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झारखंड : चुंबन प्रतियोगिता पर सियासी उबाल
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झारखंड : चुंबन प्रतियोगिता पर सियासी उबाल

इस गांव में लगने वाले पारम्परिक मेले में अचानक एक प्रतियोगिता के बारे में घोषणा होती है और एक दर्जन से ज्यादा जोड़े आलिंगनबद्ध होकर चुंबन लेना शुरू कर देते हैं, कौन कितनी देर तक चुंबन लेता है और किसका चुंबन कितना सेक्सी है, इसे देखा जा रहा है. इसमें तीन चुंबन लेेने वाली जोड़ियों को पुरस्कृत भी किया जाता है. इसमें तीन चुंबन लेने वाली जोड़ियों को पुरस्कृत भी किया जाता है. इस चुंबन प्रतियोगिता की खबर आग की तरह आसपास के गांवों में पहुंची तो लोग इस प्रतियोगता को देखने के लिए दौड़ पड़े, खासकर युवा वर्ग. आखिरकार दौड़ते भी क्यों नहीं, फिल्मों में हीरो-हीरोइन के चुंबन दृश्य को देखने के लिए जहां सैकड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं, वहीं झामुमो के विधायक साइमन मरांडी ने तो इस तरह का प्रतियोगिता कराकर युवाओं का दिल ही जीत लिया. फ्री में दो घंटे का मजेदार शो, जिसे देख लोग रोमांटिक हो गए.

झामुमो के विधायक साइमन मरांडी ने संथाली समाज के लोगों के बीच चुंबन प्रतियोगिता का आयोजन कर एक नए विवाद को जन्म दिया है. पाकुड़ जिले के डुमरिया गांव के पारम्परिक मेले में साइमन ने चुंबन प्रतियोगिता का अश्लील आयोजन कराया, जिसने पूरे राज्य में हंगामा बरपा दिया है. इस आयोजन को लेकर भाजपा सहित सभी दलों में जबरदस्त आक्रोश है. इस प्रतियोगिता को लेकर विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विधायकों ने साइमन पर जमकर तीर चलाए.

सत्ता हो या विपक्ष साइमन मरांडी को सभी ने आड़े हाथों लिया और कहा कि किसी भी हाल में धर्म संस्कृति से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सभी ने यह माना कि आधुनिकता के नाम पर झामुमो ने अश्लीलता परोसने का काम किया है. पूरे राज्य में हंगामा बढ़ते देख झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन ने साइमन मरांडी को कारण बताओ नोटिस जारी कर इस मामले का पटाक्षेप करने का प्रयास किया है. वहीं राज्य सरकार ने इस आयोजन को अश्लील मानते हुए पूरे मामले की जांच का आदेश दिया है और सात दिनों के अंदर रिपोर्ट मांगा है.

राज्य सरकार ने यह साफ तौर पर कहा कि अश्लीलता परोसने वालों के साथ सख्ती से पेश आया जाएगा, ताकि इसकी पुनरावृत्ति न हो. इधर आयोजन के कर्ता-धर्ता झामुमो विधायक साइमन की अपनी ही भोंड़ी तर्क है, साइमन का कहना है कि इसमें गलत क्या हुआ है? पति-पत्नी एक-दूसरे का चुंबन लेते ही हैं और इस तरह की प्रतियोगिता हमारे समाज में होती आ रही है. यह प्रतियोगिता भी विवाहित जोड़ों के लिए ही थी. पाकुड़ जिले के डुमरिया गांव, जो आदिवासी बहुल गंाव है और ईसाइयों की यहां बहुलता है. इस गांव में लगने वाले पारम्परिक मेले में अचानक एक प्रतियोगिता के बारे में घोषणा होती है और एक दर्जन से ज्यादा जोड़े आलिंगनबद्ध होकर चुंबन लेना शुरू कर देते हैं, कौन कितनी देर तक चुंबन लेता है और किसका चुंबन कितना सेक्सी है, इसे देखा जा रहा है.

