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जिनके दर्शक दिवाने हैं

back-16बॉलीवुड में उन कलाकारों को सभी पहचानते हैं, जो मुख्य भूमिका में काम करते हैं, लेकिन सह- कलाकारों को शायद कम लोग ही पहचानते हैं. ऐसे कलाकार किसी भी मायने में मुख्य अदाकारों से कम नहीं होते, बल्कि कुछ ही शॉट्स में उन्हें बेहतरीन अभिनय करना होता है. हालांकि बड़े कलाकोरं के रहते महज चंद सीन में अपनी पहचान कायम करना उनके लिए मुश्किल भरा काम है. पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसी फिल्में आई हैं, जिसमें सह-कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया. चौथी दुनिया के इस अंक में प्रियंका प्रियम तिवारी बता रही हैं, ऐसे ही कुछ कलाकारों के बारे में…

हुमा कुरैशी

हुमा उन प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में से हैं, जो अपनी पहली फिल्म से शोहरत की बुलंदियों पर पहुंच गईं. हुमा ने मॉडलिंग और थियेटर के अलावा, एड फिल्मों में भी काम किया है. पहली बार उनमें अभिनय की संभावना दिखी फिल्म डायरेक्टर अनुराग कश्यप को. अनुराग ने उन्हें गैंग्स ऑफ वासेपुर में अभिनय का मौक़ा दिया. मात्र कुछ ही सीन्स के जरिए ही हुमा ने दर्शकों के दिल अपनी जगह बना ली. उसके बाद लव-शव ते चिकन खुराना, एक थी डायन, डी-डे और डेढ़ इश्किया जैसी उनकी फिल्में आईं. उसके बाद हुमा बेहतरीन अभिनेत्रियों में शुमार की जाने लगीं.

ऋृचा चड्डा

ऋृचा की पहली फिल्म थी ओए लक्की-लक्की ओए. कालांकि, इस फिल्म में उनकी काफी छोटी भूमिका थी. बावजूद इसके, फिल्म इंडस्ट्री में उनके काम को काफ़ी सराहा गया. दरअसल, अनुराग कश्यप ने ऋृचा की इस फिल्म को देखकर ही उसे गैंग्स ऑफ वासेपुर का महत्वपूर्ण रोल दिया. इसके अलावा, फुकरे और रामलीला में भी उन्होंने बेहतरीन अभिनय किया. लिहाज़ा अगले कुछ ही फिल्मों से ऋृचा एक जानी- पहचानी अभिनेत्री बन गई.

नवाज़ुद्दीन सिद्दिक़ी

नवाज़ुद्दीन को सिद्दिक़ी को भला कौन नहीं जानता. नवाज़ को शुरुआती दिनों में ऐसा महसूस होता था कि उनके काले रंग, छोटे कद और दुबले-पतले शरीर से फिल्म इंडस्ट्री में इंट्री पाना आसान नहीं है. उनके मुताबिक़, फिल्मी दुनिया में भिखारी की भूमिका के लिए भी अच्छी कद-काठी वाले लोगों को लिया जाता है. नवाज़ को भले ही वर्ष 2012 में प्रदर्शित फिल्म गैग्स ऑफ वासेपुर से पहचान मिली हो, लेकिन शायद कम लोगों को यह पता होगा कि वर्ष 1999 में उनकी पहली फिल्म सरफ़रोश थी. बेशक, इस फिल्म में उनका क़िरदार दर्शकों को याद न हो, लेकिन इस फिल्म से नवाज़ अनुराग कश्यप की नज़रों में ज़रूर आ गए.

