सरकार खिलाडि़यों से खेल रही है

कुछ दिन पहले पान सिंह तोमर नाम की एक फिल्म आई थी. फिल्म के निर्देशक तिगमांशु धूलिया ने खिलाड़ी से बाग़ी बनने की एक कहानी को रूपहले परदे पर दिखाया. हिमांशु ने इस फिल्म को उन खिलाड़ियों को समर्पित किया, जिन्होंने देश के गौरव और सम्मान के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया और इसके बाद भी वे गुमनामी और बदहाली में जीने को मजबूर रहे.

Read more

बरुआ और कोचर निदेशक बने

1985 बैच के आईआईआरएस अधिकारी नीलिमेश बरुआ को कंपनी मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत एसएफआईओ (सीरियस फ्रॉड इंवेस्टिगेशन ऑफिस) का निदेशक बनाया गया है. वह अनुज कुमार विश्नोई की जगह लेंगे, जिन्हें रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत एक्स सर्विसमैन वेलफेयर में अतिरिक्त सचिव बनाया गया है.

Read more

नक्सलियों की रोकने की कवायद

अभी कुछ दिनों पहले केंद्र सरकार की तऱफ से वनवासियों एवं आदिवासियों के कल्याण और उनके हितों का ध्यान रखने के लिए कई सकारात्मक क़दम उठाए गए हैं तथा अनेक पहल के संकेत भी मिले हैं. भ्रष्टाचार के आरोपों से चौतरफा घिरी और विपक्ष के हमलों से हलकान केंद्र सरकार को अब देश के जंगलों और पिछड़े इलाक़ों में रहने वाले आदिवासियों और जंगल आधारित उत्पादों के सहारे जीवन बसर करने वाले लोगों की याद आई है.

Read more

जमात-ए-इस्‍लामी ने नई पार्टी बनाईः उत्तर प्रदेश होगा पहला निशाना

एक नई पार्टी बनी है. इस पार्टी के उद्घाटन समारोह में एक क्रिश्चियन पादरी ने गायत्री मंत्र पढ़ा तो आश्चर्य हुआ, क्योंकि इस पार्टी की जड़ में जमात-ए-इस्लामी हिंद है, जिसके बारे में लोग यह मानते हैं कि यह एक कट्टर मुस्लिम संगठन है. यह सच है कि कोई सियासी पार्टी मुसलमानों के विकास के बारे में ईमानदारी से नहीं सोचती, बस नारे ही देती है.

Read more

श्रमिकों के लिए केवल तीन प्रतिशत कल्‍याण राशि उपलब्‍ध

श्रमिकों के कल्याण के लिए उपलब्ध फंड का उपयोग नहीं किया जा रहा है. जो राशि इनके कल्याण के लिए आती है वह किसी और की जेब में जा रही है और यह सब इसलिए क्योंकि राज्य सरकार ने उसके लिए ज़रूरी राज्य सलाहकार समिति का गठन नहीं किया है. छत्तीसगढ़ सरकार के अलावा स्वयं केंद्र की सरकार श्रमिकों के कल्याण के लिए चलाए जाने वाली योजनाओं केवल औपचारिकता बनाकर रखना चाहती है.

Read more

विंध्‍य हर्बल सफल सहकारी संस्‍था

सरकारी प्रयासों से जनकल्याण के काम बिना रुकावट पूरे होते रहें, यह लगभग असंभव बात मानी जाती है. पर जब आप मध्य प्रदेश लघु वनोपज संघ के द्वारा बनाई गई विंध्य हर्बल संस्था के कामकाज को देखेंगे तो मानेंगे कि जनकल्याण के लिए सरकारी प्रयासों की कमी नहीं है. विंध्य हर्बल संस्था प्रदेश स्तर पर ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर भी आयुर्वेदिक औषधियों से संबंधित संग्रहण, उत्पादन, शोधन, दवा निर्माण एवं उसकी बिक्री का काम करती है.

Read more