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मध्यप्रदेश : हरियाली की लाश पर स्मार्ट सिटी

मध्यप्रदेश : हरियाली की लाश पर स्मार्ट सिटी

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bpl-smart-cityमध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में हरियाली की लाश पर स्मार्ट सिटी बसाने की योजना बनाई गई है. यह शहर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, बेशुमार हरियाली, झीलों और सुंदर पहाड़ियों के लिए विख्यात है, परंतु इस शहर के जिस हिस्से में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों की स्मार्ट सिटी बनाने की योजना को क्रियान्वित किया जा रहा है, उस क्षेत्र में तकरीबन तीस हजार से अधिक पेड़ हैं. उनमें से अधिकांश वृक्ष विशालकाय और हरे-भरे हैं. यदि इन वृक्षों को काटा गया तो सरकार अगले बीस सालों में भी उसकी क्षतिपूर्ति नहीं कर पाएगी. यही कारण है कि यहां स्मार्ट सिटी बसाने के विरोध में आम जनता के साथ-साथ पूर्व प्रशासनिक अधिकारी भी सड़क पर उतर आए हैं. लोगों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि इन पेड़ों को काटकर स्मार्ट सिटी बनाई गई तो यहां चिपको आंदोलन चलेगा.

अपनी हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता के लिए विख्यात भोपाल को स्मार्ट सिटी के नाम पर कंक्रीट के जंगल में तब्दील करने का मुद्दा अब जोर पकड़ता जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में सौ स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा की थी. उस योजना के अंतर्गत भोपाल को सम्मिलित तो कर लिया गया है, परंतु मध्यप्रदेश की राजधानी को स्मार्ट सिटी बनाने के नाम पर इसकी हरियाली को नष्ट करने का कुचक्र शुरू हो गया है. और इसमें खुद सरकार तथा भोपाल का प्रशासन व नगर निगम शामिल हैं. इस सरकारी कवायद के विरोध में शहर की जनता अब सड़क पर उतरने के लिए तैयार है.

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स्मार्ट सिटी की योजना

स्मार्ट सिटी के नाम पर भोपाल शहर के पर्यावरण को संतुलित करने वाले शिवाजी नगर और तुलसी नगर में करीब तीस हजार पेड़ों को बचाने के लिए अब स्मार्ट सिटी कंपनी इन पेड़ों को बचानेस के लिए आम लोगों से सलाह लेगी. इसके लिए जगह-जगह चौपाल लगाकर सुझाव लिए जाएंगे. स्मार्ट सिटी की जानकारी देने के लिए निजी कंपनी को जिम्मेदारी दी जा रही है. इसके लिए दो-तीन दिन के भीतर एक कंपनी की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. कंपनी स्मार्ट सिटी के फायदों से शहर के लोगों को रू-ब-रू कराएगी. स्मार्ट सिटी में सेकेंड स्टॅाप से 6 नंबर स्टॉप तक का लगभग 332 एकड़ क्षेत्र शामिल है. यहां लगभग 45 हजार लोग रहते हैं. स्मार्ट सिटी के लिए प्राइवेट मकानों, प्राइवेट कॉलोनी, शासकीय स्कूल, धार्मिक स्थल और हॉस्पिटल को नहीं हटाया जाएगा. पहले फेस में स्मार्ट सिटी के निर्माण पर 3,440 करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है, जबकि स्मार्ट सिटी से प्रस्तावित आय 6,645 करोड़ रुपये सालाना है. इस निर्माण की वजह से क्षेत्र के करीब तीस हज़ार पेड़ों को काटना पड़ेगा. इसमें छोटे-बड़े पेड़ शामिल हैं. पेड़ों को बचाने के लिए स्मार्ट सिटी कंपनी शहर के लोगों से चौपाल लगाकर सुझाव मांगेगी. इसमें यहां रहने वाले लोगों की शिफ्टिंग के संबंध में भी बातचीत की जाएगी. कलेक्टर निशांत वरवड़े का कहना है कि दो-तीन दिन के भीतर इसके लिए एक प्राइवेट कंपनी का रजिस्ट्रेशन हो जाएगा.