इसमें तीन चुंबन लेेने वाली जोड़ियों को पुरस्कृत भी किया जाता है. इसमें तीन चुंबन लेने वाली जोड़ियों को पुरस्कृत भी किया जाता है. इस चुंबन प्रतियोगिता की खबर आग की तरह आसपास के गांवों में पहुंची तो लोग इस प्रतियोगता को देखने के लिए दौड़ पड़े, खासकर युवा वर्ग. आखिरकार दौड़ते भी क्यों नहीं, फिल्मों में हीरो-हीरोइन के चुंबन दृश्य को देखने के लिए जहां सैकड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं, वहीं झामुमो के विधायक साइमन मरांडी ने तो इस तरह का प्रतियोगिता कराकर युवाओं का दिल ही जीत लिया. फ्री में दो घंटे का मजेदार शो, जिसे देख लोग रोमांटिक हो गए.

बेकार का हंगामा

वैसे इस प्रतियोगिता को लेकर झामुमो विधायक साइमन मरांडी का अपना अलग ही राग है. उनका कहना है कि इसे लेकर लोग बेकार में हंगामा बरपा रहे हैं. यह तो आदिवासी समाज की संस्कृति है और यह तो सैकड़ों वर्षों से होती आ रही है. इस तरह के प्रतियोगिता के आयोजन में गलत क्या है, पति-पत्नी एक दूसरे का चुंबन लेते ही हैं और यह प्रतियोगिता भी जोड़ी के लिए ही थी. इस प्रतियोगिता में पति-पत्नी ने ही एक-दूसरे का चुंबन लिया है, किसी गैर को तो आलिंगनबद्ध नहीं किया. इस प्रतियोगिता से एक खास दल के विधायकों को ज्यादा परेशानी हो रही है. ये लोग संकीर्ण मानसिकता के हैं और इनलोगों की ओछी हरकतों से पूरा समाज परेशान है. दरअसल झामुमो विधायक का इशारा हिन्दू संगठनों और भाजपा की ओर है जो वेलेन्टाइन डे जैसे मौकों पर युवा जोड़ियों के साथ हंगामा करते नजर आते हैं.

झामुमो विधायक साइमन का मानना है कि लोगों की सोच बड़ी बनी होनी चाहिए. ब्रॉड माइंड से ही युवाओं का विकास हो सकता है. संकीर्ण मानसिकता वाले ही इस तरह की प्रतियोगिता को लेकर हंगामा खड़ा कर रहे हैं. अभी आदिवासी समाज गैर आदिवासियों के सामने खड़ा नहीं हो पा रहा है, इसलिए उनकी सकारात्मक बातों को उजागर करने के लिए इस तरह की प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है.

इस तरह की प्रतियोगिता से लोगों की झिझक मिटेगी और समाज में बोल्डनेस के साथ लोग आगे आ सकेंगे. उन्होंने सवालिया लहजे में यह जानना चाहा कि आखिर इस तरह के आयोजन में गलत क्या है? लोगों ने इस प्रतियोगिता को आगे बढ़ाने के लिए कार्यक्रम में शिरकत किया है, इससे हमारी पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है. वहीं प्रदेश के हिन्दू संगठन हिन्दू युवा संघ ने भी इस घटना की निंदा की है और कहा है कि एक साजिश के तहत कुछ मिशनरी संस्था आदिवासियों का चोला पहनकर आदिवासी समाज की प्रतिष्ठा व छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं, इसकी जितनी भर्त्सना की जाए, कम है.

