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दिल्ली का बाबु यह कैसी नीति?

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पिछले साल हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी अशोक खेमका सुर्खियों में थे. हरियाणा सरकार ने 20 वर्षों में अशोक खेमका का 42 बार तबादला किया. इसके बाद से नागरिक सेवाओं में जल्द होने वाले तबादलों को खेमका सिंड्रोम के नाम से जाना जाता है. अशोक खेमका का तबादला बड़े एवं ताकतवर लोगों के विवादित भूमि सौदे को चुनौती देने की वजह से किया गया था. तबादलों को लेकर जब बात राज्यों की आती है, तो उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में दो क़दम आगे निकल जाती है. पिछले साल समाजवादी पार्टी के सत्ता में आने के बाद अखिलेश सरकार ने एक साल के भीतर ही 2000 तबादले कर डाले. आश्‍चर्य की बात तो यह है कि उन्होंने थोक के भाव किए गए इन तबादलों की खातिर 15 मई वाली तबादला नीति को भी नज़रअंदाज कर दिया. अखिलेश ने सारे नियम ताख पर रखकर एक साथ 16 बाबुओं का तबादला कर दिया. सूत्रों का कहना है कि उक्त तबादले उन 4 अधिकारियों को फिर से वापस लाने के लिए किए गए, जो मुख्यमंत्री के खास बताए जाते हैं. अखिलेश सरकार के इस निर्णय से पता चलता है कि राज्य में तबादलों से संबंधित नियम स़िर्फ कागजों पर हैं, लागू करने के लिए बिल्कुल नहीं.

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