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आपके पत्र, आपके अनुभव और हमारी सलाह

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सड़क टूट रही है

मेरे इला़के में एक सड़क दो साल पहले बनी थी और अब टूट रही है. मैं इस संबंध में सूचना का अधिकार क़ानून का इस्तेमाल करना चाहता हूं. मुझे बताएं कि इस मामले में कैसे आवेदन दिया जा सकता है.

-मोजिबुल्लाह खान, जनता बाजार, सारण, बिहार.

8 आप चौथी दुनिया में प्रकाशित होने वाले आवेदन प्रारूप को देखें. उसी आधार पर आप जिस विभाग से सूचना चाहते हैं, उसका नाम, पीआईओ का नाम और अपने सवाल लिखें और उसे डाक द्वारा या स्वयं विभाग में जाकर जमा करें.

गैस की कालाबाज़ारी

मेरे शहर में गैस की कालाबाज़ारी जोरों पर है, जिससे आम जनता को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. 45 दिनों में हमें एक गैस सिलेंडर दिया जाता है. इस मामले में आरटीआई का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है.

-नीरज राय, अररिया, बिहार.

8 आप पहले इसकी शिक़ायत ज़िलाधिकारी और गैस कंपनी के पास करें. हफ्ता-दस दिन बाद, अगर कोई कार्रवाई नहीं होती है तो आप सूचना का आवेदन उन्हीं जगहों पर देकर पूछें कि आपकी  शिक़ायत पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है. अपना आवेदन संबंधित विभाग के लोक सूचना अधिकारी के नाम से भेजें.

मिली ग़लत सूचना

मैंने सिंगरौली नगर पालिका से तहबाज़ारी वसूली की नीलामी (2004-05 से 2008-09 के दौरान) में अनुमानित 50 लाख रुपये के घोटाले से संबंधित सूचना मांगी थी, लेकिन मामले को राज्य सूचना आयोग में ले जाने और आयोग द्वारा आदेश दिए जाने के बाद भी मुझे पूर्ण सूचना नहीं मिली. जो मिली भी, वह भ्रामक और ग़लत थी. प्रथम अपील अधिकारी, जो नगर पालिका के आयुक्त भी हैं, ने तो अपील पर सुनवाई करना भी ज़रूरी नहीं समझा. इसलिए इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि वह भी इस घोटाले में संलिप्त हों. मैं आपके अख़बार के माध्यम से ज़िला प्रशासन और राज्य सरकार से अपील करता हूं कि इस मामले की जांच कराई जाए.

-दीनानाथ सिंह, सिंगरौली, मध्य प्रदेश.

8 आप चाहें तो इसकी शिक़ायत राज्य सूचना आयोग से करके लोक सूचना अधिकारी पर जुर्माना लगाने की मांग कर सकते हैं.

अपर कलेक्टर सूचना नहीं देते

मैंने अपर कलेक्टर कार्यालय, सागर, मध्य प्रदेश से कुछ सूचनाएं मांगी थीं, लेकिन यह कहकर मुझे कोई सूचना नहीं दी गई कि मांगी गई सूचनाएं प्रश्‍नात्मक हैं. प्रथम अपील के बाद भी अब तक सूचना नहीं मिली है.

-डॉ. जी एस वर्मा, सागर, मध्य प्रदेश.

8 यदि आप इस मामले को सूचना आयोग में नहीं ले गए हैं तो तत्काल ले जाएं. दोबारा आवेदन देकर भी सूचना मांग सकते हैं. सीधे सवाल करें. ऐसे सवाल, जो स़िर्फ आपके द्वारा चाही गई सूचना से संबंधित हों.

निराधार अर्जियों पर जुर्माना

सीआईसी एम एम अंसारी ने कहा है कि निराधार आरटीआई अर्जियों पर जुर्माना लगाना चाहिए. यह ख़बर चौंकाने वाली है. चिंता का विषय है. मैं उनसे सहमत नहीं हूं. वह क़ानून से ऊपर नहीं हैं. सरकार अभी तक इस क़ानून को लोगों के बीच ले जाने का काम नहीं कर पाई है. ऐसे में सूचना आयुक्त का बयान आरटीआई आवेदकों को हैरान करने वाला है. जब आवेदक ही नहीं होंगे तो क़ानून, आयोग और आयुक्त की क्या ज़रूरत होगी?

-गिरीश प्रसाद गुप्ता, बेगूसराय, बिहार.

