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संभलकर करें सोशल नेटवर्किंग साईट्स का इस्तेमाल

संभलकर करें सोशल नेटवर्किंग साईट्स का इस्तेमाल

आईटी ऐक्ट की धारा-66 ए का दायरा काफी व्यापक है. कोई भी ऐसा कंटेंट जो कानून के नजर में गलत है, वह अगर सोशल साइट पर डाला जाता है, तो वह अपराध की श्रेणी में आता है और इसके लिए आईटी ऐक्ट की धारा-66 ए के  तहत कार्रवाई की जा सकती है.  इसका एक उदाहरण है 2013 में बाला साहब ठाकरे के निधन के कारण मुंबई बंद किए जाने को लेकर एक लड़की ने फेसबुक पर टिप्पणी किया था और दूसरी लड़की ने उसे केवल लाइक किया था, जिसके बाद दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था.  इस कानून में एक खामी है कि कौन सा कमेंट आपत्तिजनक है या नहीं इसकी कोई परिभाषा तय नहीं की गई है.


socialआज के दौर में सोशल नेटवर्किंग साइट्स(फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप्प) का उपयोग देश के सभी राज्यों में हो रहा है. पूरी दुनिया में इन साइटों का औसतन उपयोग 74 प्रतिशत हो रहा है, जिसमें 72 प्रतिशत पुरुष यूजर और 76 प्रतिशत महिला यूजर हैं.
वहीं भारत में 2014 के आकड़ों पर नजर डालें, तो 168.7 मिलियन यूजर सोशल नेटवर्किंग साइट्स का प्रयोग करते हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर को यह नहीं पता है की इन नेटवर्किंग साइट्स पर आपत्ति जनक कमेंट्स या फोटो के गलत उपयोग या फोटो के साथ छेड़-छाड़ करने पर उन्हें आईटी एक्ट सेक्शन 66 के तहत जेल भी जाना पड़ सकता है. इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी एक्ट सेक्शन 66, 2000 को 2008 में संशोधित किया गया था, जिसको 5 फरवरी 2009 को राष्ट्रपति द्वारा आईटी एक्ट सेक्शन 66 के रूप में स्वीकृति मिली. आईटी एक्ट की धारा 66 (ए) के तहत वह अपराध आते है जो साइबर क्राइम के जरिये किये जाते हैं. अगर आप सोशल साईट्स के जरिए किसी के बारे में अफवाहें फैलाते हैं, धार्मिक भावनाएं भड़काते हैं या कोई ऐसी चीज जिससे किसी की भावना को ठेस पहुंचती है, तो कड़ी कार्रवाई की जा सकती है.
कोई ऐसी जानकारी भेजे, जिसके गलत होने का पता हो, लेकिन फिर भी उसे किसी को चिढ़ाने या परेशान करने, खतरे में डालने, बाधा डालने, अपमान करने, चोट पहुंचाने, धमकी देने, दुश्मनी पैदा करने, घृणा या दुर्भावना के मकसद से भेजा जाए. अगर कोई शख्स सोशल मीडिया या दूसरे ऑनलाइन मीडियम से किसी और की भावनाओं को भड़काता है, अफवाह फैलाता है या फिर किसी और की छवि खराब करता है, या फिर कोई भी ऐसी हरकत करता है, जिससे दूसरे की छवि खराब हो रही हो, तो ऐसे में आईटी ऐक्ट की धारा-66 ए के तहत केस दर्ज किए जाने का प्रावधान है. ऐसी कोई भी जानकारी जो झूठी हो, जिससे व्यक्ति विशेष को मानसिक आघात पहुंचा हो या फिर मान-हानि हुई हो या फिर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती हो, तो आईटी ऐक्ट के तहत केस दर्ज हो सकता है…
वैसे सरकार ने आईटी ऐक्ट की धारा-66 ए के तहत होने वाली गिरफ्तारी के मामले में गाइड लाइंस जारी कर रखी है. इसके तहत प्रावधान है कि किसी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई के लिए सीनियर पुलिस अधिकारी की मंजूरी लेनी जरूरी है. सेक्शन 66 ए के तहत शिकायत दर्ज करने से पहले ग्रामीण इलाको में डीएसपी लेवल, जबकि शहरी इलाकों में आईजी लेवल के अधिकारी से मंजूरी लेना जरूरी है. उनकी अनुमति के बिना कार्रवाई नहीं होगी. आईटी ऐक्ट की धारा-66 ए के तहत केस दर्ज होने के बाद अगर केस साबित हो जाए, तो इसमें 3 साल तक कैद की सजा हो सकती है और जुर्माने का भी प्रावधान है. वैसे इस अपराध को जमानती अपराध माना गया है. अगर कोई शख्स फर्जी आईडी के जरिए इंटरनेट पर अकाउंट खोलता है या फिर किसी और के पहचान पर फर्जी आईडी का इस्तेमाल कर अकाउंट खोलता है, तो वह आईटी ऐक्ट की धारा-66 सी के तहत अपराध है और