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गैंगवार की गिरफ्त में राजस्थान, विधानसभा में घिरी सरकार : सिधारो म्हारे देश से…
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गैंगवार की गिरफ्त में राजस्थान, विधानसभा में घिरी सरकार : सिधारो म्हारे देश से…

raju-thethराजस्थान के धोरे एक बार फिर गैंगवार की तपिश से तप रहे हैं. पुलिस की गिरफ्त से कुछ महीनों पहले फरार हो चुके कुख्यात आनंदपाल और उसके दुश्मन राजू ठेहट की आपसी रंजिश यहां के अमनपसंद समाज पर भारी पड़ती नज़र आ रही है. हाल की घटनाओं ने न सिर्फ सामाजिक चिंता को और विस्तार दिया है, बल्कि पुलिस और सरकार के माथे पर पड़ी शिकन भी और गहरी होती दिखाई दे रही है. विधानसभा में न सिर्फ विपक्ष, बल्कि सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी सरकार को इस मुद्दे पर घेरा. नतीजे में राज्य के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया को भी संसद में यह बयान देना पड़ा कि जब तक वे आनंदपाल के गिरोह को नेस्तनाबूद नहीं कर देते, चैन से नहीं बैठेंगे.

जयपुर से शुरू, लेकिन नागौर में खत्म नहीं
सोमवार 21 मार्च की सुबह राज्य पुलिस के लिए एक सफलता की सूचना तो लाई, लेकिन साथ ही शाम होते-होते महकमे में उदासी भी पसर गई. दरअसल, दिन में जयपुर में एसओजी ने श्रीमाधोपुर निवासी शार्प शूटर शंकर को गिरफ्तार किया, जिसके बारे में कहा जाता है कि वह कुख्यात अपराधी आनंदपाल के दुश्मन राजू ठेहट गिरोह के लिए पिछले दस साल से काम करता है. पुलिस के लिए इसी सफलता में उसकी विफलता का भी राज छिपा था.

दरअसल, शंकर की गिरफ्तारी करके खुश हो रही पुलिस को यह तो पता चल चुका था कि शंकर और उसके चार साथी जयपुर में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने आए थे और शंकर भले ही पकड़ में आ गया हो, लेकिन उसके चार साथी फरार हो चुके हैं. राज्य स्तर पर ए श्रेणी की नाकाबंदी की गई, लेकिन शायद पुलिस को भी यह आभास नहीं था कि राजू ठेहट गैंग इस समय किस कदर आधुनिक हथियारों से लैस हो चुका है. वरना ऐसी चूक उससे नहीं होती, जो नागौर में हो गई.
यह हुआ था नागौर में
कथित रूप से आनंदपाल और उसके गिरोह के गुर्गों पर हमला करने की फिराक में जयपुर पहुंचे राजू ठेहट गैंग के पांच शार्प शूटरों में से शंकर की गिरफ्तारी के बाद यहां से ठेहट गैंग के बाकी सदस्य आगरा निवासी शार्प शूटर गोल्डी, हरियाणा निवासी रोहित फौजी, ग्वालियर निवासी हरेंद्र यादव और एक अन्य ने नागौर की राह पकड़ी.

ये लोग नागौर की सीमा में घुस गए, लेकिन कुछ ही दूर पहुंचकर उन्हें पता चल गया कि पुलिस की तगड़ी घेराबंदी है. ऐसे ही एक जगह नाकाबंदी देखकर जब फॉर्च्यूनर कार सवार बदमाशों ने अचानक ही कार को फलौदी मार्ग पर मोड़ दिया, तो दूर खड़ी पुलिस टीम की निगाह से वे नहीं बच सके. नतीजे में क्यूआरटी यानी क्विक रिस्पांस टीम उनके पीछे लग गई. बदमाश कुछ ही दूर गए थे कि पुलिस की जद में आ गए.