ईसाई नेता पश्चिमी सभ्यता लाना चाहते हैं

दरअसल आदिवासी से इसाई बने लोग विदेशी संस्कृति को ज्यादा पसंद करते हैं, जैसे आपस में मिलने पर गाल से गाल सटाकर अभिवादन करना, हाथ चूमकर अभिवादन जैसी संस्कृति जो विदेशों में लोकप्रिय है, को अपनाने लगे हैं, वैसे इनकी अपनी संस्कृति अत्यंत समृद्ध है. इसाई समुदाय के लोग ब्रॉड माइंड के माने जाते हैं और इनमें खुलापन ज्यादा है, जबकि आदिवासी जो सरना एवं हिन्दू धर्म को अंगीकार करते हैं, अब भी संकीर्ण मानसिकता वाले माने जाते हैं. वे अब भी अपने बड़े का अभिवादन दूर से ही धरती को प्रणाम कर करते हैं. इसाई समाज पश्चिमी सभ्यता व परंपराओं का पक्षधर है. इधर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष हेमलाल मुर्मू जो संथाल परगना से ही आते हैं, का कहना है कि कुछ ईसाई नेता झारखंड में पश्चिमी सभ्यता को लाना चाहते हैं. उन्होंने हजारों लोगों के बीच चुंबन प्रतियोगिता कराकर पूरे आदिवासी समाज को बदनाम किया है. ऐसे लोगों को सख्त सजा देनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि झामुमो विधायक साइमन मरांडी और स्टीफन मरांडी इस प्रतियोगिता के आयोजक थे. झामुमो के ईसाई विधायकों एवं चर्च मिशनरियों द्वारा साजिश के तहत संथाल परगना को यूरोप एवं येरुशलम बनाने का काम किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि संथाल परगना की संस्कृति में लड़का-लड़की को हाथ मिलाने को भी गलत माना जाता है. इस क्षेत्र में डोबो जोहार की संस्कृति है. इसमें लोग अपने बड़े को मुट्ठी बंद कर डोबा जोहार कर सम्मान देते हैं. एक साजिश के तहत ईसाई एवं गैर ईसाई के बीच वैमनस्य फैलाने का काम किया जा रहा है.

संथाल परगना के दुमका से चुने गए भाजपा विधायक एवं समाज कल्याण मंत्री लुईस मरांडी ने तो साफ तौर पर कहा कि साइमन इसे पुरानी संस्कृति बताते हुए लोगों को बरगलाने का काम कर रहे हैं. इतनी उम्र हो गयी है, पर आज तक ऐसी परम्परा न तो देखी और न ही सुनी. संथाल की परंपरा से अच्छी तरह वाफिक हूं. संथाल में ऐसी चुंबन प्रतियोगिता की कोई परंपरा नहीं है. झामुमो आधुनिकता के नाम पर अश्लीलता परोसने का काम कर रहा है. भाजपा के प्रवक्ता एवं पूर्व गृह सचिव जे.बी. तुबिद ने तो इस मामले को लेकर झामुमो पर ही हमला बोल दिया है. उन्होंने कहा कि झामुमो विधायक समाज को विकृत संस्कति देना चाहते हैं. आदिवासी समाज में महिलाओं की काफी इज्जत है. खुलेआम अश्लीलता नहीं परोसी जा सकती, इस कारण दोनों विधायकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए.

कारण बताओ नोटिस

इधर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इस मामले पर हंगामा बढ़ते देख अपने विधायक को कारण बताओ नोटिस थमा दिया है. कारण बताओ नोटिस जारी कर झामुमो ने इस मामले को ठंडा करने का जरूर प्रयास किया है, पर इस प्रतियोगिता को लेकर पूरे राज्य में जनाक्रोश भड़का हुआ है. झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन एवं उनके पुत्र हेमंत सोरेन जो विधानसभा में विधायक दल के नेता भी हैं, को इस आयोजन के संबंध में पूरी जानकारी थी और बतौर मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित थे. यह बात अलग है कि व्यस्तता के कारण दोनों ही नेता इस प्रतियोगिता में नहीं गए थे, दोनों ही नेताओं ने इस तरह के आयोजन को रोकने को लेकर झामुमो विधायक को मना नहीं किया. सबसे शर्मनाक तो यह है कि झामुमो के वरिष्ठ विधायक एवं राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री स्टीफन मरांडी भी इस तरह के आयोजन में शरीक हुए.

