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नर्मदा का वजूद खतरे में

नर्मदा नदी के उद्गम स्थल अमरकंटक से लेकर खंभात की खाड़ी तक 18 कोल विद्युत संयंत्र लगाने की तैयारी की जा रही है. विकास के नाम पर नर्मदा के विनाश की यह योजना भारत में नदियों के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह लगाने के लिए का़फी है. क्योंकि इससे निकलने वाली वाली राख से नर्मदा को काफी क्षति पहुंचेगी. मध्य प्रदेश की जीवन रेखा कही जाने वाली नर्मदा नदी को संरक्षित रखने के लिए केंद्र या राज्य सरकार कई दावे कर चुकी है. सरकार के प्रभावशाली नेता और अधिकारी नदियों के संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये ख़र्च करके कई अभियान चलाने का अभिनय करते रहते हैं. सरकार भी इन कार्यक्रमों में कृत्रिम संजीदगी के साथ शामिल होती है और नदियों के संरक्षण के लिए कई दावे एक साथ कर दिए जाते हैं.

हम ज़मीन देना नहीं चाहते क्योंकि अगर इस ज़मीन में बिजली का प्लांट लगा तो क्या हम अनाज की जगह बिजली थोड़ी ही खाएंगे. ये कंपनी सिर्फ हमारी उपजाऊ ज़मीन हड़पना चाहती है.

गुजर पटेल ग्राम खुडिया

केवल मध्य प्रदेश में जबलपुर से लेकर होशंगाबाद तक नर्मदा तट पर चार से पांच थर्मल पावर प्लांट लगाने की कोशिश की जा रही है. नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक से खंभात की खाड़ी तक 18 कोल विद्युत संयंत्र लगाया जाना प्रस्तावित है. एक सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2035 तक गंगा अपना अस्तित्व खो देगी. नर्मदा के 55 से 60 फीसदी पानी का बहाव प्रदेश में लगने वाले चारों थर्मल पावर प्लांट के लिए सुरक्षित रखने को लेकर स्वीकृति की जा चुकी है.

मेरी एक एक़ड ज़मीन में साल में एक लाख से ज़्यादा की फसल पैदा होती है और ये कंपनी वाले सवा लाख रुपये एकड़ जमीन खरीदना चाहते है. उपजाऊपन के मुताबिक़ मेरी ज़मीन 10 लाख रुपये एक़ड के हिसाब से बिकनी चाहिए तो मेरा ज़मीन बेचने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता.

खूब सिंह पटेल

नर्मदा के पास लगने वाले पावर प्लांट मैसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड, ग्राम घनसौर ज़िला सिवनी में प्रस्तावित है. इसकी उत्पादन क्षमता 600 मेगावॉट बताई गई है. दूसरा प्रोजेक्ट नरसिंहपुर ज़िला अंतर्गत गाढरवाड़ा क्षेत्र में एनटीपीसी द्वारा स्थापित किया जा रहा है. इसकी उत्पादन क्षमता 2800 मेगावॉट बताई जाती है. तीसरा प्लांट ज़िला जबलपुर अंतर्गत शाहपुरा भिटोनी क्षेत्र में एमपीईबी द्वारा स्थापित किया जाएगा, इसकी उत्पादन क्षमता 1200 मेगावॉट बताई जाती है. साथ ही ज़िला नरसिंहपुर के झांसी घाट में मैसर्स टूडे एनर्जी द्वारा 5000 करोड़ रुपये की लागत से प्लांट लगाया जाना भी प्रस्तावित है. जबलपुर से 40 किलोमीटर दूर आसपास के 6-7 गांव में मैसर्स टुडे एनर्जी द्वारा स्थापित किए जाने वाले प्लांट के लिए 1100 एकड़ उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है. इस ज़मीन का वाटर लेवल मात्र 50 फुट है. अब तक 74 लोगों की लगभग 300 एकड़ ज़मीन रजिस्ट्री कराई जा चुकी है. इनमें 20 आदिवासी, 30 अनुसूचित जनजाति और 24 अन्य कृषक परिवार शामिल हैं. एक अनुमान के मुताबिक़ झांसी घाट पर बनाए जा रहे प्लांट की राख और धुएं से 5000 एकड़ ज़मीन पर लगी फसल बर्बाद हो जाएगी. इसके साथ ही भेड़ाघाट के संगमरमर सौंदर्य को भी नुकसान पहुंचने की संभावना है.

शर्मा जी और भीखम पटेल नाम के दो आदमी कंपनी की तरफ से आकर हम लोगों को जमीन बेचने के लिए डराते धमकाते हैं और कहते हैं कि कैसे भी करके ज़मीन हम लेकर रहेंगे, जबकि हम किसी भी क़ीमत पर अपनी ज़मीन नहीं बेचना चाहते.

मीरा बाई

ज़ाहिर है, विकास के नाम पर जल संसाधनों का जिस तरह का व्यापक दोहन आने वाले समय में एक भीषण जल संकट को जन्म देने जा रहा है. प्राकृतिक हालातों को देखते हुए, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को मंच से चिंता व्यक्त करने के स्थान पर ज़मीनी सच्चाईयों से रू-ब-रू होना होगा, तभी प्रकृति की रक्षा संभव हो पाएगी.

आज हमारी सुनने वाला कोई नहीं है जबकि हमारे खेत में गन्ने की फसल लहरा रही है, फिर भी कंपनी वाले इसे साफ करके यहां प्लांट बनाना चाहते हैं. जिससे हम और हमारे परिवार की रोजी रोटी छिन जाएगी.

मेनका बाई

मेरी आठ एक़ड ज़मीन है जो पूर्ण सिंचित एवं कृषियोग्य है जिसे कंपनी वाले प्लांट के लिए छीन रहे हैं.जिससे हमारा जीवन दूभर हो गया है और दुख की बात तो ये है कि इस तरह की खुली दादागिरी को रोकने वाला कोई नहीं है.

बिठ्‌ठन बाई किसान

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