पुस्‍तक अंशः मुन्‍नी मोबाइल- 49

आनंद भारती नील को सुन रहे थे. उनके सामने दिल्ली की जमुना का चेहरा उभर आया. करोड़ों रुपये का प्रोजेक्ट बनने के बाद भी जमुना ज़हर की नदी बनी हुई है. नेता और नौकरशाह पैसा डकार चुके हैं.

Read more

बांग्‍लादेश ग्‍लोबल वार्मिंग से निबटने की तैयारी

बांग्लादेशी समाज का तक़रीबन हर तबका सरकारी तंत्र, नागरिक संस्थाएं और देश के प्रमुख विश्वविद्यालय, पर्यावरण पर मची हलचल को लेकर कौतूहल में हैं. सबकी निगाहें इसी पर टिकी हैं कि अब आगे क्या होने वाला है. इस साल की शुरुआत से ही देश भर में इस विषय पर सभा-सेमिनारों की संख्या लगातार ब़ढ रही है.

Read more

पर्यावरण सुरक्षा और भारत

क्योटो प्रोटोकॉल के प्रति भारत का दृष्टिकोण

भारत ने अगस्त, 2002 में क्योटो प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए और उसका अनुमोदन किया. इस प्रोटोकॉल की कई शर्तों से भारत को छूट हासिल है और तकनीकी हस्तांतरण एवं विदेशी निवेश के क्षेत्र में फायदा हो सकता है.

Read more

ग्‍लोबल वार्मिंग बनाम मानवाधिकार

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए उठाए गए क़दमों की सुस्त चाल से, इससे प्रभावित हो रहे समुदायों में स्वाभाविक रूप से निराशा बढ़ी. परंपरागत राजनैतिक-वैज्ञानिक पद्धतियों पर आधारित उक्त उपाय ज़्यादा प्रभावी साबित नहीं हो रहे थे, पीड़ित लोगों की समस्याओं की अनदेखी हो रही थी और सबसे बड़ी बात यह थी कि मानवीय गतिविधियों के चलते वैश्विक तापमान में हो रही वृद्धि के लिए ज़िम्मेदारी तय करने की कोई व्यवस्था न होने से प्रभावित समुदायों को लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था.

Read more

चंपारण देगा ग्‍लोबल वार्मिंग का समाधान

ग्‍लोबल वार्मिंग के मुद्दे पर रियो डी जेनेरियो से ले कर कोपेनहेगन तक की बैठक में राष्ट्र प्रमुख अपनी-अपनी चिंता ज़ाहिर कर चुके हैं, लेकिन दुख की बात यह है कि उनकी यह चिंता अब तक किसी ठोस समाधान के रूप में नहीं बदल सकी है. इस विश्व-व्यापी समस्या का एक शुरुआती लेकिन ठोस समाधान निकाला है बिहार के पूर्वी चंपारण ज़िले के विरेंद्र कुमार सिन्हा ने.

Read more

ग्‍लोबल वॉर्मिंग कानूनी पहलू और अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय

पिछले कुछ वर्षों में पर्यावरण में जो बदलाव आ रहे हैं, उनके कारण देश भर में इस विषय पर गंभीर बहस चलने लगी है. इन बदलावों को नियमित करने वाले क़ानून पर्यावरण से जुड़े विस्तृत न्याय व्यवस्था का एक हिस्सा हैं. इस संदर्भ में आम राय यह है कि प्रदूषण एक ऐसी समस्या है जो राष्ट्रीय सीमाओं से परे है और जिसको नियंत्रित करने की दिशा में हर राष्ट्र को पहल करनी चाहिए.

Read more