वीपी सिंह की जयंती पर सम्मानित किए गए किसान

इस कार्यक्रम में देशभर से आए किसानों, किसान नेताओं व उन सभी को सम्मानित किया गया, जो अलग-अलग क्षेत्रों में

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वीपी सिंह थे लालू प्रसाद यादव के खिलाफ

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि वीपी सिंह नहीं चाहते थे कि लालू प्रसाद बिहार के मुख्यमंत्री बनें। मेरे

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Santosh Bhartiya Remembers Late Shri VP Singh on the eve of his Birthday

बीबीसी के साथ एक साक्षात्कार में, वरिष्ठ पत्रकार और चौथी दुनिया के प्रधान संपादक श्री संतोष भारतीय ने पूर्व प्रधानमंत्री

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उत्तराखंड चुनाव : मुख्यधारा की पार्टियों से परेशान जनता ने उतारे जन उम्मीदवार

हाल के वर्षों में जिस तरह से राजनीतिक दल जन सरोकारों से दूर होते जा रहे हैं, इससे आम जनता

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अंधराष्ट्रवाद से बढ़ रहा है लोकतंत्र के लिए ख़तरा

चाहे कोई भी विषय हो, देश का एक छोटा लेकिन ख़तरनाक तबक़ा फेसबुक का सहारा लेकर नफ़रत फैलाने का काम

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पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जयंती पर मुलायम ने साधे कई सियासी लक्ष्य : फिर समाजवादियों को एक करने की चाहत

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जयंती केजरिए समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने अपने कई राजनीतिक हित साधे, साथ

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बिहार महागठबंधन-लाभ का उत्तर प्रदेश में विस्तार चाहता है जदयू नीतीश की महत्वाकांक्षा चढ़ेगी परवान

समाजवादी पार्टी को महागठबंधन से अलग होने के लिए विवश करने वाले जनता दल (यू) और कांग्रेस की उत्तर प्रदेश

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राजनीति के नए सिद्धांत

भारत की राजनीति में नए सैद्धांतिक दर्शन हो रहे हैं. पता नहीं ये सैद्धांतिक दर्शन भविष्य में क्या गुल खिलाएंगे, पर इतना लगता है कि धुर राजनीतिक विरोधी भी एक साथ खड़े होने का रास्ता निकाल सकते हैं. लेकिन लोकसभा या राज्यसभा में क्या अब ऐसी ही बहसें होंगी, जैसी इस सत्र में देखने को मिली हैं. मानना चाहिए कि ऐसा ही होगा. ऐसा मानने का आधार है. दरअसल, अब इस बात की चिंता नहीं है कि हिंदुस्तान में आम जनता का हित भी महत्वपूर्ण है.

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अन्ना हजारे नेता नहीं, जननेता हैं

शायद जयप्रकाश नारायण और कुछ अंशों में विश्वनाथ प्रताप सिंह के बाद देश के किसी नेता को जनता का इतना प्यार नहीं मिला होगा, जितना अन्ना हजारे को मिला है. मुझे लगा कि अन्ना हजारे के साथ कुछ समय बिताया जाए, ताकि पता चले कि जनता उन्हें किस नज़रिए से देखती है और उन्हें क्या रिस्पांस देती है.

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यह खामोशी देश के लिए खतरनाक है

कोयला घोटाला अब स़िर्फ संसद के बीच बहस का विषय नहीं रह गया है, बल्कि पूरे देश का विषय हो गया है. सारे देश के लोग कोयला घोटाले को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि इसमें पहली बार देश के सबसे शक्तिशाली पद पर बैठे व्यक्ति का नाम सामने आया है. मनमोहन सिंह कोयला मंत्री थे और यह फैसला चाहे स्क्रीनिंग कमेटी का रहा हो या सेक्रेट्रीज का, मनमोहन सिंह के दस्तखत किए बिना यह अमल में आ ही नहीं सकता था.

