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बनारस को जानिए-समझिए

आत्म प्रचार और विज्ञापन के इस दौर में भी कुछ लोग ऐसे हैं, जो किसी प्रतिदान की अपेक्षा के बग़ैर चुपचाप निष्ठापूर्वक अपना काम किए जा रहे हैं. ऐसे ही एक शख्स हैं लेखक-पत्रकार कमल नयन. कमल जी के आलेख का़फी पहले साहित्यिक पत्रिका धर्मयुग में प्रमुखता से प्रकाशित होते रहे. कमल नयन ने धर्मयुग के संपादक डॉ. धर्मवीर भारती के वैचारिक विमर्श के अनुसार अपनी अभिनव कृति बनारस तेरे रंग हज़ार शीर्षक से प्रस्तुत की है. आज हिंदी में लेखकों के जीवन और कृतित्व पर तो ढेर सारी पुस्तकें मिल जाती हैं, लेकिन संस्कृति और दिग्दर्शन कराने वाली पुस्तकें बाज़ार से नदारद हैं. यह पुस्तक कुछ हद तक इसकी रपाई कर सकती है. बनारस तेरे रंग हज़ार के आलेखों में बनारस और उससे जुड़े लोगों और बनारसी संस्कृति को सुदॄढ करने में उनके योगदान को ब़खूबी उभारा गया है. भारतीय संस्कृति में बनारसीपन सदैव से ही चर्चा का विषय रहा है. पूजा के हर रंग, काशी विश्वनाथ के संग आलेख में तीन लोक से न्यारी काशी (बनारस) के अनोखे पूजा विधान की चर्चा के साथ-साथ भगवान विश्वनाथ के स्नान, सृंगार, पूजन, आरती, भोग और दर्शन की क्रमवार प्रक्रिया का लेखक ने सजीव वर्णन किया है. इसके साथ ही मंदिर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और प्रबंध व्यवस्था पर भी विस्तृत प्रकाश डाला गया है. काशी (बनारस) की मूल आत्मा को जानने के लिए सावन के रंग में भंग की तरंग, ये राजसी रईस, बनारस की मिठाई संस्कृति-काशी की मिठाइयां राष्ट्रीयता पगी, किस्से शहर बनारस के, नाद ब्रह्मम से साक्षात्कार आदि आलेख पर्याप्त हैं. बनारस तेरे रंग हज़ार संस्मरण, जीवनी, शोध, आलोचना, रेखाचित्र और काशी (बनारस) के सांस्कृतिक आख्यान का बेहतर परिपाक है. इस कृति का विमोचन सुप्रस़िद्ध साहित्यकार डॉ. काशीनाथ सिंह ने किया. पराड़कर स्मृति भवन में बीते 15 अगस्त को आयोजित एक समारोह में इस पुस्तक का विमोचन करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि जो बनारस को नहीं जानता है और जानना चाहता है, उसके लिए बनारस के रंग हज़ार मील का पत्थर साबित हो सकती है. मुख्य अतिथि काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता संस्थान के संकायाध्यक्ष प्रो. राम मोहन पाठक ने कहा कि लेखन की सार्थकता पहचानना संपादक का ही काम होता है. तकनीक चाहे जितनी उन्नत हो जाए, संपादक का कोई विकल्प नहीं है. समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात कार्टूनिस्ट जगत शर्मा ने की. स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण कमल नयन समारोह में उपस्थित नहीं हो सके. उनका लिखित स्वागत भाषण उनके पुत्र प्रमोद कमल ने पढ़ा. संचालन धर्मशील चतुर्वेदी ने किया.

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