मुठभेड़ हुई. दोनों ओर से दर्जनों राउंड गोलियां चलीं. नतीजे में बदमाशों की गोली से पुलिस को दो जांबाज खुमाराम और हरेंद्र चौधरी घायल हो गए, जिनमें से एक खुमाराम ने देर रात दम तोड़ दिया. इसके बाद बदमाश तेजी से वहां से भागे और मोटर साइकिल सवार दो लोगों को भी इसी दौरान उन्होंने कुचल दिया. हड़बड़ाहट में बदमाश कार छोड़कर खेतों से होते हुए वहां से भाग निकले. हिस्ट्रीशीटर राजू ठेहट के खिलाफ हत्या, लूट सहित अन्य धाराओं में 28 मुक़दमे दर्ज हैं. इनमें से 16 मामलों की कोर्ट में सुनवाई चल रही है.
पुलिस महकमे में हड़कंप
इधर, मुठभेड़ में दो पुलिसवालों के हताहत होने का समाचार मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. फॉर्च्यूनर कार बरामद हो चुकी थी और उसमें से बरामद असलहे देख पुलिस को अंदाजा हो गया था कि बदमाश किसी बड़ी गंभीर वारदात को अंजाम देने आए थे, लेकिन कहीं उनके प्लान में कुछ गड़बड़ हो गई और बीच में पुलिस आ गई. बहरहाल, यह घटना न सिर्फ अखबारों की सुर्खियां बनी, बल्कि विधानसभा में भी सरकार इस मसले पर घिर गई.
कांग्रेस नेता के चाचा से लूटी गई थी फॉर्च्यूनर कार
पुलिस जांच में यह बात भी जल्द ही सामने आ गई कि जिस कार से बदमाश जयपुर से नागौर की तरफ गए, वह कार बीकानेर निवासी आशाराम डूडी से फरवरी माह में बीकानेर इलाके से ही लूटी गई थी. आशाराम विपक्ष के नेता रामेश्वर डूडी के चाचा हैं. खुद डूडी ने विधानसभा में इस मसले पर सरकार को यह कहकर घेरा कि उन्होंने खुद कार लूट की खबर आईजी को उसी समय दे दी थी, फिर क्या कारण है कि इस तरह की घटना को रोका नहीं जा सका.
आनंदपाल को जेल में ही थी मारने की योजना
जयपुर में पकड़े गए शंकर की मानें, तो पिछले साल नवंबर में आनंदपाल की जेल के अंदर अथवा जेल से पेशी पर ले जाते समय हत्या करने की योजना थी. शंकर ने राजस्थान यूनिवर्सिटी के चार लड़कों से दोस्ती करके उनके घर से ही जेल परिसर की रेकी की थी, जो कारागर के पास में ही था. लेकिन इसी बीच उसके नए बने साथियों को पुलिस ने फायरिंग के एक मामले में सूचना मिलने के बाद नाकाबंदी में दबोच लिया. शंकर को खबर लगी, तो वह फरार हो गया, लेकिन पुलिस को पता चल चुका था कि युवकों के कमरे में कोई और नहीं बल्कि राजू ठेहट गैंग का कुख्यात गुर्गा शंकर छिपा था. वहां से पुलिस को एके-47 की मैगजीन के अलावा एक अत्याधुनिक पिस्टल और 71 राउंड कारतूस मिले थे, जिससे यह अंदाजा तो हो गया था कि कुछ गंभीर घटने वाला है.
मुठभेड़ से उठते कई सवाल
पुलिस और राजू ठेहट गैंग की मुठभेड़ से भले ही पुलिस यह कहती फिर रही हो कि ये शार्प शूटर अपने नंबर एक दुश्मन आनंदपाल की हत्या करने आए थे, लेकिन सच तो यह है कि पुलिस अफसरों के भी इस विचार के आते ही पसीने छूट जा रहे हैं कि कहीं ऐसा तो नहीं कि ये शूटर कहीं उन पर तो निशाना नहीं साधे हुए हैं, जो आनंदपाल और राजू ठेहट के निशाने पर समान रूप से हैं. मसलन,कुछ राजनेता, ठेकेदार, बिल्डर, व्यवसायी आदि. बहरहाल पुलिस यही मानकर चल रही है कि शूटर्स आनंदपाल को ठिकाने लगाने आए थे. पुलिस की इस सोच से एक और सवाल उभरता है कि क्या पुलिस से फरारी के बाद से आनंदपाल सत्ता और शासन के ठीक नाक के नीचे ही रह रहा है. शार्प शूटर नागौर क्यों गए, यह भी एक सवाल है. पुलिस इसी आधार पर अंदाजा लगा रही है कि शायद आनंदपाल नागौर या जयपुर में ही कहीं है, जिसे ठिकाने लगाने की कोशिश में राजू ठेहट गैंग है.

आनंदपाल भागा या भगाया गया!

जयपुर सरकार और राजस्थान पुलिस के लिए गैंगस्टर आनंदपाल सिंह और राजू ठेहट गिरोह बड़ी चुनौती बन चुके  हैं. दोनों गिरोहों का दबदबा शेखावाटी से पूरे प्रदेश में फैल चुका है. आनंदपाल की फरारी के बाद राजूठेहट गिरोह और  भी सक्रिय हो गया है. 2014 में बीकानेर जेल में राजू ठेहट गिरोह के जयप्रकाश और रामपाल ने आनंदपाल के सबसे करीबी बानूड़ा को गोलियों से भून दिया था. जवाबी हमले में आनंदपाल गैंग ने जेल में ही जयप्रकाश और रामपाल की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी. आनंदपाल के  पुलिस हिरासत से फरार होने के  बाद से ही शेखावाटी क्षेत्र में खूनी संघर्ष की आशंका जताई जाने लगी थी.

आनंदपाल के फरार होने के  मामले में पुलिस कमांडो शक्ति सिंह सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया. लेकिन इसके बावजूद आनंदपाल की फरारी का रहस्य नहीं खुल सका. इस मामले में पुलिस की मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं. आनंदपाल चार सितम्बर को ही राजस्थान के  परबतसर क्षेत्र से पुलिस हिरासत से फिल्मी अंदाज में फरार हो गया था. उसकी गिरफ्तारी के लिए दर्जनभर से अधिक टीमें बनाई गईं, आला अधिकारियों को शामिल किया गया, पूरा तामझाम दिखाया गया, लेकिन आनंदपाल सिंह का कहीं पता नहीं लगा. प

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