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इमामगंज में नक्‍सलियों का शासन चलता है

इमामगंज में नक्‍सलियों का शासन चलता है

झारखंड की सीमा से लगे बिहार के गया ज़िले का इमामगंज विधान सभा क्षेत्र पूरी तरह से नक्सलियों की जद में है. यहां के लोग प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के प्रभाव क्षेत्र में हैं. सुशासन का दावा करने वाले तमाम पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों का आदेश यहां पूरी तरह से बेअसर साबित हो रहा है. वहीं दूसरी ओर नक्सलियों के किसी भी फरमान को यहां के लोग सर आंखों पर ले लेते हैं. सच कहें, तो नक्सलियों ने बिहार के महत्वपूर्ण विधान सभा क्षेत्र माने जाने वाले इमामगंज में सुशासन की हवा निकाल कर रख दी है. वे रात तो रात, दिन के उजाले में भी जो चाहते हैं, करते हैं.

पिछले साल नक्सलियों ने इमामगंज विधान सभा क्षेत्र के दर्ज़न भर सरकारी भवन तथा इतनी ही संख्या में मोबाइल टावर को डायनामाइट लगाकर उड़ा दिया. इसके अलावा दो पुलिस कर्मियों समेत आधा दर्ज़न लोगों की हत्या कर चार सरकारी रायफलें भी छीन ली थीं. इसके अलावा कई ट्रकों व यात्री वाहनों को दिन-दहाड़े ज़ब्त कर जंगल में ले जाकर उन्होंने अपनी ताक़त का एहसास सुशासन की सरकार को करा दिया है.

विधान सभा के अंतर्गत तीन प्रखंड और पांच थाने,  जैसे इमामगंज, डुमरिया, बांकेबाज़ार, रौशनगंज और कोठी पूरी तरह से माओवादियों के क़ब्ज़े में है. सरकारी विकास के तमाम दावे यहां फेल नज़र आते हैं. प्रखंड या अंचल कार्यालय हो या रेफरल अस्पताल, कन्या प्रोजेक्ट विद्यालय हो या बिजली बोर्ड का विद्युत उपकेंद्र या फिर कोई भी अन्य सरकारी कार्यालय, इन्हें देखने से स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है कि यहां सुशासन के दावों में कितना दम है. किसी भी सरकारी महकमे में नियमित रूप से शायद ही कोई पदाधिकारी या कर्मचारी आता हो. 2005 में जब डुमरिया प्रखंड कार्यालय पर माओवादियों का हमला हुआ था, तो तत्कालीन बीडीओ ने किसी प्रकार भागकर अपनी जान बचाई थी. नतीजा है कि आज सुशासन में भी यहां कोई भी सरकारी कर्मचारी व अधिकारी डरे-सहमे रहकर ही अपने पदस्थापित स्थल पर पहुंचते हैं और खानापूरी कर दोपहर में ही अपने सुरक्षित ठिकाने पर लौट आते हैं. क्षेत्र के सरकारी भवन और मोबाइल टावर भी माओवादियों के रहमों-करम पर है. सड़क हो या अन्य कोई विकास कार्य, कोई भी ठेकेदार बिना लेवी दिए कोई भी कार्य नहीं करा सकता है.

पिछले साल नक्सलियों ने इमामगंज विधान सभा क्षेत्र के दर्ज़न भर सरकारी भवन तथा इतनी ही संख्या में मोबाइल टावर को डायनामाइट लगाकर उड़ा दिया. इसके अलावा दो पुलिस कर्मियों समेत आधा दर्ज़न लोगों की हत्या कर चार सरकारी रायफलें भी छीन ली थीं. इसके अलावा कई ट्रकों व यात्री वाहनों को दिन-दहाड़े ज़ब्त कर जंगल में ले जाकर उन्होंने अपनी ताक़त का एहसास सुशासन की सरकार को करा दिया है.एक तरह से कहें, तो पूरे इमामगंज विधान सभा क्षेत्र में ही माओवादियों की समानांतर सरकार चलती है. छोटी-बड़ी नक्सली घटनाओं को छोड़ भी दें, तो पिछले साल लोक सभा चुनाव के समय इमामगंज विधान सभा क्षेत्र के बांके बाज़ार थाना अन्तर्गत भलुआर मध्य विद्यालय भवन को माओवादिओं ने डायनामाइट से उड़ा दिया था. कारण चुनाव में इस भवन को कलस्टर सेंटर बनाया जाना है. वहीं मतदान के दिन सोलह अप्रैल को प्राथमिक विद्यालय, सिंघापुर में दो पुलिसकर्मियों समेत चार लोगों की हत्या कर माओवादिओं ने हथियार लूट लिए थे. इसके बाद चार जुलाई को डुमरिया से गया आ रही महारानी नाम की दो यात्री बस को दिनदहाड़े मैगरा के समीप से अगवा कर लिया और पांच जुलाई को दोनों बसों को छकरबंधा के जंगल में ले जाकर फूंक डाला. पुलिस कोई कार्रवाई करने में पूरी तरह असमर्थ दिखी.