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जन्‍मदिन पर विशेषः अन्‍ना और रामदेव वी पी सिंह से सीख लें

उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद तहसील की दो रियासतें थीं, डैया और मांडा. विश्वनाथ प्रताप सिंह का जन्म इसी डैया के राजघराने में 25 जून, 1931 को हुआ था. डैया के बगल की रियासत मांडा के राजा थे राजा बहादुर राम गोपाल सिंह. वह नि:संतान थे. उन्होंने वी पी सिंह को गोद ले लिया. 1955 में वी पी सिंह ने बाकायदा कांग्रेस की सदस्यता ली और सक्रिय राजनीति में आए.

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फकीर की याद में तकदीर की तलाश

पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह को गुजरे दो बरस हो गए. उनकी पुण्यतिथि चुपके से गुजर गई. कोई बड़ा आयोजन नहीं हुआ. पिछड़े वर्ग के हिमायती बनने वाले तमाम संगठनों को भी उनकी याद नहीं आई. पिछड़ों की राजनीति के दम पर मुख्यमंत्री बनने वाले नेता भी उन्हें भूल गए. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक कार्यक्रम हुआ, जो पूरी तरह ग़ैर राजनीतिक था. इस आयोजन के ज़रिए कुछ सवाल उठे, जो आज के दौर में भी मौजूद हैं. मसलन विश्वनाथ प्रताप सिंह ने मंडल आयोग की स़िफारिशें जिस मक़सद से लागू कीं, क्या वह पूरा हो सका, पिछड़े वर्ग में राजनीतिक चेतना आई, उनका आर्थिक स्तर कितना सुधर सका? सामाजिक और शैक्षिक स्तर पर पिछड़े कितने अगड़े हुए? अकलियतों के विकास के लिए वीपी सिंह ने जो प्रयास किए, वे आज के संदर्भ में कितने सफल दिखाई देते हैं? इन सवालों के घेरे में पिछड़े और अल्पसंख्यकों, खास तौर पर मुस्लिम समाज के वे तमाम नेता आते हैं, जिन्होंने खुद को इनका रहनुमा घोषित कर रखा है. भ्रष्टाचार के खिला़फ वीपी सिंह ने ही पहली बार आवाज़ बुलंद की, लेकिन आज प्रधानमंत्री कार्यालय तक सवालों के घेरे में है. कॉमनवेल्थ गेम्स में हुए भ्रष्टाचार से देश शर्मसार है, वहीं बैंकों से लोन दिलाने में घपलेबाज़ी को मामूली बात कहकर पल्ला झाड़ने की कोशिशें हो रही हैं.

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भाजपा और संघ की दु:ख भरी कहानी

यह कहानी न भारतीय जनता पार्टी की है और न उसे अपना राजनैतिक चेहरा मानने वाले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की है. यह कहानी उस दर्द की है, जिसे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का सच्चा स्वयं सेवक और भारतीय जनता पार्टी का सच्चा कार्यकर्ता पिछले पंद्रह सालों से भोग रहा है.

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दिग्विजय सिंह का आखिरी इंटरव्‍यू

बांका (बिहार) के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे. वह हमेशा देश के उन जुझारू, कर्मठ एवं ईमानदार नेताओं में शुमार किए जाते रहे, जो आम लोगों के हितों के लिए प्रयत्नशील रहते हैं. उनके निधन से स़िर्फ देश और समाज की वह क्षति हुई, जिसकी भरपाई संभव नहीं है.

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गरीबों के रहनुमा थे वीपी सिंह

जब सामाजिक जीवन विचार केंद्रित, सार्थक परिवर्तन-परिचालित न हो, जनांदोलन रहित हो जाए, ताक़तवर लोगों की सरपरस्ती के तहत ही जीने की मजबूरी हो, लोकतंत्र के विकास के लिए न कोई आकांक्षा हो और न तैयारी, व्यापक असमानता, कुव्यवस्था एवं बेरोज़गारी ही संरचना का चरित्र हो जाए, राजनीति का अकेला अर्थ हो जाए सत्ता के ज़रिए धन का संग्रह, तो वैसे समय में वीपी सिंह जैसे इतिहास पुरुष की याद आनी स्वाभाविक है, जो आज हमारे बीच नहीं हैं.

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