मो रफीक चौहान(एडवोकेट)
मुख्य प्रदेश संयोजक
हरियाणा मुस्लिम खिदमत सभा
केन्द्र की कांग्रेस सरकार द्वारा मुसलमानों को आरक्षण देने की घोषणा क्या की कि भाजपा नेताओं के पेट में दर्द उठना शुरु हो गया और उनका मुस्लिम विरोधी जग जाहिर चेहरा स्पष्ट रुप से उभर कर सामने आ गया।
विपक्ष एंव भाजपा नेता श्रीमति सुषमा स्वराज पिछले दिनों लोकसभा में चीख-चीख कर कह रही थी कि मुसलामानों को धर्म के आधार पर आरक्षण देना गलत ही नही, अपितु देश में गृहयुद्ध के लिए एक कदम है। हरियाणा मुस्लिम खिदमत सभा माननीय विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और भाजपा के उन नेताओं से पुछना चाहती है कि क्या हमारे देश में पहले धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं है। यदि उनको मालूम नहीं तो हरियाणा मुस्लिम खिदमत सभा उनको बताती है।
हमारे देश के संविधान के अनुच्छेद 341 में पारित नियम 1950 में सन् 1950 में जो आरक्षण अनुसुचित जातियों को प्रदान किया गया था। उसमें साफ तौर पर कहा गया है कि उनुसूचित जातियों दिए जाने वाला आरक्षण केवल हिन्दू धर्म में विधमान अनुसूचित जातियों को ही दिया जाएगा।
उसके बाद सिक्ख धर्म के नेताओं द्वारा विरोध करने पर 1956 में उन अनुसूचित जातियों को आरक्षण दिया गया जो सिक्ख धर्म से सम्बन्ध रखती है। 1990 में बौद्ध धर्म के अनुयायियों विरोध करने पर एक बार फिर नियम 1950 में संशोधन करके बौद्ध धर्म की अनुसूचित जातियों को भी आरक्षण का लाभ दिया गया। जबकि मुस्लिम और ईसाई धर्म में विधमान अनुसूचित जातियों को आज तक इस आरक्षण के लाभ से दूर रखा गया है।
यदि देश के संविधान में उपरोक्त आरक्षण की व्यवस्था धर्म के आधार पर पहले से ही विधामान है। तो फिर मुस्लमानों को दिए जाने वाले आरक्षण से भाजपा नेताओं के पेट में दर्द में उठना बेइमाना नहीं तो और क्या है।
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कल विपक्ष की नेता श्रीमति सुषमा स्वराज चिखचिख कर मुस्लिम आरक्षण पर अपना धर्म के आधार पर एतराज जता रही थी। लगता है शायद सुषमा जी ने भारतीय संविधान का अध्ययन ही नहीं किया है। उनको मालूम होना चाहिए कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341 के अन्तर्गत नियम 1950 में जो SC और ST को जो आरक्षण दिया गया है। वे धर्म के आधार पर नहीं है तो और क्या है।
kangress यह samghne के bhool कर रही है की यह देश हमारे बाप दादा की bapoti है इश देश के लोग unparh हैं
केवल चुनावी टिप्स देकर rahul gandhi यह samgh रहें है की up main अभी भी बेवकूफ भरे पड़े है kangress तो केवल angregon की neeti अपनारही है भिखारी को दो पैसा दे दो तो वह खुश हो जाता है अगर वह पढ़ लिख लेगा तो सब कुछ समघ जायगा इश यह सरकार सिछा नीत में कोई भी sudhar नहीं ला रही है देश के लोगों को बहूत सोच समघ कर फैसला लेना होगा राहुल को जहाँ बोलना चाहीये वहां तो उनकों कुछ समझा में नहीं आता है वो तो केवल up को फतह करना chahtay हैं sorry राहुल जी में भी up se ही हूँ.
अगर इस बेईमान सरकार का बस चलता तो इन शहीदों को दोषी बना देती और संसद पर हमला करने वालों को मासूम और बेगुनाह साबित करके उनके परिवार वालों को भारी भरकम मुआवज़ा भी अदा कर देती और मारे गये मासूम आतंकवादियों की तस्वीरें संसद परिसर में लगाकर उनपर फूलों के हार भी डालती . इन बेशर्म नेताओं की करतूतों को देख सुन कर दिल यही कहता है की काश उन आतंकवादियों का मिशन सफल हो गया होता.
चोर,लुटेरे,बेईमान और भ्रष्टाचारी गद्दारों ने मक्कारी से इस देश की सत्ता पर कब्ज़ा जमा लिया है और ये देशद्रोही पुलिस और न्यायपालिका को अपने इशारों पर नचा रहे हैं.
एक और तारीख ? यह सिर्फ हमारी न्याय प्रणाली की धीमी गति का नहीं बल्कि इसके पंगु होने का ही आभास दिलाती है. जिस प्रकार के ठोस सबूत चिदम्बरम के खिलाफ मौजूद हैं , उनके आधार पर तो न सिर्फ इस बेशर्म बेईमान गद्दार को सलाखों के पीछे होना चाहिए था बल्कि अब तक सुप्रीमकोर्ट द्वारा भी इसकी सज़ा की पुष्टि तक हो जानी चाहिए थी.