सरकारी स्कूल को प्राइवेट बताया

हमारे यहां के एक सरकारी हाईस्कूल के लिए ज़मीन चाहिए थी. सीओ ने रिश्‍वत की मांग की, न देने पर स्कूल को प्राइवेट घोषित कर दिया. जब सूचना क़ानून के तहत जानकारी मांगी गई तो सीओ ने काम कर देने का आश्‍वासन दिया, लेकिन अनुमंडलाधिकारी भी नहीं चाहते कि काम हो. वह प्रथम अपील अधिकारी भी हैं. इन परिस्थितियों में क्या किया जाए.

-दीनबंधु सिंह. निहालपुर, बक्सर.

8 इस मामले में आपने सूचना क़ानून का इस्तेमाल किया, इसके लिए आपको बधाई. हमारी सलाह है कि आप इस मामले को यदि ज़रूरत पड़े तो राज्य सूचना आयोग तक ले जाएं. साथ ही एक शिक़ायती पत्र ज़िलाधिकारी को भी दे दें, इस सबूत के साथ कि उक्त स्कूल सरकारी है (यदि सबूत हो तो), ताकि आगे चलकर यदि जिलाधिकारी इस मामले में सही निर्णय नहीं लेते हैं तो उसी शिक़ायती पत्र के आधार पर उनसे सवाल पूछे जा सकें.

सूचना कैसे मिलेगी

मैं आरटीआई का इस्तेमाल करना चाहता हूं. किसी भी विभाग से कोई सूचना कैसे निकाली जा सकती है. कृपया पूरी प्रक्रिया बताने का कष्ट करें.

-लक्ष्मीकांत तिवारी, ई-मेल से.

8 चौथी दुनिया में हम लगातार इस संबंध में आवेदन के प्रारूप, सलाह और आलेख प्रकाशित कर रहे हैं. सूचना क़ानून को समझने और उसके इस्तेमाल के लिए इतना काफी होगा कि आप अख़बार में प्रकाशित आवेदनों और सलाह पर ध्यान देते रहें.

उर्दू टीवी का प्रसारण बंद

हमारे यहां 15 अक्टूबर, 2009 से पीस टीवी, क्यू टीवी एवं ईटीवी उर्दू का प्रसारण बंद कर दिया गया है. मैंने एस आर चैनल के प्रबंधक नीरज राय से इस संबंध में फोन पर बात की तो उन्होंने कहा, हमें ऊपर से ऑर्डर हैं. मेरे निवेदन पर उन्होंने संबंधित मंत्रालय के सर्कुलर की प्रतिलिपि भिजवा दी. मैंने आरटीआई क़ानून के तहत उक्त मंत्रालय से इस पाबंदी पर जानकारी मांगी, लेकिन मुझे जो जवाब मिला है, वह मेरी समझ से परे है.

-अनवार हुसैन, झांसी, उत्तर प्रदेश.

8 आप इस मामले में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से जानकारी मांग सकते हैं, साथ ही उक्त सर्कुलर की प्रति भी.

डीलर बेईमान है

हम लोगों को प्रतिमाह राशन एवं किरोसिन नहीं मिलता. हमने 29 अगस्त, 2010 को डीलर के ख़िला़फ़ मोर्चा खोला और जाम भी लगाया, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई. हमें क्या करना चाहिए?

-मुहम्मद इम्तियाज़ अंसारी, छपरा, बिहार.

8 आप इस मामले में पहले एक शिक़ायती पत्र दें और तब सूचना क़ानून के तहत आवेदन देकर ज़िला आपूर्ति अधिकारी से सवाल पूछ सकते हैं.

आरटीआई कार्यकर्ता बनना चाहता हूं

मैं गाशेवारा उर्दू का रिपोर्टर और समाज सेवक हूं और आरटीआई कार्यकर्ता बनना चाहता हूं. कृपया मुझे सलाह दें कि इसके लिए मुझे क्या करना चाहिए.

-डॉ. अ़ङ्गज़ाल अंसारी, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश.

8 आपको सूचना क़ानून से संबंधित कुछ सामग्री भेजी जा रही है, जो आपके लिए फ़ायदेमंद साबित होगी. साथ ही आप चौथी दुनिया में प्रकाशित आरटीआई कॉलम लगातार पढ़ते रहें. आरटीआई का इस्तेमाल करें. प्राप्त सूचना को सार्वजनिक करते रहें.

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