दीपक डोबरियाल

दुबले-पतला शरीर और कुछ ख़ास नहीं दिखने वाले दीपक यह जानते हुए कि फिजिकल अपियरेंस बॉलीवुड में करियर बनाने के लिए ज़रूरी है, फिर भी उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में करियर बनाने की सोची. दीपक ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म मक़बूल से किया. फिल्म ओंकारा में दीपक अपने अभिनय के ज़रिए कई कलाकारों पर भारी पड़ गए. हालांकि, मक़बूल उनकी पहली फिल्म थी और इस फिल्म में उनके पास कुछ खास करने को नहीं था. बग़ैर डायलॉग वाली अपनी इस भूमिका में भी दीपक ने बेहतरीन अभिनय किया. बाद के दिनों में कई बड़े अभिनेताओं के साथ उनकी कुछ कामयाब फिल्में भी आईं, जिनमें दीपक ने अच्छी भूमिका निभाई.

मनजोत सिंह

वर्ष 2013 में प्रदर्शित फिल्म फुकरे में मनजोत सिंह ने लाली की जीवंत भूमिका निभाई. वैसे, तो मनजोत की पहली फिल्म थी, दिबाकर बनर्जी की ओए लकी-लकी ओए. तब इस फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर ने मनजोत को रिजेक्ट कर दिया था, लेकिन दिबाकर बनर्जी को मनजोत पर पूरा विश्‍वास था. इस फिल्म में उनके बेहतरीन अभिनय के लिए फिल्म फेयर क्रिटिक अवॉर्ड भी मिला. हालांकि, उसके बाद मनजोत की कई और फिल्में आई, लेकिन वे फिल्में बॉक्स ऑफिस पर कुछ ख़ास नहीं कर पाईं. हालांकि, उनकी भूमिका को दर्शकों ने खूब सराहा.

वरुण शर्मा

किसी कलाकार के लिए, इससे बड़ी बात और क्या होगी कि वह अपनी पहली फिल्म में ही स्टार बन जाए. वरुण भी उन्हीं भाग्यशाली कलाकारों में एक हैं. वर्ष 2013 में आई फरहान अख्तर की फुकरे ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया. हालांकि, इस फिल्म में कई कलाकार थे, लेकिन वरुण का क़िरदार उन सबों से बेहतर था.

स्वरा भास्कर

स्वरा को फिल्म तनू वेड्स मनू से पहचान मिली. इस फिल्म में स्वरा कंगना रनावत की सहेली की भूमिका में थी. हालांकि इस फिल्म से स्वरा ने दर्शकों का थोड़ा बहुत अटेंशन बटोरा, लेकिन उन्हें पहचान भी मिली फिल्म रांझना से. इस फिल्म में वह बिंदिया की भूमिका में थीं. हालांकि इस फिल्म में उनके कुछ ही सीन थे. फिर भी, उन्होंने अपनी पहचान छोड़ी. दिल्ली में पली-बढ़ी स्वरा ने मिरांडा हाउस से ग्रेजुएशन किया. एक्ट्रेस मिनिषा लांबा उनकी क्लासमेट थी. हालांकि, मिनिषा के करियर की रफ्तार तेज़ थी. उन्हें शुरू में ही मुख्य भूमिका वाली फिल्में मिल गई, लेकिन स्वरा ने सहनायिका के तौर पर धीरे-धीरे पहचान बनाई. हालांकि, अब उन्हें एक अच्छी अभिनेत्री के तौर पर पहचाना जाने लगा है.

जीशान कादरी

जीशान लेखक और अभिनेता हैं. गैंग्स ऑफ वासेपुर की कहानी उन्होंने ही लिखी है. जीशान ने गैंग्स ऑफ वासेपुर पार्ट 2 में अभिनय भी किया. हालांकि, इस फिल्म में उनकी बड़ी भूमिका नहीं थी, लेकिन जीशान को कुछ ही डायलॉग्स में पसंद किया जाने लगा. ग़ौरतलब है कि जीशान की शिक्षा-दीक्षा धनबाद में हुई. मेरठ से उसने ने बीबीए किया, फिर उन्होंने दिल्ली का रुख़ किया. उन्होंने कुछ समय तक एक कॉल सेंटर में जॉब किया. बाद में वह मुंबई चले गए और अभिनय में किस्मत आजमाई. जल्द ही वह फिल्म रिवॉल्वर रानी में अभिनय करते नज़र आएंगे.

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