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बौद्ध धर्म का पतन

हमने पिछली बार यह चर्चा की थी कि किस तरह बौद्ध धर्म पर भी सनातन धर्म की कुरीतियां हावी हो गईं, और वह छाया कितनी बड़ी हो गई. बौद्ध धर्म के श्रावयकयान से सहजयान बनने तक की दूरी बहुत ज़्यादा है और इन दोनों के रूप भी परस्पर मेल नहीं खाते हैं. दरअसल हीनयान ही बुद्ध का मौलिक धर्म था और बाद को महायान हो या सहजयान, दरअसल वे बौद्ध धर्म के पतन के ही प्रतीक थे. मौलिक तौर पर बुद्ध ने भोग के त्याग एवं आचारों की पवित्रता को ही प्रधान माना था, लेकिन बाद के काल में जिन सांसारिक सुखों को बुद्ध ने निर्वाण पाने में बाधा बताया था, वही सुख बौद्ध धर्म और आचार के प्रधान हो गए.

बौद्ध धर्म की वज्रयान शाखा पर तो शाक्त और वामाचारी प्रभाव बुरी तरह हावी हो गए. शाक्तों में तंत्र-मंत्र और योग की प्रधानता है. उनका भी दर्शन दरअसल अद्वैत दर्शन से प्रभावित है. जब परमात्मा और तत्व एक हो जाते हैं, तो दरअसल उनके बीच का भेद भी मिट जाता है, वामाचार असल में शून्य से शून्य की यात्रा है. इस दर्शन के अनुसार पुरुष और प्रकृति (नारी) का मिलन ही असल में मोक्ष या निर्वाण की प्राप्ति का रास्ता है.

बुद्ध ने नारियों का प्रवेश निषिद्ध बताया था, लेकिन जब स्त्रियां भी मठों और संघों में (अक्सर युवतियां) प्रवेश करने लगीं, तो भिक्षुओं का ब्रह्मचारी रहना लगभग असंभव हो गया. अपने स्खलन को जायज़ ठहराने के लिए ही फिर उन्होंने तरह-तरह के तर्क गढ़े. बौद्ध धर्म शास्त्र चूंकि उनके कार्यों का समर्थन नहीं करते थे, इसीलिए इन लोगों ने अपने समाज को गुह्य समाज का नाम दिया. इसी तरह जब उनके समाज में अधिक लोग हो गए, तो उन्होंने अपना धर्मशास्त्र तक बना लिया. इनके पहले धर्मशास्त्र का नाम ही गुह्य-समाज तंत्र था. मज़े की बात तो यह कि इसमें ख़ुद बुद्ध के मुंह से कहलवा दिया गया कि तंत्र-मार्ग का बौद्ध धर्म से कोई विरोध नहीं है.

कुल मिलाकर, बौद्ध धर्म तो महायान की शुरुआत से ही तंत्र-मार्ग की ओर झुकने लगा था. हां, चौथी शताब्दी के बाद तो यह मुख्य तौर पर तंत्र-मार्ग का ही अनुसरण करने लगा. इसके बाद वज्रयान के आते-आते तो बौद्ध धर्म की तमाम मान्यताओं को ही सिर के बल खड़ा कर दिया. पहली बार, इसमें बताया गया कि समाधि और योग में सफलता पाने के लिए शक्ति यानी स्त्री की उपस्थिति ज़रूरी है. तंत्रमार्ग का सार यह है कि विष ही विष को काट सकता है. इसी तरह जब मानव अद्वैतवादी हो जाता है, तो फिर खाद्य, अखाद्य, पेय-अपेय का तो प्रश्न ही नहीं उठता. पंच मकारों-मत्स्य, मांस, मदिरा, मुद्रा और मैथुन-के उपयोग से तंत्रमार्गी साधना का जन्म भी इसी तर्क पर हुआ. हालांकि, इसके बेहद नकारात्मक प्रभाव पड़े और तांत्रिकों को भय की नज़र से ही देखा जाने लगा. इस पर चर्चा और विस्तार से करेंगे, फिलहाल तो बौद्ध धर्म के पतन की बात.

