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बहुआयामी है होगया दिमाग़ का दही का संगीत

बहुआयामी है होगया दिमाग़ का दही का संगीत

Hogaya-Dimgh-Ka-Dahi-Songs

Hogaya-Dimgh-Ka-Dahi-Songsफिल्म होगया दिमाग़ का दही फिल्म एक कॉमेडी ड्रामा है. हिंदी सिनेमा में गिनी-चुनी कॉमेडी फिल्में ही हैं जिन्हें उनके बेहतरीन संगीत और गीतों के लिए याद किया जाता है. होगया दिमाग़ का दही उसी श्रेणी की फिल्म है. कुछ लोग गीतों को एक ही दायरे में देखते हैं जबकि वो फिल्म का एक अभिन्न हिस्सा होते हैं. यह किसी भी फिल्म के गीतों की फिल्म को देखे बगैर समीक्षा करने का त्रुटिपूर्ण तरीका है. यदि फिल्म पूर्ण है तो गीतों को उसके भाग के रूप में लिया जाना चाहिये न कि उनकी एक अलग वातावरण में समीक्षा की जानी चाहिये.

यदि फिल्म होगया दिमाग़ का दही के निर्देशक की बात को सही मानें तो इस फिल्म के गीत फिल्म की कहानी के अनुरूप हैं और फिल्म का अभिन्न हिस्सा हैं. इस फिल्म में चार गीत हैं और सभी गीत अपने आप में अलग शैली के हैं.सबसे पहले फिल्म की कव्वाली मौला मेरे मौला को लें. तो यह फिल्म का सबसे बेहतरीन गीत है. यह गीत इस फिल्म की आत्मा की तरह है, जिसे कैलाश खेर ने फौजिया अर्शी के साथ रूहानी अंदाज में गाया है.

हिंदी संगीत इतिहास में यह पहला मौक़ा है जब किसी रूहानी कव्वाली में किसी गायिका ने अपनी आवाज दी है. अमूमन ऐसा नहीं होता है. इसके अलावा भी और कई दूसरे कारण भी है जिसके लिए इस कववाली को लंबे समय तक याद किया जायेगा. इसके बोल बेहतरीन हैं, जिसमें अल्लामा इक़बाल, अमीर खुसरो और कृष्ण बिहारी नूर जैसे नामी शायरों की नज़्मों के हिस्से शामिल हैं. कैलाश खेर की आवाज और गीत के बोल का ऐसा संगम होता है कि आप किसी रुहानी माहौल में पहुंच जाते हैं.

फौजिया अर्शी फिल्म की निर्देशक होने के साथ-साथ फिल्म की संगीतकार भी हैं इस कव्वाली को उनकी गायकी चार चांद लगा देती है. एक तरफ जहां कव्वाली आपको रूहानी अहसास देती है तो दूसरी तरफ फिल्म का गीत कभी तो सुन गौर से आपके दिल को छूता है और आपको आपके प्रेमी / प्रेमिका की याद दिलाता है. फौजिया अर्शी ने इस गीत को अपनी आवाज से सजाया है. गीत को सुनकर ऐसा लगता है कि आप हसीन वादियों में अपने साथी के साथ हैं. समीक्षकों के अनुसार पिछले एक दशक में ऐसा मैलोडियस गीत नहीं आया है.

ऐसे भी हिंदी सिनेमा से मेलोडियस गीत गायब ही होते जा रहे हैं, ऐसे में यह गीत नये अंदाज में मैलोडी के दौर में वापसी का इशारा करता है. मीका सिंह को जिस ऊर्जा और अंदाज के लिए जाना जाता है वह फिल्म के गीत बाप होना पाप में पूरी तरह दिखाई देता है. देश की युवा पीढ़ी जिस तरह के गाने और संगीत को पसंद करती है यह गीत उसी श्रेणी का है. गायकी के साथ-साथ यह गीत अपने पिक्चराईजेशन के लिए बहुत चर्चा में है.

फिल्म में इस गीत को गायक मीका सिंह के कैरिकेचर के साथ फिल्माया गया है. यह पहला मौका है जब किसी भारतीय गायक का कैरिकेचर फिल्म के गीत में नज़र आयेगा. फिल्म की निर्देशक होने का फायदा बतौर संगीतकार मिला है, वह इस बात से भली भांति वाकिफ थीं कि किस तरीके का संगीत फिल्म की कहानी को सूट करता है, इसलिये उन्होंने कई विधा के गीतों को फिल्म में जगह दी है. इन गीतों से फौजिया अर्शी की बतौर संगीतकार परिपक्वता का आकलन भी हुआ है. इसलिए उन्होंने फिल्म के टाइटल ट्रैक दिमाग का दही को जगह दी है. इस गीत में कुनाल गांजावाला और ऋतु पाठक ने समा बांध दिया है.

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