इसमें दोषी पाए जाने पर 3 साल तक कैद की सजा का प्रावधान है अगर कोई शख्स इंटरनेट के जरिए या फिर मोबाइल आदि के नजरिए इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्‍लील सामग्री सर्कुलेट करता है, तो ऐसे मामले में आईटी ऐक्ट की धारा-67 के तहत केस दर्ज किए जाने का प्रावधान है और ऐसे मामले में दोषी पाए जाने पर 3 साल तक की कैद और 5 लाख रुपए का जुर्माने का प्रावधान है. अगर कोई शख्स सैक्सुअल ऐक्ट को इलेक्ट्रानिक माध्यम से सर्कुलेट करता है, तो ऐसे में आईटी एक्ट की धारा-67 ए के तहत केस दर्ज किए जाने का प्रावधान है और उसमें दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल हो सकती है और 5 लाख रुपए तक जुर्माना हो सकता है. ये मामला गैर जमानती श्रेणी में रखा गया है. अगर कोई शख्स चाइल्ड पोर्नोग्राफी को सर्कुलेट करता है या फिर ब्राउज भी करता है, तो उसमें आईटी एक्ट की धारा-67 बी ए के तहत केस दर्ज किए जाने का प्रावधान है और दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की कैद और 10 लाख रुपए तक का जुर्माना भी हो सकता है.
आईटी ऐक्ट की धारा-66 ए का दायरा काफी व्यापक है. कोई भी ऐसा कंटेंट जो कानून के नजर में गलत है, वह अगर सोशल साइट पर डाला जाता है, तो वह अपराध की श्रेणी में आता है और इसके लिए आईटी ऐक्ट की धारा-66 ए के तहत कार्रवाई की जा सकती है. इसका एक उदाहरण है 2013 में बाला साहब ठाकरे के निधन के कारण मुंबई बंद किए जाने को लेकर एक लड़की ने फेसबुक पर टिप्पणी किया था और दूसरी लड़की ने उसे केवल लाइक किया था, जिसके बाद दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था.इस कानून में एक खामी है कि कौन सा कमेंट आपत्तिजनक है या नहीं इसकी कोई परिभाषा तय नहीं की गई है. जिसके कारण यूजर को पता नहीं चल पाता है कि उन्हें, फेसबुक या सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर कैसा कमेंट करना या क्या लाइक करना चाहिए. जिससे ये भी पता लगा पाना की कौन सा कमेंट, फोटो, आपत्तिजनक मेल या दंडित करने लायक है या नहीं. इसी कारण इसका कुछ लोग गलत इस्तेमाल भी करते हैं.
कुछ लोगों का मानना है की इस एक्ट के कारण संविधान के मूल अधिकार में दखल होता है. इस एक्ट के कारण राइट टु स्पीच एंड एक्सप्रेशन प्रभावित हो रहा है. आईटी एक्ट की धारा 66 (ए) के दुरुपयोग की बढ़ती घटनाओं को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने इसके गलत इस्तेमाल पर लगाम लगाने के लिए दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं. इन दिशानिर्देशों के तहत इस धारा के तहत केस दर्ज करने से पहले ग्रामीण इलाकों में डीसीपी और शहरी इलाकों में आईजी रैंक के पुलिस अधिकारी की मंजूरी लेनी होगी. साइमनटेक कंपनी के कंज्यूमर डिविजन नॉरटन की साइबर क्राइम रिपोर्ट के अनुसार, ऑनलाइन क्राइम का शिकार होने वाले देशों में चीन टॉप पर है. चीन के करीब 83 फीसदी इंटरनेट यूजर्स कंप्यूटर वायरस, आइडेंटिटी की चोरी, क्रेडिट कार्ड से जुड़ी धोखाधड़ी के शिकार हो जाते हैं. साइबर क्राइम का शिकार होने वाले देशों में चीन के बाद भारत और ब्राजील संयुक्त रूप से दूसरे नंबर पर हैं. इन दोनों देशों के 76 पर्सेंट इंटरनेट यूजर्स साइबर अपराधों का शिकार बनते हैं. तीसरे नंबर पर अमेरिका है जहां शिकार बनने वाले लोग 73 पर्सेंट हैं.

3 comments

  • shyamsundarprasad

    ये तो सही कानून है पर इलेक्शन के टाइम बेलगाम नेता जो अपशब्द बयान देते है उपे कारवाही क्यों नहीं होती है ?

  • shyamsundarprasad

    जानकारी के लिए धन्यवाद …. रोचक तथ्य

  • shyamsundarprasad

    बेहद उम्दा ….
    इस तरह की जानकारियां सबके सामने आना चाहिए…. और आशा करता हुँ की लेखक और चौथी दुनिया लगातार ऐसे लेखो को जनहित में प्रकाशित करे
    सुनील वर्मा , अरुणाचल प्रदेश

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