हमें चौथी दुनिया की अजेंशी चाहिए.हमें क्या करना होगया हमारा नाम शिव रमण राठौर जिला दतिया म.प mob.९८३०८५९४८
http://www.youtube.com/watch?v=-YbUEZfJJaQ&feature=रेलातेद
जेस्तुस एक बोध
मो रफीक चौहान(एडवोकेट)
मुख्य प्रदेश संयोजक
हरियाणा मुस्लिम खिदमत सभा
केन्द्र की कांग्रेस सरकार द्वारा मुसलमानों को आरक्षण देने की घोषणा क्या की कि भाजपा नेताओं के पेट में दर्द उठना शुरु हो गया और उनका मुस्लिम विरोधी जग जाहिर चेहरा स्पष्ट रुप से उभर कर सामने आ गया।
विपक्ष एंव भाजपा नेता श्रीमति सुषमा स्वराज पिछले दिनों लोकसभा में चीख-चीख कर कह रही थी कि मुसलामानों को धर्म के आधार पर आरक्षण देना गलत ही नही, अपितु देश में गृहयुद्ध के लिए एक कदम है। हरियाणा मुस्लिम खिदमत सभा माननीय विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और भाजपा के उन नेताओं से पुछना चाहती है कि क्या हमारे देश में पहले धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं है। यदि उनको मालूम नहीं तो हरियाणा मुस्लिम खिदमत सभा उनको बताती है।
हमारे देश के संविधान के अनुच्छेद 341 में पारित नियम 1950 में सन् 1950 में जो आरक्षण अनुसुचित जातियों को प्रदान किया गया था। उसमें साफ तौर पर कहा गया है कि उनुसूचित जातियों दिए जाने वाला आरक्षण केवल हिन्दू धर्म में विधमान अनुसूचित जातियों को ही दिया जाएगा।
उसके बाद सिक्ख धर्म के नेताओं द्वारा विरोध करने पर 1956 में उन अनुसूचित जातियों को आरक्षण दिया गया जो सिक्ख धर्म से सम्बन्ध रखती है। 1990 में बौद्ध धर्म के अनुयायियों विरोध करने पर एक बार फिर नियम 1950 में संशोधन करके बौद्ध धर्म की अनुसूचित जातियों को भी आरक्षण का लाभ दिया गया। जबकि मुस्लिम और ईसाई धर्म में विधमान अनुसूचित जातियों को आज तक इस आरक्षण के लाभ से दूर रखा गया है।
यदि देश के संविधान में उपरोक्त आरक्षण की व्यवस्था धर्म के आधार पर पहले से ही विधामान है। तो फिर मुस्लमानों को दिए जाने वाले आरक्षण से भाजपा नेताओं के पेट में दर्द में उठना बेइमाना नहीं तो और क्या है।
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हमारे तथाकथित महान लोकतंत्र के तथाकथित मंदिर में तथाकथित महापंचायत अर्थात बेईमान,मक्कार,झूठे,धोखेबाज़,गद्दार और भ्रष्टाचारी नेताओं का महाकुम्भ.
कल विपक्ष की नेता श्रीमति सुषमा स्वराज चिखचिख कर मुस्लिम आरक्षण पर अपना धर्म के आधार पर एतराज जता रही थी। लगता है शायद सुषमा जी ने भारतीय संविधान का अध्ययन ही नहीं किया है। उनको मालूम होना चाहिए कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341 के अन्तर्गत नियम 1950 में जो SC और ST को जो आरक्षण दिया गया है। वे धर्म के आधार पर नहीं है तो और क्या है।
kangress यह samghne के bhool कर रही है की यह देश हमारे बाप दादा की bapoti है इश देश के लोग unparh हैं
केवल चुनावी टिप्स देकर rahul gandhi यह samgh रहें है की up main अभी भी बेवकूफ भरे पड़े है kangress तो केवल angregon की neeti अपनारही है भिखारी को दो पैसा दे दो तो वह खुश हो जाता है अगर वह पढ़ लिख लेगा तो सब कुछ समघ जायगा इश यह सरकार सिछा नीत में कोई भी sudhar नहीं ला रही है देश के लोगों को बहूत सोच समघ कर फैसला लेना होगा राहुल को जहाँ बोलना चाहीये वहां तो उनकों कुछ समझा में नहीं आता है वो तो केवल up को फतह करना chahtay हैं sorry राहुल जी में भी up se ही हूँ.
अगर इस बेईमान सरकार का बस चलता तो इन शहीदों को दोषी बना देती और संसद पर हमला करने वालों को मासूम और बेगुनाह साबित करके उनके परिवार वालों को भारी भरकम मुआवज़ा भी अदा कर देती और मारे गये मासूम आतंकवादियों की तस्वीरें संसद परिसर में लगाकर उनपर फूलों के हार भी डालती . इन बेशर्म नेताओं की करतूतों को देख सुन कर दिल यही कहता है की काश उन आतंकवादियों का मिशन सफल हो गया होता.
पुराने याद ताजा हो गये
चोर,लुटेरे,बेईमान और भ्रष्टाचारी गद्दारों ने मक्कारी से इस देश की सत्ता पर कब्ज़ा जमा लिया है और ये देशद्रोही पुलिस और न्यायपालिका को अपने इशारों पर नचा रहे हैं.
एक और तारीख ? यह सिर्फ हमारी न्याय प्रणाली की धीमी गति का नहीं बल्कि इसके पंगु होने का ही आभास दिलाती है. जिस प्रकार के ठोस सबूत चिदम्बरम के खिलाफ मौजूद हैं , उनके आधार पर तो न सिर्फ इस बेशर्म बेईमान गद्दार को सलाखों के पीछे होना चाहिए था बल्कि अब तक सुप्रीमकोर्ट द्वारा भी इसकी सज़ा की पुष्टि तक हो जानी चाहिए थी.