2009 में दीपावली से पूर्व बीस अक्टूबर को केंद्र सरकार के खिला़फ माओवादिओं ने इमामगंज-डुमरिया की सीमा पर सशस्त्र हथियारों का प्रदर्शन करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और गृहमंत्री पी.चिदंबरम का पुतला फूंका था. इससे पूर्व 2005 के विधान सभा चुनाव में इमामगंज विधान सभा क्षेत्र से लोजपा प्रत्याशी, पूर्व सांसद राजेश कुमार की मैगरा के समीप माओवादिओं ने हमला कर हत्या कर दी थी. समग्र बिहार में सुशासन का ढिंढोरा पीटने वाले विधान सभाध्यक्ष अपने क्षेत्र इमामगंज में माओवादिओं के खिला़फ मुक़म्मल कार्रवाई कर सुशासन का एहसास लोगों को क्यों नही कराना चाहते हैं, यह सवाल आज भी लोगों को चौंका रहा है. हक़ीक़त है कि स्वास्थ्य और शिक्षा में बेहतरी का दावा करने वाले सुशासन की सरकार में भी डुमरिया का रेफरल अस्पताल और प्रोजेक्ट कन्या विद्यालय अब तक नहीं खुल पाया है. यहां पदस्थापित चिकित्साकर्मी और शिक्षक दूसरे जगह कार्य करते हैं. बिजली देने का घोषणा करने वाले इस क्षेत्र के प्रतिनिधि और विस अध्यक्ष डुमरिया व इमामगंज विद्युत उपकेंद्र को चालू कराने में असमर्थ हो रहे हैं. हालांकि शेरघाटी अनुमंडल के अंतर्गत आने वाले इस विधान सभा क्षेत्र के संबंध में एक वरीय पुलिस पदाधिकारी का कहना है कि माओवादिओं के खिला़फ लगातार कार्रवाई जारी है, लेकिन यदि आंकड़े देखे जाएं, तो माओवादी घटना की तुलना में पुलिसिया उपलब्धि नगण्य नज़र आती है. केंद्र और राज्य सरकार की अधिसंख्या विकास योजनाएं इस क्षेत्र में ठप पड़ी हैं.

इस क्षेत्र के लोग पुलिस-प्रशासन के खिला़फ खुलेआम बोलते नज़र आते हैं, लेकिन माओवादिओं के खिला़फ चूं करने की हिम्मत कोई नही जुटा पाता. पूरा इमामगंज विधान सभा क्षेत्र प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी की गिरफ़्त में है, लेकिन इस क्षेत्र के प्रतिनिधि और विस अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी पटना से लेकर अपने क्षेत्र तक कहीं भी माओवादियों के खिला़फ कार्रवाई करने का कोई बयान नहीं दिया है.

1 comment

  • chauthiduniya

    अच्छा होता की उस नेता का नाम भी लेखक महोदय खोलते संकेत में हीं सही , जो इमामगंज में नकस्लियों का संरक्षक है , खैर संकेत मैं दे देता हूं। लिखा भी है । राजेश कुमार सांसद की हत्या विधानसभा चुनाव २००५ के दौरान इमामगंज क्षेत्र में हुई थी , शक की सुई, एक नेता जो विधानसभा के अति सम्मानित पद पर पहले भी थें और इसबार भी निर्वाचित होने के बाद उसी पद पर पुन: बैठे हैं उनके उपर मुडी थी । गया के एसपी परेश सक्सेना और डीआईजी अरबिंद पांडे ने हत्या की फ़ाईल खंगालना शुरु किया तो उनका तबादला कर दिया गया । उक्त विधान सभा के ्पद पर आसीन नेता जी , मुख्य मंत्री के गया प्रवास २०१० के दौरान , एक विधान पार्षद और फ़रार नकस्ली मुरारी यादव के साथ रात के ११ बजे , सरकारी होटल के रेंस्तरा में बीयर पी रहे थे । चुनाव में पांच लोग जो नक्सलियों के साथ मध्यस्था कर रहे थें , उन्हें टिकट मिला । एक औरंगाबाद के बाकी चार गया जिले के । पांचो जित गये। विधानसभा चुनाव के दौरान मैं भी कवरेज कर रहा था लिंक दे रहा हूं नीचे । सबसे मजेदार बात जो दिखी वह थी की कहीं भी बारुदी सुरंग से कोई नही मरा , हां उसे निष्क्रिय करते हुये भले मौत हुई । बारुदी सुरंग को निष्क्रिय करने में पुलिस पुरे चुनाव के दौरान व्यस्त रही । कैसे सुरंग का पता चला और क्यों कोई हादसा नही हुआ , यह जांच की बात है । पुलिस , मिडीया और प्रसाशन का ध्यान बंटाने के लिये सुरंग को प्रायोजित तरीके से लगाया गया था । यही कारण रहा कि न तो चुनाव के दौरान और न हीं बाद में कोई भी बारुदी सुरंगो का शिकार हुआ । अपने रिपोर्टर महोदय को कहें थोडी हिम्मत के साथ लिखें।

    http://www.youtube.com/tiwarygaya

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