पंजाब में नहरों का जाल है. गुजरात और महाराष्ट्र विकसित राज्य की श्रेणी में हैं. बावजूद इसके यहां के किसानों को आत्महत्या करनी प़डती है. इसके मुक़ाबले राजस्थान का शेखावाटी एक कम विकसित क्षेत्र है. पानी की कमी और रेतीली ज़मीन होने के बाद भी यहां के किसानों को देखकर एक आम आदमी के मन में भी खेती का पेशा अपनाने की इच्छा जागृत होती है, तो इसके पीछे ज़रूर कोई न कोई ठोस वजह होगी. आखिर क्या है वह वजह, जानिए इस रिपोर्ट में:
Tags: Developed, Farmer, Farming, Foundation, Morarka Foundation, Organic, Rajasthan, Revolution, Shekhawati, chemical, crop, suicide, water, आत्महत्या, किसान, क्रांति, खेती, जैविक, पानी, फसल, फाउंडेशन, मोरारका फाउंडेशन, राजस्थान, रासायनिक, विकसित, शेखावाटी Posted in पर्यावरण, राज्य, समाज, स्टोरी-6 by Author: शशि शेखर | No Comments » | Read More... |
इंसान ही नहीं दुनिया की कोई भी नस्ल जल, जंगल और ज़मीन के बिना ज़िंदा नहीं रह सकती. ये तीनों हमारे जीवन का आधार हैं. यह भारतीय संस्कृति की विशेषता है कि उसने प्रकृति को विशेष महत्व दिया है. पहले जंगल पूज्य थे, श्रद्धेय थे. इसलिए उनकी पवित्रता को बनाए रखने के लिए मंत्रों का सहारा लिया गया. मगर गुज़रते व़क्त के साथ जंगल से जु़डी भावनाएं और संवेदनाएं भी बदल गई हैं.
Tags: Author, Indian, Land, Mantra, book, culture, forest, life, nature, people, publishing, race, water, इंसान, जंगल, जल, जीवन, नस्ल, पुस्तक, प्रकाशन, प्रकाशित, प्रकृति, भारतीय, मंत्र, लेखक, संस्कृति, ज़मीन Posted in कला और संस्कृति, जरुर पढें, समाज, साहित्य by Author: फ़िरदौस ख़ान | No Comments » | Read More... |
यूनेस्को ने यूनाइटेड नेशन्स वर्ल्ड वाटर डेवलपमेंट रिपोर्टः मैनेजिंग वाटर अंडर अनसर्टेंटी एंड रिस्क पेश की है. इस रिपोर्ट में 2009 के विश्व बैंक के दस्तावेज़ का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि भारत में विश्व बैंक के आर्थिक सहयोग से राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण ने 2009 में एक परियोजना चलाई थी, जिसका उद्देश्य 2020 तक बिना ट्रीटमेंट के नाली तथा उद्योगों के गंदे पानी को गंगा में छोड़े जाने से रोकना था, ताकि गंगा के पानी को सा़फ किया जा सके. गंगा के प्रदूषण के लिए खुली जल निकासी व्यवस्था सबसे अधिक ज़िम्मेदार है.
Tags: Food, Indian, Policy, crisis, drinking water, government, law, rights, risk, water, water companies, अधिकार, कंपनियां, खतरा, जल, नीति, पानी, पेयजल, भारतीय, भोजन, संकट, सरकार, क़ानून Posted in आर्थिक, कानून और व्यवस्था, जरुर पढें, पर्यावरण, राजनीति, राज्य, विधि-न्याय, समाज by Author: गोपाल कृष्ण | No Comments » | Read More... |
1981 बैच के आईडीएएस अधिकारी सुनील कुमार कोहली जल संसाधन मंत्रालय में संयुक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार बनाया गया है. वह अनन्या रे की जगह लेंगे.
Tags: Aidias, Aidiis, Chairman, Home, IAS, IT, JS, Ministry, Secretary, Woman, cat, child, consultant, development, director, financial, officers, resources, water, अधिकारी, आईएएस, आईटी, आईडीइएस, आईडीएएस, गृह, चैयरमैन, जल, जेएस, निदेशक, बाल, मंत्रालय, महिला, विकास, वित्तीय, संसाधन, सचिव, सलाहकार, सीएटी Posted in जरुर पढें, समाज by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
जल, थल और नभ, भ्रष्टाचार के कैंसर ने किसी को नहीं छोड़ा. जहां उंगली रख दीजिए, वहीं भ्रष्टाचार का जिन्न निकल आता है. बड़े घोटालों की बात अलग है. ऐसे सरकारी संगठन भी हैं, जिनके बारे में अमूमन आम आदमी नहीं जानता और इसी का फायदा उठाकर वहां के बड़े अधिकारी वह सब कुछ कर रहे हैं, जिसे संस्थागत भ्रष्टाचार की श्रेणी में आसानी से रखा जा सकता है.