गुह्य-समाज तंत्र से वज्रयान की यात्रा तक तो बुद्ध के तमाम सिद्धांतों की क़ब्र खोद दी गई. जिस शारीरिक कष्ट और त्याग की शिक्षा बुद्ध ने दी थी, उसे ही नकार दिया गया. गुह्य समाज वालों ने खुली घोषणा की कि कृच्छाचार (शरीर को कष्ट देना) से निर्वाण नहीं मिलता, बल्कि वह तो प्रकृति के ख़िला़फ जाना है. इस समाज की मान्यता थी कि वज्रयानी साधुओं को नियमों से सर्वथा स्वाधीन होकर विचरने से भी पाप नहीं लगता है. जब उस तंत्र का बोलबाला हुआ, तो बौद्ध साधक औघड़ों को भी मात देने लगे. यहां तक कि वज्रयान के प्रसिद्ध चौरासी सिद्ध अद्‌भुत प्रकार से रहा करते थे. इनके नाम भी अजब होते थे. ये शराब में मस्त, श्मशानवासी लोग खुलेआम स्त्रियों का उपभोग करते थे. इन सबके बाद बौद्ध धर्म के पतन में शेष ही क्या रह गया था?

8 comments

  • chauthiduniya

    1.बौध धर्म कोई धर्म नहीं है . यह वैगानिक तरीके से जीने का रास्ता है . २.भगवान बुद्ध भगवान नहीं थे . वे संपूर्ण वैगानिक थे .

  • chauthiduniya

    Bhagwan budh k samay me baudh dharm k alawa jo mukhya dharm tha usko hamesha ye khatkta rha ki is dharm ka itna vikas kaise ,ye to hamari dukano ko hi band kra de rha hai,bhagwan budh k samay tak to inki ek na chali bt jb bhagwan parinirwan hua to inki baanche khil gayin aur ek shadyantra k tahat is saddharm k do bhag kr diye.
    ek to saddharm hi rha dusra duhdharm me parivartit kr diya gya.

  • chauthiduniya

    1.बुद्ध का मार्ग कोई धर्म नहीं अपितु मोछ प्राप्ति का मार्ग है। जिसे कोई भी अपना सकता है।
    2.यह सत्य-अहिंसा का मार्ग है जिसका पालन हर मनुष्य को करना चाहिए।
    3.यह आधुनिक ,वैगयानिक,सामाजिक
    विचारों का मार्ग है।जिस पर सभी को चलना चाहिए
    D.N.Divakar

  • chauthiduniya

    Decline of buddism in india
    a)Moral and ethical degeneracy
    b) role of brahmanical hinduism and brahmanical kings.
    c) Sectarianism and the rise of mahayana and vijrayana.
    d) aatacks by arabs and turks
    e) impact of bhakti movement
    f) Sufism.
    बौद्ध धर्म का पतन में मुझे ये सब बिंदु कि चर्चा करनी है. क्या मुझे इन टॉपिक k नोट्स मिल सकते है , या इस बारे में किसी ने ache से एक्सप्लेन किया हो. उसकी साईट या किताब . कृपया बताये

  • chauthiduniya

    baudha dharm me brahman ghuskar usamen sari hinduvadi baten bhar di jisase ab kahana padata hai ki hindu rahkar hi thik hai

  • chauthiduniya

    1.बौध धर्म कोई धर्म नहीं है . यह वैगानिक तरीके से जीने का रास्ता है .
    २.भगवान बुद्ध भगवान नहीं थे . वे संपूर्ण वैगानिक थे .
    नाम -निशांत मौर्य
    ग्राम +पोस्ट धनाडी
    जिला गाजीपुर (उत्तर प्रदेश )-२३२३३०.
    मोबाइल नंबर -7376566451

  • chauthiduniya

    Mahayan mein bahut sare vedic brahmanone ghuskhori ki thi uska natija jo apane bataya vah hain. Is karan bauddha dharm ka bharat mein patan ho gaya.

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