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निन्‍यानबे मेगावाट विद्युत उत्‍पादन का लक्ष्‍य

निन्‍यानबे मेगावाट विद्युत उत्‍पादन का लक्ष्‍य

आदिकाल से बाबा केदारनाथ के चरणों से निकल कर हिमालयी पर्यावरण को सिंचित करने वाली मंदाकिनी नदी की धारा पर सिंगोली-भटवाड़ी जल विद्युत परियोजना को  ग्र्रहण लगाकर नदी की धारा बदलने से जनाक्रोश भड़क उठा है. केदार घाटी बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष गंगाधर नौटियाल ने इसके परिणाम से जनता को आगाह करते हुए कहा कि परियोजना का यह क़दम हिमालयी पर्यावरण को तबाह करने के साथ हिमालयी जनता की धर्मिक भावना के साथ विश्वासघात है. इस मामले ने स्थानीय जनता के साथ-साथ स्थापित संत महात्माओं को भी झकझोर कर रख दिया है. इस मुद्दे पर स्वामी माधवाश्रम महाराज ने मुखर विरोध करते हुए कहा कि सदियों से अविरल बहने वाली नदियों को सुरंगों में ढ़केला जाना हिंदू धर्म की आस्था पर गहरी चोट है. मंदाकिनी नदी की अविरल धारा को सुरंग से गुज़ारने से 12 किलोमीटर का इलाक़ा पूरी तरह से मरूस्थल हो जाएगा. जिससे पर्यावरण की भारी क्षति होगी.

लगभग 12 किलोमीटर की दूरी तक मंदाकिनी नदी को सुरंग से होकर गुज़रना होगा. इस पौराणिक नदी को सुरंग में डालने को लेकर जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है. विकास की ललक ने हिमालयी जनता को अंधा बना दिया है. इस पर स्थानीय रंगकर्मी डॉ. राकेश भट्ट का मानना है कि गढ़वाल की जनता की आस्था के साथ यह खिलवाड़ है.

664 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली इस परियोजना पर 99 मेगावाट विद्युत उत्पादन का लक्ष्य रखकर वर्ष 2006 से ही कार्य चल रहा है. इस परियोजना में बनने वाला टनल 50 हेक्टेयेर भूमि पर बना है, जिसके 2013 तक पूरा होने की उम्मीद है. सिंगोली-भटवाड़ी जल विद्युत परियोजना ने मंदाकिनी नदी का रूट बदल दिया है. इस परियोजना द्वारा कुंड में काफर डैम बनाकर पावन मानी जाने वाली सनातन कालीक नदी का डाइवर्जन कर दिया गया. अब मंदाकिनी कुंड से क़रीब 12 किलोमीटर तक सुरंग से हो कर गुज़रेगी. गत दिनों परियोजना का काम करा रही कंपनी ने अपनी योजना के अनुसार कुंड में काफर डैम बनाकर मंदाकिनी का जल प्रवाह रोकते हुए इसका मार्ग बदलने के काम को मूर्त रूप दे डाला. अब लगभग 12 किलोमीटर की दूरी तक मंदाकिनी नदी को सुरंग से होकर गुज़रना होगा. इस पौराणिक नदी को सुरंग में डालने को लेकर जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है. विकास की ललक ने हिमालयी जनता को अंधा बना दिया है. इस पर स्थानीय रंगकर्मी डॉ. राकेश भट्ट का मानना है कि गढ़वाल की जनता की आस्था के साथ यह खिलवाड़ है. इस क्षेत्र में धर्मपरायण जनता हर हाल में नदी पहाड़ की रक्षा चाहती है. उनका मानना है कि इसी से पर्यावरण की रक्षा भी होगी. विकाश के साथ धन कमाने को लौलूप ठेकेदारों का एक वर्ग हर हाल में जनआस्था को रौंद कर भी परियोजनाओं को पूरा कराना चाहता है, जिसके सामने क्षेत्रीय जनता की आवाज़ नक्कारखाने में तूती की आवाज़ सिद्ध हो रही है.

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