चिपको आंदोलन की चेतावनी

राजधानी के मयूर पार्क में एक बैठक हुई. इस बैठक में प्रदेश की पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच के अलावा एक दर्जन से अधिक सेवानिवृत्त आईएएस और आईपीएस अधिकारी शामिल हुए. उनके अलावा वरिष्ठ समाजसेवी, पत्रकार और कुछ राजनीतिक दलों के नेता भी इस बैठक में मौजूद थे. इस बैठक में सभी ने मिलकर निर्णय लिया कि यदि सरकार स्मार्ट सिटी के नाम पर तीस हज़ार पेड़ों को काटने पर तुली रहेगी तो जनता को इसके विरोध में मैदान पर आना पड़ेगा. इसकी पहल इस बैठक में शामिल सभी लोग करेंगे और जिस तरह से हिमालय की तराई में सुंदरलाल बहुगुणा ने चिपको आंदोलन चलाया था, उसी तर्ज पर यहां भी लोग पेड़ों से चिपककर उन्हें काटने का विरोध करेंगे. इससे पहले केंद्र सरकार, प्रदेश सरकार, भोपाल नगर निगम व जिला प्रशासन को भोपाल के उन विकल्पों से भी अवगत कराया जाएगा, जहां पर्यावरण को क्षति पहुंचाए बगैर स्मार्ट सिटी का निर्माण किया जा सकता है. जाने-माने आर्किटेक्ट अजय कटारिया ने तो दो वैकल्पिक क्षेत्रों का पूरा नक्शा ही तैयार कर लिया है. उनका कहना है कि शहर में जब वैकल्पिक स्थान हैं, तो फिर हरे-भरे क्षेत्र को बर्बाद क्यों किया जा रहा है. आज तक कोई भी सरकार उतने पेड़ नहीं लगा सकी है, जितने किसी भी निर्माण के समय काटे जाते हैं. जहां भोपाल में स्मार्ट सिटी बसाई जा रही है, उससे भोपाल की लाइफ लाइन भी टूट रही है. ऐसे में शहर दो हिस्सों में बंटकर रह जाएगा, जो इस शहर के नागरिकों को कई दशकों तक सालता रहेगा.

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प्रदेश की पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच कहती हैं कि कुछ समय पहले घर में लगे एक पेड़ को कटवाने के लिए निगम में आवेदन दिया था. उस पर कार्रवाई करने से पहले निगम ने पेड़ काटने की फीस सहित दूसरी शर्तों की जानकारी दी थी. लेकिन, अब स्मार्ट सिटी के लिए निगम के नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है. निगम अफसरों ने पहले इस क्षेत्र में 30 हजार पेड़ होने की जानकारी दी थी. दूसरी बार यह संख्या 6 हजार बताई गई. आर्किटेक्ट और टाउन प्लानर अवनीश सक्सेना ने कहा कि शहर में एमपी नगर और न्यू मार्केट गलत प्लानिंग का ही नतीजा हैं. इन दोनों क्षेत्रों के बीच का हिस्सा शिवाजी नगर और तुलसी नगर है. हरा-भरा होने के कारण यह हवा को स्वच्छ करने का काम करता है. इन दोनों जगह अब पेड़ नहीं बचे हैं. स्मार्ट सिटी में भी यही होगा.

4 हजार पेड़ काटे, 13,500 पौधे लगाए पर जीवित एक भी नहीं पूर्व महापौर विभा पटेल ने बताया कि विभिन्न विकास योजनाओं के लिए उनके कार्यकाल में पेड़ों को काटा और शिफ्ट किया गया था. इसके बाद अलग-अलग क्षेत्रों में 13,500 पेड़ लगाए गए थे. लेकिन इनमें से एक भी जीवित नहीं है. जबकि जो पेड़ शिफ्ट हुए थे, वे भी जिंदा नहीं बचे. स्मार्ट सिटी के लिए चयनित स्थल का सर्वे एक महीने तक चलेगा. इसके लिए संस्थाओं ने एक फॉरमेट बनाया है. इसमें पेड़ों के तने की मोटाई, पेड़ों की ऊंचाई, पेड़ों की चौड़ाई और घरों से पेड़ों की दूरी देखी जा रही है. सर्वे में यहां रुद्राक्ष, सिंदूर जैसे दुर्लभ प्रजाति के पेड़ भी मिले हैं. कुछ ऐसी प्रजाति के पेड़ हैं, जिन्हें सहज पहचानना आसान नहीं है. इसके अलावा यहां नीम, जामुन, आम, अमरूद, पीपल, बरगद आदि के पेड़ भी हैं.

कोई समझौता नहीं …

समाज सेवी राजेंद्र कोठारी कहते हैं कि स्मार्ट सिटी की साइट सिलेक्शन में निगम कर्मचारियों और अफसरों ने बड़ी गड़बड़ी की है. सरकार से चर्चा करके स्मार्ट सिटी के निर्माण क्षेत्र को बदलने की कोशिश सिर्फ कोशिश बनकर रह जाएगी. क्षेत्र की हरियाली को बचाने के लिए लगातार आंदोलन करना पड़ेगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा ज्ञापन

राजधानी की हरियाली के साथ ही इसके स्वाभाविक स्वरूप को बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ज्ञापन भेजा जा चुका है और लोग उनसे मिलने की तैयारी में जुट गए हैं. पहले भोपाल के स्थानीय प्रशासन को स्मार्ट सिटी के प्रस्तावित स्थल से होने वाले नुकसान और इससे बेहतर वैकल्पिक स्थानों की जानकारी दी जा रही है. इसके बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व मुख्य सचिव एंटोनी डिसा को ज्ञापन दिए जाएंगे. यदि इस पर पुनर्विचार नहीं हुआ तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने एक प्रतिनिधिमंडल  दिल्ली जाएगा. साथ ही वे राष्ट्रपति से भी मिलेंगे. कई संगठन स्मार्ट सिटी के स्थान को बदलने के लिए मैदान में आ गए हैं, जिन्होंने जनता के बीच में जाकर स्मार्ट सिटी को लेकर होने वाले नफा-नुकसान की जानकारी देने की शुरुआत कर दी है.

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