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आधार नंबर फ्रॉड से जुड़े हैं टेलीकॉम कंपनियों के तार, खतरे में आधार की साख

आधार नंबर फ्रॉड से जुड़े हैं टेलीकॉम कंपनियों के तार, खतरे में आधार की साख

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जब से मोबाइल नंबर को आधार कार्ड से लिंक करने की कवायद शुरू हुई है, तब से आधार कार्ड से जुड़े फ्रॉड के मामले भी बढ़ गए हैं. इन गड़बड़ियों के लिए बड़ी-बड़ी टेलीकॉम कंपनियां जिम्मेदार हैं, जिनके पास आम आदमी ने मोबाइल नंबर से लिंक कराने के लिए अपना आधार कार्ड डाटा सरकार के निर्देश पर सौंपे थे. सवाल ये है कि सरकार ने आम आदमी का गोपनीय डाटा इन कंपनियों के मोबाइल नंबर को आधार से लिंक करने से क्यों नहीं रोका? ऐसे में जब टेलीकॉम कंपनियां अपने फायदे के लिए आधार कार्ड का मिसयूज कर रही हैं, तब आम आदमी अपनी शिकायत लेकर भला कहां जाए?

हाल में देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल के खिलाफ फ्रॉड का एक मामला सामने आया है. एयरटेल ने ग्राहकों के मोबाइल नंबर को आधार कार्ड से लिंक कराने के लिए अपने ग्राहकों से उनके आधार नंबर मांगे थे. इस दौरान ग्राहकों के फिंगर प्रिंट भी ले लिए गए थे. यह सुविधा सिर्फ एयरटेल के सुविधा केंद्रों पर ही नहीं, बल्कि छोटे-छोटे मोबाइल रिचार्ज सेंटर्स पर भी उपलब्ध कराई गई थी, जहां जाकर एयरटेल के ग्राहक आधार कार्ड से मोबाइल नंबर लिंक करा सकते थे. जब गली-कूचे में खुले मोबाइल सेंटर्स द्वारा फर्जीवाड़ा कर बैंक अकाउंट से लोगों के पैसे निकालने की खबरें सामने आईं, तब जाकर ग्राहक सतर्क हुए. लेकिन जब यह खबर आई कि देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी एयरटेल भी अपने ग्राहकों को चूना लगाने में पीछे नहीं है, तब जाकर सरकारी अधिकारियों की नींद खुली. पता चला कि एयरटेल ने अपने ग्राहकों को बिना बताए एयरटेल पेमेंट बैंक में अकाउंट खोल दिया था और आधार कार्ड से उनके बैंक अकाउंट को लिंक कर दिया था.

इस धांधली का पता ग्राहकों को तब चला, जब उनकी गैस सब्सिडी का पैसा एयरटेल पेमेंट बैंक में ट्रांसफर होने लगा. कई महीनों तक तो ग्राहकों को पता ही नहीं चला कि उनकी गैस सब्सिडी का पैसा कहां जा रहा है? उन्होंने अपना पुराना बैंक अकाउंट चेक किया, तब पता चला कि उनकी गैस सब्सिडी का पैसा वहां जमा नहीं हो रहा था. इसके बाद उन्होंने गैस एजेंसी से संपर्क साधा, तब जानकारी मिली कि उनकी गैस सब्सिडी का पैसा एयरटेल पेमेंट बैंक में जमा हो रहा है. ग्राहकों को आश्चर्य हुआ कि जब उन्होंने एयरटेल पेमेंट बैंक में अकाउंट खोला ही नहीं है, तब उनका पैसा वहां कैसे जमा हो रहा है? काफी छानबीन के बाद पता चला कि एयरटेल ने ग्राहकों से बिना पूछे ही मुनाफा कमाने के लिए अपने बैंक में अकाउंट खोल लिए थे और ग्राहकों के करोड़ों रुपए अपने बैंक में जमा करा लिए थे.

