वजीरगंज में बाग़ी प्रत्याशियों ने दलीय प्रत्याशियों की नींद हराम कर दी है. यदि बाग़ी अपनी उम्मीद के अनुरूप मत पा गए तो इस क्षेत्र में एक बड़ा उलटफेर हो सकता है. बाग़ी प्रत्याशियों से सबसे अधिक परेशानी राजग के भाजपा प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह को हो रही है.

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अल्‍पसंख्‍यक मतदाताः वोट दे कर भी चोट खाते हैं हर बार

बिहार विधान सभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. साथ ही सामान्य मतों की छीना-झपटी के लिए आम मतदाताओं को बहलाने, फुसलाने की होड़ भी मची हुई है. सभी दल एक दूसरे को पीछे छोड़ने के लिए परेशान हैं. इन दलों के निशाने पर सबसे अधिक मुस्लिम मतदाता हैं.

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मतदाता दूसरी बार एकमा का इतिहास लिखेंगे

नवसृजित एकमा विधानसभा क्षेत्र में आगामी चुनाव को लेकर दावेदारों के बीच घमासान की स्थिति कायम है. समाजवादी राजनीति के मजबूत गढ़ के रूप में कभी सारण प्रमंडल में शुमार मांझी विधानसभा क्षेत्र का एकमा महत्वपूर्ण अंग माना जाता था. नए परिसीमन के बाद एकमा का अलग अस्तित्व कायम हुआ. एकमा का अलग अस्तित्व कायम हो जाने से प्रतिनिधित्व को लेकर दलीय प्रतिबद्धता का अभाव दिखता है.

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सुर्खियों में आने लगे हैं नए – पुराने चेहरे

पूर्णिया के कसबा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी गतिविधियां त़ेज हो गई हैं. अब देर शाम तक गांवों में नेताओं का जमावड़ा लगना शुरू हो गया है. पुराने नेता जिनकी क्षेत्र में अपनी पहचान है, वे पुराने ढर्रे पर ही चल रहे हैं, लेकिन नए उत्साही युवा नेता चुनाव के पूर्व ही शुभकामनाओं का बैनर और पोस्टर लगवाकर मतदाताओं का दु:ख दर्द बांटते गांवों की पगडंडियों पर देर शाम चहलक़दमी करते नज़र आने लगे हैं.

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नौतन विधानसभा क्षेत्र : मतदाताओं का मन टटोलने में जुटे नेता

कांग्रेस का ग़ढ माने जाने वाले पश्चिम चंपारण के नौतन विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सरगर्मियां ब़ढने लगी है. आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी में सभी नेता जोर-शोर से लगे हैं. यह क्षेत्र राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री केदार पांडेय का कार्यक्षेत्र रहा है. यहीं से कुख्यात दस्यु सरगना भागड़ यादव ने अपने भाई सतन यादव को विधायक बनाने में कामयाबी हासिल की थी.

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गर्मी के साथ राजनीतिक पारा चढ़ा

उग्रवाद प्रभावित होने के कारण गया ज़िले के दस विधानसभा क्षेत्रों को संवेदनशील माना जाता है. गया शहर विधानसभा क्षेत्र भी चुनाव के समय संवेदनशील हो जाता है, इससे हर कोई वाकिफ है. सांप्रदायिक सौहार्द और गंगा-जमुनी संस्कृति को अपने दामन में समेटे गया शहर प्रदेश ही नहीं, पूरे देश में सांप्रदायिक सौहार्द के लिए जाना जाता है.

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मतदाताओं के साथ नक्सली भी रखेंगे वजन

सासाराम ज़िले के सात विधानसभा क्षेत्रों में से अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित, चेनारी विधानसभा का आगामी चुनाव किसी भी दल एवं प्रत्याशी के लिए आसान नहीं होगा. बात पहले वाली नहीं रही, क्योंकि नए परिसीमन में इस विधानसभा क्षेत्र से शिवसागर एवं कोचस का आधा हिस्सा तथा करगहर का पूरा प्रखंड कटकर अलग हो गया है.

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जल्‍द बजेगा चुनावी डंका

तमाम हां-ना के बीच इस बात के पक्के संकेत मिलने लगे हैं कि बिहार में जल्द ही चुनाव का डंका बज सकता है. चुनाव आयोग से लेकर सरकार व विपक्ष की तैयारी ज़ोर पकड़ने लगी है. जदयू व भाजपा खेमा इस आकलन में जुट गया है कि अगर जल्द चुनाव कराए जाएं तो ऩफा ज़्यादा होगा या नुक़सान. इधर विपक्षी दल भी नीतीश की हर चाल का जवाब देने के लिए अपनी चुनावी तैयारियों को अंजाम देने में मशगूल हैं.

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