इस तरह का आयोजन अल्प संस्कृति का प्रचार करता है. इस प्रतियोगिता से झारखंड की आदिवासी संस्कृति को आघात लगा है. आदिवासी जनों में यह कहावत प्रचलित है कि उनकी वाणी ही संगीत है और उनकी चाल ही नृत्य. संथाल परगना की संस्कृति बहुत ही समृद्ध है. संथाली नृत्य में श्रृंगार शौर्य और धार्मिक स्वरूप का खूब समावेश है. स्त्री पुरुष दोनों का समन्वय इनके नृत्य संगीत का प्राणछंद है, इसमें लेेश मात्र की अश्लीलता की गुंजाइश नहीं होती है, पर साइमन मरांडी ने इस तरह का आयोजन कर पूरे संथाल के आदिवासियों को सकते में डाल दिया है. जिस संथाली समाज में लोग हाथ मिलाने से भी परहेज करते हैं, वहां इस तरह का कृत्य हुआ, विधायक के मुंह पर काला धब्बा लगा दिया. संथाल परगना से ही हूल क्रांति की शुरुआत हुई थी और आदिवासियों ने अंग्रेजों को नाकों चने चबवा दिये थे. वहीं इस समाज में अश्लीलता परोसने का काम किया गया.

जांच के आदेश

वैसे राज्य सरकार ने इस मामले को तूल पकड़ते देख पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं. अनुमंडल पदाधिकारी और पुलिस उपाधीक्षक इस मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट सरकार को देंगे. इस मामले में धारा-292, 293, 294 के तहत आरोपियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है. राज्य के संसदीय कार्य मंत्री सरयू राय ने कहा कि चुंबन प्रतियोगिता को लेकर जांच हो रही है. सरकार इस संबंध में सख्ती से कार्रवाई करेगी, यह बहुत ही निंदनीय है और आधुनिकता के नाम पर अश्लीलता फैलाई जा रही है.

जो भी हो, अब राज्य सरकार का दायित्व बनता है कि नैतिकता को बचाये रखने के लिए इस तरह के आयोजन की पुनरावृत्ति न हो. ऐसे ही लोगों में गिरावट आ रही है और जन प्रतिनिधि द्वारा इस तरह का आयोजन कराया जाता है, जो यह सोचने को विवश करता है कि आखिर हमारा समाज कहां जा रहा है, इसलिए इस तरह के आयोजनों को रोकना होगा और इसके लिए सरकार के साथ-साथ सभी को आगे आना होगा.

आगे भी होता रहेगा आयोजन: साइमन

झाझामुमो विधायक साइमन मरांडी ने कहा कि चुंबन प्रतियोगिता होती आयी है, आगे भी होती रहेगी. कहा कि आपलोग बेवकूफ हैं, पहले इसको जानिए कि यह क्या है? संथाल में दुलौर चौ होता है, जिसका मतलब है प्रेम भरा चुम्मा. उन्होंने कहा कि हमारे गांव में बहुत पहले से होता आया है और होता रहेगा. आदिवासी संस्कृति में जल्दी-जल्दी शादी टूट जाती है. शादी नहीं टूटे और पति-पत्नी में प्यार कायम रहे, इसी को लेकर दुलौर चौ कराया जाता है. उन्होंने कहा कि जो आपलोग देख रहे हैं, वह पति-पत्नी के बीच हो रहा था. हमारे गांव के लोगों ने हिम्मत बढ़ाने का काम किया है. सरकार क्या बोलेगी. लोग ऐसे प्रतिक्रिया दे रहे हैं जैसे किसी को फांसी दे दी गई हो, चुम्मा ही तो लिया है.

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