Tags: Corruption, Land, Ministry, NPCC, Scandal, case, officers, plan, project, resources, sky, water, अधिकारी, एनपीसीसी, घोटाला, जल, थल, नभ, परियोजना, भ्रष्टाचार, मंत्रालय, मामला, योजना, संसाधन Posted in आर्थिक, कवर स्टोरी-2, कानून और व्यवस्था, राजनीति, राज्य, विधि-न्याय, समाज by Author: अभिषेक रंजन सिंह | No Comments » | Read More... |
शहर हो या गांव, सरकारी विभागों को लेकर हर आदमी की परेशानी एक सी होती है. कभी बिजली विभाग, कभी जल विभाग, कभी टेलीफोन विभाग. चूंकि इन सभी विभागों से आपका साबका पड़ता है और जब कोई काम समय से न हो रहा हो, तब परेशान होना स्वाभाविक है.
Tags: City, Department, Electric, RTI, government, village, water, आदमी, गांव, जल, बिजली, विभाग, शहर, सरकारी Posted in कानून और व्यवस्था, जरुर पढें, विधि-न्याय, समाज by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
पानी हमारे जीवन की मूल्यवान वस्तु है. जल के बिना हम जीवन का तसव्वुर भी नहीं कर सकते. आज विश्व के हर कोने में पानी का अभाव होने लगा है. पानी के स्रोत तेजी से घटते जा रहे हैं. यह समस्या इतनी जटिल होती जा रही है कि अब लोग यह तक कहने लगे हैं कि अगला विश्व युद्ध पानी को लेकर होगा.
Tags: Morarka, Shekhavati, Source, World, life, soil, water, जीवन, पानी, मिट्टी, मोरारका, विश्व, शेखावाटी, स्रोत Posted in जरुर पढें, पर्यावरण, समाज by Author: डॉ. कमर तबरेज | No Comments » | Read More... |
प्रदूषण वायु, जल और धरती की भौतिक, रासायनिक और जैविक विशेषताओं का एक ऐसा अवांछनीय परिवर्तन है, जो जीवन को हानि पहुंचा सकता है. दुनिया भर में हो रहे तथाकथित विकास की प्रक्रिया ने प्रकृति एवं पर्यावरण के सामंजस्य को झकझोर दिया है. इस असंतुलन के चलते लद्दा़ख जैसे सुंदर क्षेत्र भी प्रदूषण जैसी समस्या से प्रभावित हुए हैं.
Tags: Ladakh, pollution, problems, water, weather, जल, पर्यावरण, पानी, प्रदूषण, मौसम, लद्दाख, समस्या Posted in जरुर पढें, पर्यावरण, विधि-न्याय by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
अयोध्या-खिफैज़ाबाद शहरों को अपने आंचल में समेट, युगों-युगों से लोगों को पुण्य अर्जन कराती सरयू नदी की कोख भी अब मैली हो चली है. सरयू का पवित्र जल तो दूषित हुआ ही, भूजल में भी हानिकारक रसायनों की मात्रा बढ़ती जा रही है. दोनों शहरों के क़रीब दो दर्जन इंडिया मार्का हैंडपंपों में नाइट्रेट, आयरन आदि तत्वों की अधिकता पाई गई है.
Tags: Contaminated, Mally, Saryu, dangerous, drinking water, pollution, river, water, खतरनाक, जल, दूषित, नदी, पानी, पेयजल, प्रदूषण, मैली, सरयू, हानिकारक Posted in कानून और व्यवस्था, जरुर पढें, पर्यावरण, विधि-न्याय, स्वास्थ्य by Author: सियाराम यादव | No Comments » | Read More... |
चंबल, नर्मदा, यमुना और टोंस आदि नदियों की सीमाओं में बसने वाला क्षेत्र बुंदेलखंड तेज़ी से रेगिस्तान बनने की दिशा में अग्रसर है. केन और बेतवा को जोड़कर इस क्षेत्र में पानी लाने की योजना मुश्किलों में फंस गई है. जो चंदेलकालीन हज़ारों तालाब बुंदेलखंड के भूगर्भ जल स्रोतों को मज़बूती प्रदान करते थे, वे पिछले दो दशकों के दौरान भू-मा़फिया की भेंट चढ़ गए हैं.
Tags: Betwa, Bundelkhand, crisis, death, livestock, planning, pollution, river, water, जल, नदी, पानी, प्रदूषण, बुंदेलखंड, बेतवा, मवेशी, मौत, योजना, संकट Posted in कानून और व्यवस्था, जरुर पढें, पर्यावरण, राज्य, विधि-न्याय by Author: सुरेंद्र अग्निहोत्री | No Comments » | Read More... |
|
व्यवस्था संविधान को धोखा देकर बनी है |
|