नई वाली हिंदी को नए विषय की दरकार

नई वाली हिंदी की ब्रैंडिंग के बाहर के लेखक चेतन भगत और पंकज दूबे ने भी यूनिवर्सिटी जीवन को केंद्र

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प्रकाशन जगत में कॉरपोरेट की दस्तक

भारत में प्रकाशन जगत को उद्योग का दर्जा प्राप्त नहीं है, बहुधा हमारे हिंदी के प्रकाशक इस बात को अलग-अलग

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‘मैं और मेरा’ के चक्रव्यूह में सृजन

आज के साहित्यिक परिदृष्य पर अगर नजर डालें तो ‘मैं’, ‘मेरा’ और ‘मेरी’ की ध्वनियों का कोलाहल सुनाई देता हैं.

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वरिष्ठ साहित्यकारों को तकनीक से परहेज़ क्यों?

पिछले दिनों कुछ वरिष्ठ साहित्यकारों से बात हो रही थी. उस बातचीत में एक आलोचक और एक कवि-आलोचक भी थे.

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लेखिका के एक मज़ाक ने बदल दी पुलिस वाले की जिंदगी, पढ़े पूरी स्टोरी

नई दिल्ली, (विनीत सिंह) : मशहूर लेखिका शोभा डे ने हाल ही में ट्वीट करके एक वजनी पुलिसवाले को लेकर सोशल

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पॉपुलर कॉमेडी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के लेखक का निधन

नई दिल्ली :  छोटे पर्दे का सबसे पॉपुलर कॉमेडी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ एक लंबे समय से लोगो

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पुरस्कार वापसी का पुरस्कार पार्ट-2

चंद दिनों पहले विश्‍व कविता समारोह के आयोजन के हवाले से पुरस्कार वापसी का पुरस्कार शीर्षक से इस स्तंभ में

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अभिव्यक्ति पर पाबंदी है और विपक्ष गायब है-प्रो. चौथी राम यादव

लोकसभा चुनाव-2014 के बाद परिस्थितियां तेजी से बदली हैं और यह पहली बार है कि लेखकों के लिखने और बोलने

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किशोर कुमार के बारे में : कुछ म़जेदार जानकारियां

बहुमुखी प्रतिभा के धनी गायक, संगीतकार, अभिनेता, निर्माता, लेखक जैसे किशोर कुमार  के  कई रूप हमें देखने को मिले. किशोर

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बाज़ार का बेवजह विरोध

बाज़ार का विरोध एक हद तक उचित हो सकता है, लेकिन सुबह-शाम, उठते-बैठते बाज़ार को गाली देने का फैशन ऩुकसानदेह

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जॉर्ज फर्नांडीज जैसी विभूतियां हमारी धरोहर हैं : लोहिया को देखते रह गए जॉर्ज

जॉर्ज फर्नांडीज ने प्रारंभिक जीवन में कोंकड़ी युवक नामक कोंकण समाचार-पत्र के साथ-साथ कन्नड़ साप्ताहिक रैथवाणी में काम किया था.

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बिहार विधान परिषद चुनाव : प्रत्याशियों की नहीं, सुप्रीमो की अग्नि परीक्षा

बिहार के राजनीतिक हलकों में लाख टके का सवाल है कि विधान परिषद चुनाव में क्या होगा? इसका उत्तर बहुत

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बेबाक ज़िंदगी, बिंदास अदा

हाल में वहीदा रहमान की जीवनी-कनवर्सेशन विद वहीदा और दिलीप कुमार की आत्मकथा-दिलीप कुमार : दे सब्सटेंश एंड द शैडो

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जीवन की सच्चाई समझने का सबक

भारतीय समाज में धर्म की स्थापना और उसकी सेवा के लिए एक वर्ग बनाया गया. यह इसलिए आवश्यक था, क्योंकि

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व्यक्तित्व विकास की पहली पाठशाला

पुस्तक लिखना महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण है कि लेखक ने अपनी पुस्तक के जरिये पाठकों को, समाज को आख़िर

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बाज़ार पर लेखकों का जादू

अपनी किताब वन लाइफ इज नॉट एनफ के विमोचन के मौ़के पर पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने ऐलान किया

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अद्भुत अभिव्यक्ति और जिजीविषा का अनूठा दस्तावेज़

आत्मकथा-हमारे पत्र पढ़ना की लेखिका, कवयित्री एवं कथाकार उर्मिल सत्यभूषण का जन्म पंजाब के गुरुदासपुर ज़िले में बीसवीं शताब्दी के

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सूत्र एक, आख्यान तीन

अपने उपन्यास कठगुलाब पर लिखते हुए मृदुला गर्ग ने कठगुलाब कैसे उगा शीर्षक से एक लेख लिखा था. उस लेख

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विधा का सन्नाटा तोड़ती किताब

हिंदी में पाठकों की कमी का रोना दशकों से रोया जा रहा है, छाती कूटी जा रही है, लेकिन कभी

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जननायक को समझने की कोशिश

पत्रिका परिषद साक्ष्य का यह नया अंक है. बिहार विधान परिषद की यह अनियतकालीन वैचारिक-साहित्यिक पत्रिका तक़रीबन पंद्रह वर्षों से

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जादुई यथार्थवाद के चितेरे का जादू

एक इंटरव्यू में गाब्रिएल गार्सिया मार्केज से जब पूछा गया था कि अगर किसी लेखक को सफलता या प्रसिद्धि जल्द

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एस पी सिंह और एम जे अकबर

आज पत्रकारिता के मायने बदल गए हैं, बदल रहे हैं अथवा बदल दिए गए हैं, नतीजतन, उन पत्रकारों के सामने

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लाजवाब फनकार गुलज़ार

गीतकार, निर्देशक एवं पटकथा लेखक गुलज़ार को फिल्म जगत के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के अवॉर्ड-2013 के लिए चुना गया

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