दुश्मन के साथ लंच

मुग़ल-ए-आज़म अकबर सफेद कपड़ों में गर्म बालू पर नंगे पैर चलते हुए अजमेर गए थे. उन्हें मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह से बेटे के लिए आशीर्वाद की आवश्यकता थी. उनके पीछे सजे-धजे हाथी चल रहे थे, लेकिन उन हाथियों के हौदे खाली थे. यह सत्ता की ताक़त को दिखाता था. आसिफ अली ज़रदारी भी अजमेर गए, लेकिन उनके पास एक नहीं, बल्कि ऐसे कई मुद्दे थे, जिनके लिए उन्हें इस संत के आशीर्वाद की आवश्यकता है.

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रूस का बदला रूख

रूस के सोची सी-रिसॉर्ट में चार देशों के सम्मेलन को एक महीने से ज़्यादा व़क्त गुज़र चुका है, लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारी अब तक इस पर कोई बयान देने से बचते रहे हैं. रूस के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव की मेज़बानी में आयोजित इस सम्मेलन में पाकिस्तान, अ़फग़ानिस्तान एवं तजाकिस्तान शामिल थे.

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हमने इतिहास से कुछ नहीं सीखा

एक राष्ट्र के रूप में आज हम जिन समस्याओं से रूबरू हैं, वह बेवजह नहीं है. आतंकवाद, बढ़ती बेरोज़गारी, ग़रीबी, शिक्षा का अभाव, संस्थाओं के बीच टकराव और सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने के लिए मची होड़ आदि सारी समस्याओं की जड़ में दशकों का कुशासन और देश के प्रति हमारी प्रतिबद्धता में कमी है.

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