केंद्र सरकार की प्रत्यक्ष लाभ स्थानांतरण के तहत गैस सब्सिडी की भेजी गई राशि 138 करोड़ से भी ज्यादा थी. शिकायत मिलने के बाद यूआईडीएआई ने एयरटेल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. हालांकि यूआईडीएआई ने भारती एयरटेल को अपने मोबाइल उपभोक्ताओं का आधार आधारित सत्यापन करने की छूट 31 मार्च तक दे दी है. इससे पहले प्राधिकरण ने एयरटेल को 10 जनवरी तक यह सुविधा प्रदान की थी, वो भी इस शर्त पर कि एयरटेल अपने बैंक में जमा गैस सब्सिडी की राशि ग्राहकों को कुछ दिनों में वापस कर देगी. इसके साथ ही प्राधिकरण ने एयरटेल पेमेंट बैंक के आधार से ई-केवाईसी सत्यापन पर रोक लगा दी है. यह रोक जांच पूरी होने और ऑडिट रिपोर्ट आने तक जारी रहेगी. कह सकते हैं कि यह आधार एक्ट का पूरी तरह से उल्लंघन है, जो जिम्मेदार निजी टेलीकॉम कंपनियों द्वारा किया जा रहा है. इस मामले में दोषी पाए जाने पर भारती एयरटेल कंपनी पर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है. प्राधिकरण इस मुद्दे पर भारतीय रिजर्व बैंक और दूरसंचार विभाग से रिपोर्ट मिलने के इंतजार में है, जिसके बाद कंपनी पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है. जांच में यह बात भी शामिल होगी कि कंपनी अपनी लाइसेंस शर्तों का अनुपालन कर रही थी या नहीं.

इन आरोपों पर एयरटेल के प्रवक्ता ने गोल-मोल जवाब देकर मामले को टालना चाहा. उन्होंने सिर्फ इतना बताया कि प्राधिकरण ने भारती एयरटेल को 31 मार्च 2018 तक आधार आधारित ई-केवाईसी सत्यापन की मंजूरी दे दी है. इसका अनुपालन प्राधिकरण द्वारा तय नियमों के आधार पर किया जाएगा.

सरकार ने इस पर त्वरित कार्रवाई की और प्राधिकरण ने कंपनी के आधार आधारित ई-केवाईसी सुविधा के उपयोग पर रोक लगा दी. बाद में ग्राहकों की सुविधा और उच्चतम न्यायालय के मोबाइल सिम सत्यापन की 31 मार्च 2018 की तय सीमा को देखते हुए प्राधिकरण ने 21 दिसंबर को एयरटेल को कड़े प्रावधानों के साथ 10 जनवरी तक मोबाइल ग्राहकों का आधार सत्यापन कराने की मंजूरी प्रदान की थी. इसे आज बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया गया है.

आधार कार्ड की अनिवार्यता को लेकर हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार को यह आश्वस्त करना होगा कि नागरिकों से ली जाने वाले जानकारी पूरी तरह से सुरक्षित है और उनके आधार का गलत इस्तेमाल नहीं किया हो रहा है. मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की बेंच ने सरकार से यह भी पूछा था कि क्या सरकार ने आधार कार्ड डेटा सुरक्षित रखने के लिए जरूरी कदम उठाए हैं? याचिकाकर्ताओं के वकील श्याम दीवान ने यह आरोप भी लगाया था कि आधार की जानकारियां गलत हाथों में बेची जा रही हैं और इस पर यूआईडीएआई का कोई नियंत्रण नहीं है. उन्होंने कहा कि ऐसा करना नागरिकों के मूल अधिकारों का हनन है. हाल में भारतीय क्रिकेटर एमएस धोनी के आधार कार्ड की जानकारी सार्वजनिक होने का मामला भी सामने आया था. हालांकि प्राधिकरण इस बात पर जोर देता रहा है कि उनके पास नागरिकों का बायोमैट्रिक डेटा सुरक्षित है और उसमें कोई सेंध नहीं लगा सकता है.

याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया था कि 2017 में सरकार ने 49 हजार ऑपरेटर्स को ब्लैकलिस्ट में डाल दिया था. इसका सीधा मतलब यही है कि कहीं न कहीं कुछ प्रक्रियागत खामियां थीं, जिसके कारण सरकार को यह कदम उठाना पड़ा था. जस्टिस चंद्रचूड़ ने यह सवाल भी उठाया था कि आप निजी कंपनियों को जानकारी देते हैं, तो फिर सरकार को देने से इंकार क्यों करते हैं? सवाल ये है कि सरकार सब्सिडी या अन्य सुविधाओं के लिए आधार का इस्तेमाल करती है, लेकिन निजी टेलीकॉम कंपनियों को इस तरह की छूट देना आधार की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े करता है, जिसका कोई भी मनचाहा इस्तेमाल कर सकता है.

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